वरिष्ठ पत्रकार डॉ. वैदिक ने समझाया केजरीवाल की माफी का अर्थ वरिष्ठ पत्रकार डॉ. वैदिक ने समझाया केजरीवाल की माफी का अर्थ

जानें, क्यों वरिष्ठ पत्रकार डॉ. वैदिक ने दिल्ली के मुख्यमंत्री को दी बधाई...

Friday, 02 September, 2016

डॉ. वेद प्रताप वैदिक

वरिष्ठ पत्रकार ।।

अरविंद, तुम्हें बधाई!

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को मैं बधाई देता हूं, क्योंकि उन्होंने अपने एक मंत्री संदीपकुमार को तत्काल विदा कर दिया है। उन्होंने और उनके सहयोगी उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने संदीप का एक अश्लील टेप रात आठ बजे देखा और साढ़े आठ बजे उसे बर्खास्त कर दिया।

आप जानते हैं कि संदीप किस विभाग का मंत्री था? महिला और बाल विकास विभाग का! उसके टेप में वह दो महिलाओं के साथ घोर आपत्तिजनक अवस्था में था। केजरीवाल और सिसोदिया यदि उसे बचाना चाहते तो उस टेप को ही नकली कह देते या उसे टेप बनाने वालों की साजिश कह देते। लेकिन अरविंद और मनीष ने हिन्दुस्तान के सभी नेताओं के लिए एक अनुकरणीय आदर्श उपस्थित किया है। उन्होंने इस बात की जरा भी परवाह नहीं की कि पिछले साल उनके अन्य दो मंत्रियों को भी उन्होंने भ्रष्टाचार का आरोप लगते ही बर्खास्त कर दिया था।

कुल छह मंत्रियों में से तीन का एक के बाद एक खिसक जाना किसी भी सरकार के लिए बड़ा झटका है। आप सोचिए कि मनमोहनसिंह या मोदी के मान लें कि 70 मंत्री हों और उनमें से दो साल में ही 35 को बर्खास्त करना पड़े तो उस सरकार की इज्जत क्या रह जाएगी?

यही बात ‘आप’ के विरोधी दल उठा रहे हैं लेकिन मैं उनसे सहमत नहीं हूं। कांग्रेस और भाजपा पुरानी पार्टियां हैं। इनके नेता पुराने और परखे हुए हैं जबकि आम आदमी पार्टी अभी बिल्कुल नई है। इसमें हजारों साधारण सदस्यों की बात जाने दीजिए, इसके बड़े नेता लोग-भी एक-दूसरे को अच्छी तरह नहीं जानते। इसीलिए इस तरह के मामले सामने आ रहे हैं। अरविंद और मनीष की हिम्मत है कि ये दोनों ऐसी घटनाओं से घबराने की बजाय साहसिक कदम उठा रहे हैं।

इन कदमों से आम आदमी पार्टी की छवि आम आदमियों की नजर में उंची उठ रही है। विरोधी दल ज्यादा चिल्ल-पों इसीलिए मचा रहे हैं। वे ऐसे बयान दे रहे हैं, जैसे कि वे दूध के धुले हुए हैं। वे भूल जाते हैं कि देश उनके प्रधानमंत्रियों और पार्टी-अध्यक्षों को रिश्वतें डकारते हुए पकड़ चुका है। वह उन्हें इसकी सजा भी दे चुका है। क्या ही अच्छा हो कि सभी दल आम लोगों की तरह अरविंद केजरीवाल के इस साहसिक फैसले का स्वागत करें।

(ये लेखक के अपने निजी विचार हैं)



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