अब तुम लापरवाही नहीं कर सकते साईं बाबा! मम्मी,भाभी,शिवम प्रखर सब तुम्हारे हवाले...

Tuesday, 26 December, 2017

उपेंद्रनाथ पांडेय

शेखर भाई, तुमने यह अच्छा नहीं किया!!!!

आखिर तुमने फेसबुक फेस न करने की मेरी कसम तुड़वा दी। इसी छह मार्च को इसी जगह मुझे भाई संतोष तिवारी के जाने का दर्द बयां करना पड़ा, आज तुम इस जहां से चले गए। जाते समय तुमने यह भी नहीं सोचा कि हम मम्मी को कैसे फेस कर पाएंगे, जिनके हार्ट तुम्हीं थे। उनके हार्ट को कैसे बचाएं, क्या करें।

गुड़िया भाभी अभी कल रात यशोदा अस्पताल से मेरे लौटते समय डबडबाई आंखों से मुझसे हाल पूछ रही थीं, जब मैं तुम्हें पुकार कर आईसीयू से लौटा था। अगर तुम्हें जाना था, तो कंधा उचका कर और गर्दन हिलाकर मुझे संकेत क्यों किया कि फिक्र न करो। तुमने अपना वादा तोड़ दिया, आपरेशन थियेटर जाते समय मुझसे कहा था-फिक्र न करो यार, अभी दस मिनट में लौटता हूं, और लौटकर हमें अपने अंदाज में प्यार से गले लगाने की जगह स्वर्ग पहुंच गए, ईश्वर से इंटरव्यू करने।

कहते हैं ईश्वर अच्छे लोगों को जल्दी अपने पास बुला लेता है। ईश्वर तेरी यह कौन सी नीति है। हमें वापस कर दे हमारा शेखर, अच्छा न सही--हम उसे बुरा बनाकर भी अपने पास रोक लेंगे। हमें गाली भी दे और मारे भी तो भी गम नहीं, पर उसे इस तरह स्वर्गलोक क्यों ले गए।

बीते शुक्रवार से फौलाद बने शिवम और मुझसे अभी फोन पर रो-रोकर पुकार कर रहे मासूम प्रखर का तो चेहरा देखते भगवान। ...और ...साइं बाबा, आपसे तो यह उम्मीद बिलकुल नहीं थी। शेखर के शनिवार की सुबर आपरेशन कक्ष में जाने के बाद से आपरेशन पूरा होने तक गुड़िया भाभी तुम्हारे चरणों में बैठी प्रार्थना ही करती रहीं। मैं तो उन्हें और उनके आंसू देख देख कर घबराहट मे हास्पिटल टेंपल से गीता उठाकर पढ़ने लगा था, साईं बाबा तुम क्या कर रहे थे जो भाभी की पुकार नहीं सुन पाए। मम्मी के चेहरे का दर्द नहीं पढ़ पाए।

अब तुम लापरवाही नहीं कर सकते बाबा! मम्मी,भाभी,शिवम प्रखर सब तुम्हारे हवाले। हे ईश्वर, एक वर्ष के भीतर दो दो मित्रों की विदाई,.. कैसे झेलेंगे हम। यह तो जिंदगी भर का दर्द दे दिया आपने।

(शेखर त्रिपाठी, दैनिक जागरण के इंटरनेट एडीटर थे, और दैनिक जागरण लखनऊ के संपादक, दैनिक हिन्दुस्तान वाराणसी के संपादक, आजतक एडिटोरियल टीम के सदस्य रहे। फाइटर इतने जबरदस्त कि कभी हार नहीं मानी , कभी गलत बातों से समझौता नहीं किया। किंतु जागरण डॉट कॉम के संपादक रूप में दायित्व निभाते संस्थान हित में वह दोष अपने ऊपर ले लिया जिसके लिए वे जिम्मेदार ही नहीं थे। चुनाव सर्वेक्षण प्रकाशन के केस में एक रात की गिरफ्तारी और फिर हाईकोर्ट में पेंडिंग केस के कारण बीते छह महीने से संपादकीय कारोबार से दूर रहने की लाचारी ने उन्हें तोड़ दिया और आज अभी कुछ देर पहले गाजियाबाद के कौशांबी मेट्रो स्टेशन के निकट यशोदा हास्पिटल में उन्होने अंतिम सांस ली)

(शेखर त्रिपाठी के अभिन्न मित्र उपेंद्र पांडेय के फेसबुक वॉल से )

ये जाना तो अखर गया शेखर त्रिपाठी

नगेंद्र प्रताप

बहुत बुरा लगता है जब किसी प्रिय को इस तरह विदा करना पड़ता है। आज निगमबोध घाट पर शेखर को विदा करते समय बहुत तकलीफ हो रही थी। इतने खिलंदड़ इंसान का इस तरह असमय चला जाना बेहद तकलीफदेह है। कल दोपहर बाद मेरठ से लौटते हुए मोबाइल पर बनारस से अरुण का फोन आया था। अमूमन ड्राइव करते वक़्त फोन नहीं उठाता, लेकिन अरुण का असमय फोन देख कुछ आशंका हुई, और वही हुआ। अरुण ने शेखर के जाने की खबर दी। देर शाम यशोदा हॉस्पिटल से लौटने के बाद सहज नहीं हो सका था। सहज तो अब भी नहीं पा रहा हूँ। बहुत कुछ याद आ रहा है। 

वो पीजीआई में तुम्हारे सफल आपरेशन के बाद जब सेब लेकर गया था तो तुमने मुस्कराते हुए, चिढ़ने के अंदाज में कहा था, और कुछ नहीं मिला था लाने के लिए। 

हर उस बार जब मैंने सिगरेट पीने से मना किया था ... थोड़ा पॉज देकर तुम कहते थे ...हो गया ... और मुझे ही सिगरेट ऑफर कर देते थे। बहुत कुछ और भी। 

बस अफसोस ये रह गया कि दिल्ली आ जाने के बाद इधर यहां हमारी आमने - सामने मुलाकात नहीं हो पाई। बीच में एक बार इरादा बना भी, वादा भी हुआ लेकिन पूरा नहीं हो पाया। ये कसक बनी रहेगी। अपनी वाल देखने तो तुम लौटोगे नहीं कि तुम्हारे चाहने वाले कैसे कैसे याद कर रहे हैं तुम्हें। 

वाकई बहुत याद आओगे दोस्त ... विदा Shashank Shekhar Tripathi

सुदेश गौड़

लखनऊ जागरण दफ्तर का यह फोटो 1987 यानी आज से 30 साल पहले का है। इस फोटो में तीन किरदार हैं। सबसे बाएं लखनऊ में रह रहे हमारे मित्र कुमार सौवीर ने रविवार को दोपहर बाद (बीच में बैठे) जिंदादिल, हरफनमौला शेखर त्रिपाठी के बारे में मनहूस खबर दी तो मैं (सबसे दाएं) हतप्रभ व अवाक रह गया। 30 साल पहले का यह फोटो आज इस संदर्भ में उपयोग होगा और तीनों किरदार फिर इस नई भूमिकाओं में दिखेंगे। सोचा तो नहीं था पर ईश्वर को शायद ऐसा ही मंजूर होगा। अलविदा शेखर भाई बहुत याद आओगे



पोल

आपको 'फैमिली टाइम विद कपिल शर्मा' शो कैसा लगा?

'कॉमेडी नाइट्स...' की तुलना में खराब

नया फॉर्मैट अच्छा लगा

अभी देखा नहीं

Copyright © 2017 samachar4media.com