हैप्पी बर्थडे सुमित्रा महाजन: पढ़िए, 'ताई' से कैसा है पत्रकारों का रिश्ता...

Thursday, 12 April, 2018

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

लोकसभा अध्यक्ष चुने जाने पर एक पत्रकार के सवाल के जवाब में सुमित्रा महाजन ने कहा था, ‘ऐसा नहीं है कि डांटने से सब ठीक हो सकता है। मां प्रेम भी करती है और ज़रूरत पड़ने पर डांटती भी है। मैं भी एक मां हूं और मैं उसी तरह से काम करुंगी। तब से अब तक सुमित्रा महाजन बाकायदा ऐसा करती आ रहीं हैं।

वे पत्रकारों की गलतियों पर उन्हें डांटती हैं और अच्छे कामों पर उनकी सराहना भी करती हैं। यही वजह है कि सुमित्रा महाजन और पत्रकारों के बीच एक ऐसा रिश्ता कायम हो गया हैजो शायद इससे पहले कभी देखने को नहीं मिला।

आमतौर पर लोकसभा अध्यक्ष और पत्रकारों के बीच संवाद केवल संसदीय कामकाज तक ही सीमित रहता हैलेकिन सुमित्रा महाजन के आने के बाद से इसमें बदलाव आया है। वे आगे बढ़कर पत्रकारों से बात करती हैंउनके साथ हंसी-मजाक करती हैं और सही-गलत का भेद भी बताती हैं। उनकी सीख में लोकसभा अध्यक्ष वाला रुतबा नहीं बल्कि एक मां या बड़ी बहन जैसा भाव होता है। इसीलिए पत्रकार भी उनपर बेवजह सवालों की बारिश नहीं करते।

ऐसे कई मौके आए हैं जब सुमित्रा महाजन ने पत्रकारों को आत्ममंथन की सलाह दी और बताया कि क्या वास्तव में उनके प्रश्न प्रासंगिक हैं
रोहिंग्या मुसलमानों वाले मुद्दे पर जब मोदी सरकार को कठघरे में खड़ा किया जा रहा था। मीडिया सवाल पूछ रहा था कि आखिर सरकार रोहिंग्याओं को शरण क्यों नहीं देतीतब सुमित्रा महाजन ने पत्रकारों से कहा था कि वे पहले मामले को समझें। उन्होंने उल्टा पत्रकारों से ही सवाल पूछ लिए थे कि क्या आप रोहिंग्या मुसलमानों के बारे में जानते हैंक्या आप उनका भार उठा सकते हैं?

कुछ इसी तरह जब उनसे रायपुर में राजनीति में वंशवाद को लेकर सवाल किया गयातो उनका जवाब था जब डॉक्टर का बेटा डॉक्टर बन सकता हैबिज़नेसमैन का बेटा बिज़नेसमैनतो राजनीति करने वाले का बेटा राजनीति क्यों नहीं कर सकताइसके बाद उन्होंने यह भी जोड़ दिया कि आप पत्रकार जो भी लिखते रहेउन्हें इस बात पर कोई आपत्ति नहीं है।   

पिछले साल एक कार्यक्रम में सुमित्रा महाजन ने पत्रकारों से सलाह दी थी कि सत्यं ब्रूयातप्रियं ब्रूयातना ब्रूयात अप्रियं सत्यं। यानी सत्य बोलना चाहिएप्रिय बोलना चाहिएसत्य किंतु अप्रिय नहीं बोलना चाहिए।’ उन्होंने यह भी कहा था कि पत्रकार मिथकीय चरित्र नारद मुनि से बहुत कुछ सीख सकते हैंख़ासकर निष्पक्षता को लेकर। लेकिन जो भी कहा जाना चाहिए वह सुंदर भाषा में कहा जाना चाहिए। विनम्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए सरकार से बहुत कुछ संवाद किया जा सकता है।

एक परिचय-

सुमित्रा महाजन को प्यार से ‘ताई’ कहकर बुलाया जाता है। खास बात यह है कि 16वीं लोकसभा के सांसदों की सूची में उनका नाम सुमित्रा महाजन ताई के तौर पर दर्ज है। लोकसभा अध्यक्ष बनने से पहले मध्य प्रदेश की राजनीति में वह सक्रिय रूप से भाग लेती थीं। वे इंदौर से लगातार आठ बार सांसद चुनी जा चुकी हैं। मृदुभाषी सुमित्रा महाजन अपने संघर्ष के बलबूते निचले स्तर से लोकसभा अध्यक्ष के शीर्ष पद तक पहुंची हैं। मीरा कुमार के बाद महाजन लोकसभाध्यक्ष बनने वाली वे दूसरी महिला हैं।

सुमित्रा महाजन का जन्म महाराष्ट्र के चिपलून में 12 अप्रैल 1943 को हुआ था। उन्होंने इन्दौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर और एलएलबी की शिक्षा प्राप्त की है। महाजन ने 5 जून 2014 को लोकसभा अध्यक्ष के लिए नामांकन भरा और निर्विरोध अध्यक्ष चुनी गईं। यह पहली बार है कि भारतीय जनता पार्टी का कोई सांसद लोक सभा अध्यक्ष बना है। सुमित्रा महाजन के व्यक्तित्व की सबसे खास बात यह है कि लगातार आठ बार सांसद बनने और फिर लोकसभा अध्यक्ष की कुर्सी पर विराजमान होने के बाद भी उनमें किसी तरह बदलाव नहीं आया है। वे आज भी उतनी ही मधुरता के साथ लोगों से मिलती हैं। 

उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत 39 वर्ष की आयु में हुई। सबसे पहले वे 1982 में इंदौर नगर निगम में पार्षद के तौर पर चुनी गईंफिर उप-महापौर बनीं और फिर मध्यप्रदेश में इंदौर लोकसभा सीट से सांसद चुनी गईं। वर्ष 1999 से 2004 के बीच वह अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में राज्य मंत्री भी रहीं तथा मानव संसाधनसंचार एवं प्रौद्योगिकी तथा पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस जैसे विभिन्न मंत्रालयों का प्रभार संभाला।  
कानून की स्नातक और कला में परास्नातक कर करने वालीं महाजन ने 1989 में कांग्रेस के दिग्गज और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाशचंद सेठी को एक लाख से अधिक मतों से हराकर पहली बार संसद में प्रवेश किया था। हालांकि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि राजनीति में उनकी पारी इतनी लम्बी होगी। गौर करने वाली बात यह है कि सुमित्रा महाजन गैर-राजनीतिक पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखती हैं बावजूद इसके उन्होंने इतना बड़ा मुकाम हासिल किया।

सुमित्रा महाजन को केंद्र की राजनीति में कदम रखने के लिए पूर्व भाजपा अध्यक्ष कुशाभाउ ठाकरे ने प्रेरित किया था। उन्हीं के आदेश पर महाजन ने चुनाव लड़ा और सांसद के रूप में चुनकर आईं। वे मानती हैं कि भाजपा आज जिस स्थिति में हैउसके लिए पुराने नेताओं की मेहनत है। एक मौके पर उन्होंने कहा था कि पुराने नेताओं ने जो मेहनत की हैवह आज रंग ला रही है। उन्होंने खेत की जुताईबुवाई इतनी परफेक्ट की है कि आज जो फसल दिख रही हैवह उनका किया हुआ काम है। हम उसकी रक्षा कर रहे हैं और कैसे ज्यादा फसल आते जाएंयह देख रहे हैं।

मृदुभाषी सुमित्रा महाजन को समाचार4मीडिया की ओर से जन्मदिन की शुभकामनाएं।



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