अब पत्रकारिता का भाषाई द्वंद खत्म हो चुका है: अंशुमान तिवारी, संपादक, इंडिया टुडे (हिंदी)

Wednesday, 30 May, 2018

अंशुमान तिवारी

एडिटर, इंडिया टुडे (हिंदी)।।

अगर आप हिंदी मीडिया के इम्पैक्ट की बात करते हैं तो वे बहुत गहरा, ज्यादा और बड़ा है। अहम ये है कि आप उसे किधरे से और कैसे देखते हैं। भले ही आपको दिल्ली या मुंबई से वो प्रभाव न दिखाई पड़े, पर लखनऊ, भोपाल, पटना, जमशेदपुर जैसे शहरों से आपको अंदाजा हो सकता है कि हिंदी की खबरें भी कितना बड़ा प्रभाव डालती है।

वैसे मेरा मानना है कि हिंदी-अंग्रेजी पत्रकारिता को बीच का बंटवारा अब पुराना हो चुका है, इस दौर में पत्रकारिता सिर्फ पत्रकारिता है। चाहे तमिल भी छपी खबर हो या चाइनीज में, अगर कंटेंट मे दम है तो उसका प्रभाव पड़ता है। क्वॉलिटी कंटेंट ही इम्पैक्ट डालता है। साहसिक पत्रकारिता समय की जरूरत है।

टेक्नॉलजी के इस दौर में अब लैंग्वेज बैरियर जैसा कुछ नही रहा है। ऐसी तकनीक आ गई है जो भाषाओं का तुरंत अनुवाद कर देती है। आने वाले समय में हम लाइव ट्रांसलेशन करने वाले टूल्स भी देखेंगे। इसलिए मैं स्पष्ट तौर पर कहता है कि अब पत्रकारिता की भाषा पर बहस की जरूरत नहीं है, जरूरत है तो बेहतर कंटेंट की पत्रकारिता की।  

(साल 2017 में अभिषेक मेहरोत्रा से बातचीत पर आधारित)


 

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