संतोष भारतीय का विश्लेषण: कुछ यूं समझिए 'गुजरात मॉडल'

संतोष भारतीय का विश्लेषण: कुछ यूं समझिए 'गुजरात मॉडल'

Wednesday, 04 October, 2017

संतोष भारतीय

प्रधान संपादकचौथी दुनिया ।।

गुजरात चुनाव के अंतर्विरोध और महत्वपूर्ण फैक्टर

गुजरात चुनाव के कई पेंच हैं और गुजरात चुनाव बिल्कुल सिर के ऊपर है। पहले हम आपको बताते हैं कि भारतीय जनता पार्टी हर तरह से गुजरात का चुनाव जीतना चाहती है। सवाल ये है कि वो यह चुनाव मुख्यमंत्री विजय रूपानी के नाम पर जीतेगी या प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम पर जीतेगी। अब तक तो ये दिखाई दिया कि जब तक नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब तक सिर्फ और सिर्फ उनका नाम आता था। इस चुनाव में क्या होगा? मुझे लगता है कि इस चुनाव में भी प्रधानमंत्री के नाम का ही इस्तेमाल होगा। अभी जब जापान के प्रधानमंत्री आए थे, तब उनके स्वागत में अहमदाबाद में सड़कों के किनारे झंडे लगे थे। उसमें एक बड़ी मजेदार चीज देखने को मिली, भारत का राष्ट्रीय झंडा नीचे था और भारतीय जनता पार्टी का झंडा ऊंचा था। होना तो ये चाहिए था कि भारत का राष्ट्रीय झंडा ऊंचा होता, पर शायद जान-बूझकर भारतीय जनता पार्टी के आयोजकों ने भारत का झंडा नीचे रखा और भारतीय जनता पार्टी का झंडा ऊंचा रखा। इसका मतलब है कि इस प्रोजेक्ट का इस्तेमाल भी गुजरात चुनाव के लिए हो सकता है या हो रहा है। अगर भारत का झंडा ऊपर होता, तो हम ये बात नहीं कहते।

गुजरात में भारतीय जनता पार्टी ने धीरे-धीरे सभी विपक्षी दलों को अकेला कर दिया है और उसका साथ कांग्रेस ने दिया है। कांग्रेस ने अभी तक गुजरात चुनाव के लिए अपना नेता घोषित नहीं किया है। इसी वजह से शंकर सिंह वाघेला, हालांकि वो भाजपा से आए हैं और उनका संघ से रिश्ता रहा है, लेकिन जब वो कांग्रेस में आए तो वो सबसे लोकप्रिय लीडर थे। उनको लीडर नहीं घोषित कर और उन्हें एक तरह से अपमानित कर कांग्रेस से बाहर जाने के लिए विवश किया गया। कांग्रेस का आंतरिक द्वन्द्व ये बताता है कि कांग्रेस बिना किसी को लीडर घोषित किए चुनाव लड़ेगी। वही पुराना तरीका, राहुल गांधी को सामने लाकर। इससे कांग्रेस को कितना फायदा मिलेगा, हम नहीं जानते।

कांग्रेस की सांगठनिक स्थिति बहुत खराब है। अगर जनता ही कांग्रेस को वोट दे दे, तो अलग बात है। होना ये चाहिए था कि कांग्रेस गुजरात के उन सभी दलों से, जो भाजपा के साथ नहीं हैं, उनके साथ बात करती, उनको समाहित करती। कम या ज्यादा सीटों के ऊपर समझौता करती। बिहार की तरह गुजरात में भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ एक सशक्त विपक्ष का उम्मीदवार खड़ा करती, लेकिन कांग्रेस ने अब तक ऐसा नहीं किया है। गुजरात के भूतपूर्व मुख्यमंत्री सुरेश मेहता सहित तमाम लोग कांग्रेस से लगातार अनुरोध कर रहे थे कि वो सब को बुलाए और उनका नेतृत्व करे, लेकिन उनकी बातें कांग्रेस ने नहीं मानीं। दरअसल, कांग्रेस में भी एक अंतर्विरोध है।

गुजरात कांग्रेस के सर्वशक्तिमान नेता अहमद पटेल हैं। अहमद पटेल पर ये आरोप है कि वो गुजरात में कांग्रेस को खड़ा ही नहीं होने देना चाहते। अहमद पटेल इस आरोप को झूठा भी साबित नहीं कर रहे हैं। गुजरात में अहमद पटेल के बाद के जो नेता हैं, जिनमें शक्ति सिंह गोहिल हों, भरत सिंह सोलंकी हों, जो भी हों, ये सभी बुनियादी तौर पर व्यापारी हैं। ये सड़क या अन्य चीजों के ठेके लेते हैं। उनका रिश्ता भारतीय जनता पार्टी की सरकार से है, क्योंकि उन्हीं से पैसा कमाते हैं, ठेका लेते हैं, इसलिए उनके ऊपर लोगों का भरोसा नहीं है। लोगों का भरोसा सिर्फ शंकर सिंह वाघेला पर था। शंकर सिंह वाघेला कांग्रेस से निकल चुके हैं। शंकर सिंह वाघेला इस चुनाव में एक महत्वपूर्ण बिन्दु बन गए हैं। उनके समर्थकों ने जनविकल्प पार्टी बनाई है। वे उसमें शामिल हो गए हैं। उन्होंने कहा है कि वे चुनाव नहीं लड़ेंगे, लेकिन वे कोशिश करेंगे कि कांग्रेस के खिलाफ एक उम्मीदवार आए, पर आएगा कैसे? अगर उनकी बात कांग्रेस मानती तो उन्हें कांग्रेस से निकलना ही क्यों पड़ता? फिर भी वो कोशिश कर रहे हैं कि कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के अलावा जितने दल हैं, वो एक साथ आ जाएं। शंकर सिंह वाघेला की ये कोशिश कितनी सफल होगी, हम नहीं कह सकते।

इसके अलावा, एक और फैक्टर है। वो फैक्टर है, हार्दिक पटेल। हार्दिक पटेल की वजह से भारतीय जनता पार्टी को जिला पंचायत और अब ग्राम पंचायत के चुनाव में काफी नुकसान उठाना पड़ा। हार्दिक पटेल का समर्थक वर्ग वहां का पाटीदार है, पटेल समुदाय। उसने हार्दिक पटेल को अपना नेता मान रखा है। हार्दिक पटेल की दिक्कत ये है कि उन्होंने पिछले कई महीनों में नीतीश कुमार के साथ खुद को जोड़ा है। उन्होंने नीतीश कुमार को देश के पटेलों का सर्वोच्च नेता बताया, खास कर पिछड़ी जातियों का। नीतीश कुमार अचानक भाजपा के साथ चले गए। भाजपा के साथ हार्दिक पटेल जाना नहीं चाहते हैं। वो भाजपा को हराना चाहते हैं, क्योंकि उनके भाजपा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ बहुत तल्ख अनुभव हैं। अब देखना ये है कि खुद हार्दिक पटेल क्या करते हैं? क्या वो शंकर सिंह वाघेला के साथ जाते हैं?

जिग्नेश एक और बड़ा नाम है, जो दलितों के नेता हैं। देखना है कि जिग्नेश और हार्दिक, शंकर सिंह वाघेला के साथ रहते हैं या कांग्रेस के साथ जाते हैं, लेकिन जिसके साथ जाएंगे, उस पक्ष को फायदा होगा। अब भी गुजरात में इन्हें न मिलने देने के लिए एक तरफ भाजपा, दूसरी तरफ कांग्रेस जी-जान लगाए हुए है। हार्दिक पटेल के पिता को भारतीय जनता पार्टी ने अपनी तरफ तोड़ लिया है। हार्दिक पटेल को ये कहना पड़ा कि अगर मेरे पिता भी भारतीय जनता पार्टी के सिंबल से चुनाव लड़ते हैं, तो आप उन्हें वोट न दें। लेकिन इन बयानों से कुछ होता नहीं है, क्योंकि पिता, पिता ही होता है। हर एक के सामने धर्मसंकट है। भाजपा के सामने कोई धर्मसंकट नहीं है। उसके सामने बस एक ही संकट है। विजय रूपानी, जिनको गुजरात में संस्थाओं से पैसा लेने के लिए जाना जाता था, वो मुख्यमंत्री बनने से पहले राजकोट के मेयर थे। जब वो संसद गए तो उन्होंने राजकोट के कॉर्पोरेशन और पार्टी से लगातार पैसा लिया, ये कह कर कि इसे ऊपर तक भेजना है। अब वो पैसा पार्टी दफ्तर में गया या विजय रूपानी के पास गया, कोई नहीं जानता। गुजरात में इसे लेकर बहुत संशय है।

गुजरात में समस्याएं हैं। हम जिस गुजरात मॉडल को जानते हैं, वो वहां किसी को दिखाई नहीं देता। लेकिन गुजरात में वाटर मैनेजमेंट का काम बहुत अच्छा हुआ है। अब गुजरात की जनता भारतीय जनता पार्टी को चुनाव जिताती है, कांग्रेस को समर्थन देती है या शंकर सिंह वाघेला को दोबारा ताकत देकर किसी गठजोड़ के साथ सरकार बनाने के लिए समर्थन देती है, अभी नहीं कहा जा सकता है। लेकिन, अंत में इस चुनाव में भी सबसे बड़ा फैक्टर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ही होने वाले हैं। इसमें कोई दो राय नहीं है, इसीलिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बार-बार गुजरात जा रहे हैं। इसीलिए गुजरात में ऐसे किसी भी उद्घाटन को वो छोड़ना नहीं चाहते, जिसका रिश्ता चुनाव से हो या जिसका असर जनता पर पड़ता हो। इसीलिए वो सरदार पटेल की सबसे ऊंची मूर्ति को भी देखने के लिए गए। हालांकि, ये अंतर्विरोध ही है कि सरदार पटेल की मूर्ति चीन में बन रही है और भारतीय जनता पार्टी लोगों से कहती है कि चीन की राखी मत खरीदो, मत बांधो। लेकिन चीन में बनी मूर्ति को रोज नमन करने के लिए भाजपा तैयार है। ये अंतर्विरोध, मजे के अंतर्विरोध हैं। अगर, आपको लगे कि इनके ऊपर कोई चुटकी लेनी है, तो जरूर ले सकते हैं।

(साभार: चौथी दुनिया)


 

समाचार4मीडिया.कॉम देश के प्रतिष्ठित और नं.1 मीडियापोर्टल exchange4media.com की हिंदी वेबसाइट है। समाचार4मीडिया में हम अपकी राय और सुझावों की कद्र करते हैं। आप अपनी राय, सुझाव और ख़बरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। आप हमें हमारे फेसबुक पेज पर भी फॉलो कर सकते हैं।



Copyright © 2017 samachar4media.com