पुण्यतिथि: खुशवंत सिंह पत्रकारिता की किताब हैं, जो खोलेगा, खजाना पाएगा

Monday, 20 March, 2017

संतोष भारतीय

प्रधान संपादक, चौथी दुनिया ।।

खुशवंत सिंह जी भारतीय पत्रकारिता के शिखर पुरुष थे।  वह उन चंद लोगों में थे जिनका अंग्रेजी में लिखा जितना ज्यादा पढ़ा जाता था, उसका हिंदी अनुवाद भी उतने ही चाव से पढ़ा जाता था।

खुशवंत सिंह ऐसे संपादकों में जाने गए जिन्होंने पत्रकार बनाए, जिन्होंने पत्रकारों को गढ़ा। वे उन पीढ़ी के थे, जिन्होंने भारत विभाजन को अपनी आंखों से देखा, उसकी पीड़ा को उन्होंने सचित्र और सही तरीके से वर्णित किया। वे ऐसे पत्रकार थे जो सक्रिय पत्रकारिता में भरोसा करते थे।

मुझे याद है कि जब मैंने फूलन और विक्रम मल्लाह पर रिपोर्ट लिखी थी, तब खुशवंत सिंह ने मुझे फोन कर फूलन का गांव कहां है? यह पूछा था। मैंने उन्हें रास्ता बताया तो वे स्वयं फूलन के घर गए, वहां जाकर उन्होंने तत्कालीन सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक परिस्थितियों का विश्लेषण किया।

खुशवंत सिंह इतिहास के ऐसे शिखर पुरुष रहे जिन्होंने हिन्दुस्तान के बड़े-बड़े राजनेताओं के ड्राइंग रूम को सुशोभित किया है। उनकी जिंदगी में पुरुष या महिला सौंदर्य के कारण कभी नहीं आए बल्कि अपनी बुद्धिमता के कारण आए।

दरअसल खुशवंत सिंह भारतीय पत्रकारिता को समझने की एक जिंदा पुस्तक थे, अब वो पुस्तक बंद हो गई है लेकिन जब भी कोई उस पुस्तक को खोलता है और पढ़ता है तो उसे भारतीय पत्रकारिता और विशेषकर अंग्रेजी पत्रकारिता के गौरवपूर्ण संस्मरणों का खजाना देखने को मिलता है।

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