आशीष बाग्गा ने बताया, कैसे लोगों की आंखे खोल रहा है 'आजतक' का ये कैंपेन

Monday, 11 July, 2016

प्रियंका मेहरा व सूर्या कन्नौथ ।।

हाल ही में चलाई गई ‘आजतक’ की मुहिम ‘आंखे खोल दे’ आज के न्यूजमेकर्स को एक विशेष स्थान दे रहा है। चैनल की टैग लाइन ‘सबसे तेज’ इस मुहिम को और तेज कर रही है।

ब्लैक एंड व्हाइट कमर्शियल सीरीज में हास्य और रचनात्मकता का प्रयोग किया गया है, जो समाज की आंखे खोल रहे आजतक की चलाई गई कुछ बड़ी न्यूज स्टोरी के इर्दगिर्द होती है। आजतक द्वारा चली गई ये मुहिम कई साल पहले चलाई गई उनकी मुहिमों जैसी ही है।

इस तरह की कई फिल्में पहले भी जारी की गईं थीं, जिनमें हास्य कवि, मिसिंग बेटा, विदेश यात्रा शामिल थीं। इन फिल्मों के सभी अलग-अलग विषय आजतक के साहस पर प्रकाश डालते है कि वह हर खबर को स्पष्ट रूप से कहता है।

इंडिया टुडे ग्रुप के सीईओ आशीष बग्गा ने विशेष बातचीत में इस मुहिम के पीछे की चुनौतियों के बारे में बताया कि कैसे इसकी मदद से ‘आजतक’ की छवि को मजबूत करने में मदद मिली और इस मुहिम की सभी फिल्में हास्यापद होने के साथ हाल की घटनों से जुड़ते हुए कहानी बताती है।

क्या आप इस अभियान के उद्देश्य और इसके पीछे कारण को व्यक्त कर सकते हैं?

इस अभियान का मकसद ब्रैंड की भूमिका पर फोकस करने के साथ ही ‘आजतक’ के नंबर-1 पोजिशन को एक नया आयाम देना है। यह अभियान ‘समाज की आंखे खोल दे’ मैसेज से ‘सबसे तेज’ न्यूज चैनल के रूप में ‘आजतक’ के पायदान को और मजबूत कर रहा है।

पिछले 15 सालों से, ‘आजतक’ देश का नंबर-1 न्यूज चैनल बने रहने के साथ ही दर्शकों के दिलोदिमाग पर पूरी तरह से छाया हुआ है। यह मुहिम ‘आजतक’ के पुरानी सच को उजागर करने की भूमिका फिर से दोहरा रही है, इसके साथ ही चैनल भारतीय दर्शकों को एक अच्छी पसंद देना चाहता है।

आपने इस मुहिम को ब्लैक एंड वाइट में उतारने का क्यों सोचा?

आजतक ने हमेशा खबरों को बिना किसी डर के दिखाया है बिल्कुल वैसे ही जैसे ब्लैक एंड व्हाइट रंग बिना किसी भटकाव के विषय पर केन्द्रित रहता है।

ये फिल्में आजतक की पुरानी मुहिम जैसी ही है, इसे दोबारा से लाने के पीछे क्या वजह है?

आज समाचार के क्षेत्र में कम्पटिशन बढ़ गया है पर फिर भी नंबर-1 के  स्थान पर बिना चुनौती के आजतक ही है। हम चाहते हैं कि दर्शक हमारे शुरुआती विज्ञापनों को याद करें, साथ ही इनका उद्देश्य चैनल की इमेज को बनाना है। सबसे पहली मुहिम ने चैनल के उद्देश्य ‘सबसे तेज’ को प्रभावशाली ढंग से स्थापित किया। आज के समाचारों क्षेत्र के परिद्वश्य में तेजी ही बहुत बड़ा अंतर पैदा नहीं कर सकती इसलिए यह चुनौती को लेते हुए हम इसे सबसे तेज वाली बात में कुछ नया जोड़ रहे हैं।

इस मुहिम कों चलाने में किस प्रकार की चुनौतियां आईं?

इस मुहिम में भी पुरानी मुहिम जैसी ही चुनौतियां आई, जैसे हस्य के साथ आजतक का विषय उद्देश्य न भटक जाए।

इस मुहिम ने आजतक की छवि को मजबूत बनाने में कैसे मदद की है? क्या आप इसे आंकड़ों में समझा सकते हैं?

यह मुहिम ‘समाज की आंखे दे’ मैसेज देने के साथ ही ‘सबसे तेज’ न्यूज चैनल के रूप में ‘आजतक’ के स्थान को और मजबूत बना रहा है। ‘आंखे खोल दे’ मुहिम आजतक की भूमिका को दोहराती है।

रेटिंग के तौर पर देखें तो आजतक ने नंबर-1 के तौर पर रहते हुए कई रिकॉर्ड तोड़े। बार्क इंडिया के मुताबिक, चैनल हर वर्ग (लिंग, उम्र-सीमा और NCCS) में लगातार शीर्ष पर रहा है। आजतक ने 100 मिलियन के दर्शकों की संख्या को भी पार कर लिया है और यही नहीं, यह अकेला एक ऐसा चैनल है जिसने तीस हफ्ते से भी ज्यादा समय से अपनी बादशाहत कायम रखी है।

अपने ग्रामीण दर्शकों को ध्यान में रखते हुए क्या आप कंटेंट स्ट्रैटजी में  कोई बदलाव करने की सोच रहे हैं?

हां बिल्कुल, ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों के न्यूज स्पेस में नंबर-1 के रूप में एक एग्जाम्पल सेट करना है और प्रक्रिया हमेशा चलती है। इसीलिए हमारे प्रोग्राम में इस तरह के विषय दिखाए जाते हैं जोकि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से लिए जाते हैं, जिनमें प्रेरणादायक कहानियां, समस्याएं, मुद्दे और नजरिया शामिल हैं।

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