'टाइम्‍स इंटरनेट’ के CEO ने बताया, किन वजहों से होती है डिजिटल बिजनेस की ग्रोथ

'टाइम्‍स इंटरनेट’ के CEO ने बताया, किन वजहों से होती है डिजिटल बिजनेस की ग्रोथ

Thursday, 10 May, 2018

निशांत सक्‍सेना ।।

वर्ष 1999 में अपनी शुरुआत के बाद से ही 'टाइम्‍स इंटरनेट' (Times Internet) देश के बड़े इंटरनेट नेटवर्क्‍स में शुमार हो गया है। चाहे न्‍यूज हो, म्‍यूजिक हो, विडियो हो, पर्सनल फाइनेंस हो अथवा क्रिकेट ही क्‍यों न हो, 'टाइम्‍स इंटरनेट' ने इतने वर्षों में अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज कराई है और इसका ऑडियंस बेस भी काफी बड़ा हो चुका है।

'टाइम्‍स ऑफ इंडिया' (Times of India) के इस डिजिटल वेंचर के पास 55 प्रमुख प्रॉपर्टीज हैं, जिनमें 14 न्‍यूज ब्रैंड्स, 12 डिजिटल फर्स्‍ट ब्रैंड्स, तीन क्‍लासिफाइड और 14 ग्‍लोबल पार्टनर्स भी शामिल हैं। ट्रेडिशनल मीडिया कंपनी से टेक्‍नोलॉजी कंपनी की ओर बदलाव के बारे में 'टाइम्‍स इंटरनेट' के सीईओ गौतम सिन्‍हा ने कहा, 'बेनेट कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड' (BCCL) का इतिहास 100 वर्षों से ज्‍यादा पुराना है, इसलिए हमने एक मीडिया कंपनी के बतौर अपनी शुरुआत की थी। हमने 'टाइम्‍स ऑफ इंडिया', 'इकनॉमिक टाइम्‍स', 'नवभारत टाइम्‍स' आदि से अपनी शुरुआत की। लेकिन समय के साथ हमने महसूस किया कि हम न सिर्फ यूजर्स को सूचना देने में ही नहीं बल्कि उसके साथ जुड़ने में और उसका मनोरंजन करने में भी काफी बेहतर हैं।      

टाइम्‍स इंटरनेट और उसकी स्‍ट्रेटजी (Times Internet and its strategy) :

आज की दुनिया में सिर्फ कंटेंट ही नहीं, बल्कि उसका डिस्‍ट्रीब्‍यूशन भी काफी महत्‍वपूर्ण है। सिन्‍हा ने कहा, 'मीडिया बहुत ही महत्‍वपूर्ण प्रॉपर्टी है, इसके द्वारा आप यूजर्स को एकजुट कर सकते हैं। यह फ्री प्रॉपर्टी है, लोग आपके द्वारा परोसे गए कंटेंट को पढ़ते हैं। एक बार यूजर्स के आपके साथ जुड़ने पर यह आपके ऊपर निर्भर करता है कि आप उन्‍हें क्‍या कंटेंट परोसना चाहते हैं।'

'टाइम्‍स इंटरनेट' पर हर महीने 232 मिलियन से ज्‍यादा यूनिक विजिटर्स होते हैं। कंपनी के अनुसार, इसके 10.4 बिलियन पेज व्‍यूज हैं और बेव अथवा मोबाइल पर 10.0 बिलियन मिनट्स यूजर्स इस पर बिताते हैं।

इन यूजर्स को अपने साथ बांधे रखने के लिए अपनाई जाने वाले स्‍ट्रेटजी के बारे में सिन्‍हा ने बताया, 'टाइम्‍स ऑफ इंडिया के पास हर महीने 110 मिलियन से ज्‍यादा एक्टिव विजिटर्स हैं। इससे यह बात स्‍प्‍ष्‍ट होती है कि एक ही तरह के विजिटर्स को सभी प्रकार की सेवाएं दे जा सकती हैं।'

सिन्‍हा ने यह भी बताया, 'यदि आप टाइम्‍स ऑफ इंडिया, इकनॉमिक टाइम्‍स, नवभारत टाइम्‍स आदि की बात करें तो हमारे पास न्‍यूज प्रॉपर्टीज बहुत ज्‍यादा है और इन्‍होंने मार्केट के बहुत बड़े हिस्‍से पर अपना कब्‍जा जमा रखा है। स्‍पोर्ट्स में हमारे पास 'cricbuzz' और 'Willow' हैं। मोबाइल फोन पर 'cricbuzz' ने मार्केट के 85-90 प्रतिशत शेयर पर अपना कब्‍जा जमाया हुआ है। वहीं म्‍यूजिक के क्षेत्र में हमारे पास 'gaana' है, जिसके हर महीने 65 मिलियन एक्टिव यूजर्स हैं। इसके अलावा विडियो में भी हमारे पास प्रॉपर्टी है, जिसका हमने अधिग्रहण किया है और हमारे पास इसके रोजाना 65 मिलियन एक्टिव यूजर्स हैं।'

ईटी प्राइम (ET Prime) - पूरी तरह सबस्क्रिप्‍शन आधारित प्‍लेटफॉर्म की जरूरत के बारे में पूछे जाने पर सिन्‍हा ने बताया कि यह उन लोगों के लिए है जो उतनी जानकारी से संतुष्‍ट नहीं होते हैं और विभिन्‍न स्‍तर पर ज्‍यादा विवरण की उम्‍मीद रखते हैं। उन्‍होंने कहा, 'सभी यूजर्स एकसमान नहीं होते हैं। ईटी प्राइम की जरूरत उन लोगों के लिए हो रही थी जो आर्टिकल के बारे में बहुत ज्‍यादा विवरण और गहराई से विश्‍लेषण चाहते हैं। इसके लिए बहुत ज्‍यादा रिसर्च की जाती है। एक पत्रकार संभवत: महीने में एक आर्टिकल लिखता है क्‍योंकि इसमें बहुत ही ज्‍यादा रिसर्च करने की जरूरत होती है। ऐसे ऑडियंस कम ही होते हैं, जो इस तरह की इनफॉर्मेशन मांगते हैं और इसके लिए भुगतान भी करना चाहते हैं।'

उन्‍होंने कहा, 'इसके लिए सभी लोग भुगतान नहीं करेंगे लेकिन इसका ऑडियंस वर्ग भी है। हम तो सिर्फ उन लोगों को च्‍वॉइस दे रहे हैं जो आर्टिकल के बारे में और ज्‍यादा जानना चाहते हैं अथवा किसी खास टॉपिक पर किसी जाने-माने पत्रकार द्वारा रिसर्च कर लिखा गया आर्टिकल पढ़ना चाहते हैं।'

कंटेंट की भूमिका (The Content Trap) - सिन्‍हा ने कहा, 'मेरा मानना है कि टेक्‍नोलॉजी ओर कंटेंट लगातार चलते रहेंगे। यह ग्राफ हमेशा ऊपर की ओर चढ़ेगा। हम सब कंटेंट तैयार करने वाले हैं। मैं यदि सोशल मीडिया पर लिख रहा हूं तो भी मैं प्रड्यूसर हूं और इसके लिए मुझे टाइम्‍स ऑफ इंडिया की जरूरत नहीं है। आज की तारीख में दुनिया में सभी लोग कंटेंट निर्माता हैं। चाहे ऑडियो हो, विडियो हो अथवा टेक्‍स्‍ट, यह व्‍यापक रूप से हो रहा है।'

आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (Artificial Intelligence) - सिन्‍हा का कहना है, 'चाहे कंटेंट तैयार करने की बात हो अथवा यूजर के लिए कंटेंट के निजीकरण की बात हो, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस दोनों पर महत्‍वपूर्ण प्रभाव डालेगी।'

उन्‍होंने कहा, 'मशीन के बारे में जानकारी होने से आप इन बातों को आसानी से सीख सकेंगे। टाइम्‍स ऑफ इंडिया एक दिन में पांच हजार आर्टिकल तैयार करता है। अधिकतर लोग तो सिर्फ होमपेज ही पढ़ते हैं। लेकिन यदि आप इसे इस्‍तेमाल कर पर्सन‍लाइज कर सकें तो आप सभी लोगों के लिए अलग होमपेज रख सकते हैं अथवा उसे बदल सकते हैं। ऐसे में सभी लोगों को अपना पर्सनलाइज होमपेज दिखाई देगा।'

उन्‍होंने कहा, 'Newspoint' के साथ हम ऐसा ही कर रहे हैं। इसमें पर्सनलाइज्‍ड फीचर है। ऐसे में यदि आप चेन्‍नई में पढ़ रहे हैं तो आपको उस जगह से अलग हेडलाइन दिखाई देगी, जहां से आपने लॉगइन किया है।

रेवेन्‍यू (Revenue)- रेवेन्‍यू के बारे में सिन्‍हा ने कहा, 'हालांकि हमारी ग्रोथ हमेशा से 40 प्रतिशत से अधिक रही है लेकिन हम इससे भी आगे बढ़ना चाहते हैं। मेरे बिजनेस में एडवर्टाइजमेंट सिर्फ 47 प्रतिशत है। एडवर्टाइजमेंट, क्‍लासिफाइड्स, ट्रांजैक्‍शंस और सबस्क्रिप्‍शंस ये चार मेरे रेवेन्‍यू हैं।'

उन्‍होंने कहा, 'कोई भी डिजिटल बिजनेस इस बात पर निर्भर होता है कि उसकी कस्‍टमर लाइफटाइम वैल्‍यू (CLV) उसकी कस्‍टमर एक्स्टिवन कॉस्‍ट (CAC) से ज्‍यादा हो। यदि इसके आपके पास एक 'CAC' और पांच 'CLV' है तो इसका मतलब है कि आप पहले से ही काफी अच्‍छी स्थिति में हैं।'

इसके अलावा सिन्‍हा ने यह भी बताया कि किस तरह टाइम्‍स इंटरनेट सिर्फ कुछ खर्च करके लोगों को न सिर्फ अपने साथ बल्कि अपनी अन्‍य प्रॉपर्टी से भी जोड़ता है। यूजर्स को एंटरटेन करने और अपने साथ जोड़े रखने के बारे में सिन्‍हा ने कहा, 'जब भी भारत और पाकिस्‍तान के बीच मैच होता है, तो उस समय ऑडियंस को अपनी ओर खींचना हमारे लिए काफी आसान होता है। एक बार जब कोई हमारी 'cricbuzz' का ऑडियंस बन जाता है तो हम उस यूजर को उसकी मनपसंद पांच अन्‍य सर्विस का इस्‍तेमाल करने की छूट भी देते हैं।'

 

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