पद्मावत: खुद को सिर्फ वजाइना फील करने वाली स्वरा को यूं मिला करारा जवाब...

Thursday, 01 February, 2018

नज़र नज़र का फर्क होता है और सोच सोच का भी। जिस पद्मावत को देखकर अभिनेत्री स्वरा भास्कर बतौर महिला वजाइनायानी योनि से ज़्यादा कुछ महसूस नहीं कर पायीं उसी फ़िल्म में एक नारी की बुद्धि, साहस, अभिमान, पराक्रम और निर्णय क्षमता को कैसे बखूबी दिखाया गया है वो इंडिया न्यूज के पत्रकार सुधीर कुमार पाण्डेय ने अपनी इस खुले खत के जरिए समझाया। आप भी पढ़िए-

प्रिय स्वरा भास्कर जी,

आपकी वैजाइना’ (योनि) वाली चिट्ठी पढ़ी जो आपने पद्मावतदेखने के बाद संजय लीला भंसाली को लिखी हैआपका योनिवाला खत पढ़ने के बाद मैं भी फिल्म देखने गयाफिल्म देखने के बाद आपके पत्र के संदर्भ में जो मुझे लगा वो आपको प्रेषित करता हूं

आपने लिखा है कि पद्मावत देखने के बाद आपको लगा की आप योनिसे ज्यादा कुछ नहींआपका आरोप है की फिल्म में पद्मावती को सिर्फ उसकी पवित्रता के आसपास केंद्रित रखा गया हैइससे ज्यादा पद्मावती में कुछ नहींये आपने महिलाओं के संदर्भ में कहा हैलेकिन मैं आपके इस आरोप को निराधार मानता हूंमैं ऐसा क्यों बोल रहा हूं इसे सिलसिलेवार तरीके से फिल्म को आधार बनाकर समझाता हूंफिल्म को आधार बनाकर इसलिए क्योंकि जाहिर है आपने भी फिल्म देखने के बाद ही टिप्पणी की हैतो इधर उधर की बात ना करके सीधा फिल्म के दृश्यों पर आते हैं

1- आपको पद्मावत में सिर्फ योनिदिखी जबकि आप भूल गई फिल्म के पहले ही दृश्य में जहां पद्मावती की एंट्री होती हैसिंघल देश की राजकुमारी अकेले जंगल में शिकार करने गई थीक्या आपको ये शौर्य नहीं दिखताजंगल में अकेले शेर का शिकार करने गई राजकुमारी का साहस आपको ना दिखालेकिन आपको दिखी तो योनि

2- फिल्म में राजकुमारी पद्मावती ने पिता की सहमति से पहले ही अपना वर चुन लिया थाक्या ये एक राजकुमारी की आधुनिक सोच नहीं थीजो पिता की सहमति से पहले ही अपना वर चुन चुकी थीअगर ये अधिकार आज भी सब लड़कियों को मिल जाए तो समाज में कितना सकारात्मक बदलाव हो जाएगालेकिन ये आपको ना दिखासिंघल देश से हजारों किलोमीटर दूर अपने वर के साथ चित्तौड़ आ जानाक्या ये पद्मावती का साहस नहीं दर्शाता ?…लेकिन आपको दिखी तो सिर्फ योनि

3- फिल्म में पद्मावती का सामना जब कुटिल पुरोहित से होता है तो रानी अपने सौंदर्य की जगह बुद्धि को चुनती हैवो पुरोहित के हर सवाल का तर्क से साथ जवाब देती हैआपको पद्मावती की बुद्धि नजर ना आईउसकी तर्क शक्ति नजर ना आईनजर आई तो सिर्फ योनि

4- जब राजा रतन सिंह और पद्मावती एकांत में होते हैं और पुरोहित उनका एकांत भंग करता है तो एक खास संदेश दिया गयाराजा तो पुरोहित को जेल की सजा सुनाते हैं लेकिन पद्मावती के कहने पर उसे देश निकाला दिया जाता हैशायद ही आपने कभी सुना हो किसी राजा ने रानी के कहने पर शाही फैसला बदल दिया लेकिन पद्मावत में ऐसा होता हैफिल्म में राजा रतन सिंह तो एक पल की देरी नहीं करतेराजा के फैसले में रानी की सहमति देखने को मिलती हैबराबरी देखने को मिलती है…. लेकिन आपको दिखी तो सिर्फ योनि

5-जब राजा रतन सिंह खिलजी को महल में आने की मंजूरी देते हैं तो उसका विरोध सिर्फ और सिर्फ पद्मावती ने किया थाजैसा पद्मावती ने कहा ठीक वैसा ही हुआखिलजी ने राजा की शर्त मान लीपद्मावती की आशंका सच जाहिर हुईयहां पद्मावती की दूरदर्शिता दिखाई देती है लेकिन आपको दिखी तो सिर्फ योनि

6- खिलजी जब रानी को देखने की इच्छा जाहिर करता है तो सबका विरोध कर रानी खुद को पेश करने का फैसला लेती हैंइससे साफ पता चलता है सारे दरबार की राय पर रानी पद्मावती का निर्णय भारी पड़ा एक रानी की बात सबने सुनी और मानी…. यहां आपको रानी के फैसले की धमक सुनाई ना दीआपको दिखाई दी तो सिर्फ योनि

7- जब खिलजी रतन सिंह का अपहरण कर लेता है तो पद्मावती ने गजब की चाल चलीहजारों किलोमीटर दूर से कुटिल पुरोहित का सिर कटवा दियाऐसी चाल तो आज के बड़े बड़े नौकरशाह नहीं चल पातेउस वक्त के बड़े दरबारी बडे वजीर ऐसी बुद्धि नहीं लगा पाते थेलेकिन आपको पद्मावती की कूटनीति ना दिखीआपको दिखी तो सिर्फ योनि

8-खिलजी ने जब राजा रतन सिंह का अपहरण किया तो पद्मावती ने ऐसा फैसला लिया जो इतिहास में ना पहले सुना गया ना बाद मेंपद्मावती खुद खिलजी के महल में गईंवीरता का परिचय देते हुए राजा रतन सिंह को छुड़ा कर वापस लाती हैंपूरे राज्य में राजा से ज्यादा रानी की जयजयकार होती हैमुझे कोई एक उदाहरण बता दीजिए जहां रानी ने दुश्मन के किले में जाकर राजा को बचाया होइतिहास में इतना बड़ा कारनामा करने वाली सिर्फ एक रानी हुई पद्मावतीलेकिन आपको दिखी सिर्फ योनि

अब फिल्म के सबसे विवादित हिस्से पर आते हैंजौहर के हिस्से परआपने जौहर को आधार बनाकर आरोप लगाया की महिलाओं को जीने का हक हैमहिलाएं पति के बगैर भी जिंदा रह सकती हैंवो आजाद हैंऔर बहुत कुछआपकी एक-एक बात से मैं हजार-हजार बार सहमत हूंलेकिन वो आज से 800 साल पहले का समाज थाआज हालात बदल गए हैंलेकिन यहां मामला कुछ और हैअब वो समझिए

1- आपने जानबूझकर सती और जौहर को आपस में मिक्स कियाजौहर और सती में अंतर हैये दोनों ही कुप्रथा थी जो वक्त से साथ खत्म हो गई और कलंक मिट गयासती पति की मौत पर होता था जबकि जौहर युद्ध में हार के बाद होता थादोनों ही कुप्रथा थी लेकिन जौहर मजबूरी में की जाती थीसामूहिक फैसले से होता थाजबकि सती प्रथा समाज और परिवार के दबाव मेंदोनों ही पाप थेअच्छा हुआ बंद हुए

2- आपने लिखा की पूरी लड़ाई योनि के पीछे हुईलेकिन आप भूल गईखिलजी को पद्मावति से प्रेम नहीं थावो हवस थीराजा रतन सिंह के पास कोई विकल्प था क्या ? आपको क्या लगता है पद्मावति अगर खिलजी को मिल जाती तो वो सम्मान की जिंदगी जीतीआप क्या ये कहना चाहती हैं की किसी दरिंदे के साथ बिना मर्जी के किसी महिला का रहना आजाद ख्याली है और राजा रतन सिंह को पद्मावति को दुश्मन को सौंप देना चाहिए था….

3- जौहर के हालात को आप जानबूझकर छिपा ले गईबागों में बहार नहीं आई थीहजारों आक्रमणकारी महल में प्रवेश कर चुके थेया तो वो कत्ल करते या इज्जत लूटतेमृत्यु दोनों तरफ थीमर कर भी मरना था और बचकर भी मरना थाखिलजी और उसकी सेना किसी को छोड़ने वाली नहीं थीयहां पर राजपूत महिलाओं ने सम्मान के साथ मृत्यु को चुनाक्या उनके पास कोई दूसरा विकल्प था ? जब युद्ध में पारंगत योद्धा ना जीत सके तो खिलजी की विशाल सेना से कुछ महिलाएं कैसे जीत पातीवो सनी देओल नहीं थीप्रैक्टिल तरीके से देखेंगी तो खिलजी की दरिंदी सेना उन्हें नोच नोच कर खा जातीवो खुद आग में कूद गई नहीं तो उनके साथ जानवरों से बदतर सलूक होताहो सकता है आप उस वक्त कुछ और फैसला लेतीआप खुद को खिलजी के हवाले कर देतीवो आपका मत होता लेकिन राजपूत महिलाओं ने ऐसा नहीं कियावो उनकी स्वतंत्रता थीआज देखने में जौहर का वो फैसला रुढिवादी लगता है पर एक बार उस हालात को मद्देनजर रखिएक्या राजपूत महिलाओं के पास सम्मान से जीने का कोई और विकल्प थामृत्यु तो राजा की मौत के साथ ही निश्चित हो चुकी थीक्योंकि 12वीं सदी में लोकतंत्र नहीं था राजशाही थीइतिहास को इतिहास के नजरिए से देखना चाहिएआपको हालात छिपाकर अपनी बात नहीं रखनी चाहिए थी

4- संजय लीला भंसाली का विरोध करना मेरी समझ के परे है क्योंकि उन्होंने जो दिखाया वो लिखा हुआ हैउन्होंने तो अपनी तरफ से इतिहास गढ़ा नहींइस हिसाब से तो मुगले आजम से लेकर जोधा अकबर तक हर ऐतिहासिक फिल्म में निर्देशक अपने हिसाब से तोड़ मरोड़ कर सकता है लेकिन क्या ये इतिहास के साथ इंसाफ होगा ? आपने तो कुछ फिल्में की हैंआपको तो मालूम होगाइतिहास में जो जैसा लिखा है वैसा ही दिखाना होता हैक्योंकि आप उस दौर में नहीं थेऔर आज बैठकर 800 साल पहले का मूल्यांकन नहीं किया जा सकताइसलिए ट्रिगर दबाने से पहले निशाना तो ठीक से लगा लिया होता

5- आपने कहा की जौहर का महिमामंडन करने से देश में गलत संदेश जाएगाअरे वाह.. एक सीरियल आया था बालिका वधूउस सीरियल के हिट होने के बाद क्या बाल विवाह बढ़ गए थेआपको क्या लगता है देश दुनिया को समझने की शक्ति सिर्फ आपके पास है…. आप आज के युवा को रील और रिएलिटी का फर्क ना समझाएंहमको अच्छी तरह से मालूम है की मनोरंजन क्या हैपद्मावत देखने के बाद कोई जौहर या सती ना होगा ना कोई उकसाएगा इससे निश्चिंत रहिएक्योंकि देश उस दौर से बहुत आगे निकल चुका हैइतिहास को जानना और इतिहास को समझना दो अलग चीजे हैंआपने दोनों को मिक्स करके कुछ अलग ही परिभाषा गढ़ दी

आपका प्रशंसक
सुधीर कुमार पाण्डेय

 

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