ऑल इंडिया रेडियो की सर्विस मे महरूम है कुमाऊं-गढ़वाल

Tuesday, 18 April, 2017

समाचार4मी‍डिया ब्यूरो ।।

एक ओर सरकार गांव-गांव में रेडियो की पहुंच बढ़ाने का दावा कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी रेडियो पर प्रसारित होने वाले ‘मन की बात’ कार्यक्रम के जरिये ज्‍यादा से ज्‍यादा लोगों तक अपनी बात पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं, देश में कई स्‍थान ऐसे भी हैं, जहां पर या तो रेडियो की सुविधा ही नहीं है और यदि है भी तो सीमित दायरे तक रेंज होने के कारण अधिकांश लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। ऐसे ही एक श्रोता ने समाचार4मीडिया को पत्र भेजकर अपनी समस्‍या की ओर ध्‍यान आकृष्‍ट कराने का काम किया है...

सर, मैं उत्‍तराखंड के जिला पिथौरागढ़ की तहसील मनुस्‍यारी का रहने वाला हूं। भौगोलिक दृष्टि से पिथौरागढ़ बहुत संवेदनशील इलाका है और यह भारत-चीन के बॉर्डर के पास पड़ता है। मुझे पता चला है कि इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों ने अपने रेडियो सेट के शॉर्ट वेव बैंड पर रेडियो कार्यक्रमों में बदलाव किया था। इसके बाद वे यहां से ऑल इंडिया रेडियो की उर्दू सर्विस, रेडियो सीलोन व ऑल इंडिया रेडियो लखनऊ व नजीबाबाद से न्‍यूज सुन सकते थे। ऑल इंडिया रेडियो के इन कार्यक्रमों के जरिये मनोरंजन के साथ-साथ देश-दुनिया में घटित हो रही घटनाओं से वाकिफ हो पाते थे और यही एकमात्र जरिया उनके पास था।

लेकिन पिछले कुछ वर्षों से शाम छह बजे के बाद से अगले दिन सुबह सात बजे तक बड़ी मुश्किल से सिर्फ कुछ स्‍टेशनों से ही प्रोग्राम सुने जा सकते हैं। हालांकि रेडियो नेपाल और रेडियो चाइन इन सीमावर्ती इलाकों में ज्‍यादा साफ सुनाई देता है और ज्‍यादा परेशानी भी नहीं होती है। उत्‍तराखंड के अन्‍य जिलों में भी यही स्थिति है। यहां यह बताना भी जरूरी है कि अल्‍मोड़ा में ऑल इंडिया रेडियो के रेडियो स्‍टेशन की शुरुआत होने के बाद भी यह मुश्किल से सुनाई देता है।

मनुस्‍यारी तहसील के तहत 223 गांव आते हैं और इनमें से सिर्फ 20-25 गांवों में ही अखबार आता है। ऑल इंडिया रेडियो का प्रसारण न होने की वजह से बाकी गांवों के लोगों को यह पता ही नहीं चल पाता है कि देश-दुनिया में क्‍या चल रहा है और सरकार ने उनके लिए क्‍या योजनाएं बनाई हुई हैं।

उत्‍तराखंड के कुमाऊं और गढ़वाल मंडल के 13 जिलों में 1900 गांव हैं। इनमें से सिर्फ जिला और तहसील मुख्‍यालय के अलावा इनके आसपास के गांव ही किसी तरह अखबार की व्‍यवस्‍था कर पाते हैं लेकिन ऑल इंडिया रेडियो उनके लिए भी एक सपना बना हुआ है।

सर, आपके पत्र के माध्‍यम से मैं रेडियो स्‍टेशन अल्‍मोड़ा का इस ओर ध्‍यान आकृष्‍ट करना चाहता हूं। इसके ब्रॉडकास्‍ट कवरेज एरिया में बागेश्‍वर, चंपावत, नैनीताल, पिथौरागढ़ और अल्‍मोड़ा भी आता है लेकिन सच्‍चाई यह है कि यह अल्‍मोड़ा जिला मुख्‍यायल को भी नहीं कवर कर पाता है। सिर्फ पिथौरागढ़ में एक रिले ट्रांसमिटर है लेकिन इसकी हालत भी बहुत खराब है।

सरकारी रिकॉर्ड्स में जरूर ब्रॉडकास्‍ट कवरेज सभी गांवों तक दिखाई गई होगी। यदि ऑल इंडिया रेडियो उत्‍तराखंड के लोगों तक अपनी पहुंच नहीं बना पा रहा है तो इसे बंद कर देना चाहिए क्‍योंकि यह आम आदमी के खर्चे पर चल रहा है।

हालांकि अल्‍मोड़ा, पौड़ी और चमोली में ऑल इंडिया रेडियो के स्‍टेशन हैं लेकिन इनके द्वारा प्रसारित किए जाने वाले कार्यक्रम उनके जिला मुख्‍यालयों के गांवों में भी नहीं सुने जा सकते हैं। पिथौरागढ़ और उत्‍तराखंड के अन्‍य जिलों में रिले स्‍टेशन तो हैं लेकिन उनका आउटपुट शून्‍य है।

इस पत्र के माध्‍यम से मेरा यह कहना है कि यही कारण है कि सरकार द्वारा आम आदमी के लिए बनाई गई पॉलिसी और योजनाओं की जानकारी ही लोगों तक नहीं पहुंच पाती है, जिन्‍हें इनकी सबसे ज्‍यादा जरूरत है।

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