एंकर नरेश सोनी बोले- जाधव अगर जासूस है, तो भारत में पाक एजेंडे को आगे बढ़ाने वाले क्या हैं?

Wednesday, 12 April, 2017

नरेश सोनी

असिसटेंट एग्जिक्यूटिव एडिटर

न्यूज वर्ल्ड इंडिया ।।

क्या घरेलू संबंधों के ज़रिए देश के प्रति वफादारी को ख़रीदा जा सकता है? ये सवाल मन में आया है लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) प्रेमनाथ हून के हालिया बयान की वजह से। प्रेमनाथ हून जिन्होंने 1962 से लेकर अब तक की सभी लड़ाइयों में अपना शौर्य दिखाया, 1984 में सियाचिन पर कब्ज़ा जमाना हो या 1999 में करगिल में दुश्मनों के दांत खट्टे करने हो, हर बार श्री हून ने साबित किया कि वो इस देश के सच्चे सपूत है, हमारे हीरो हैं।

लेकिन आज श्री हून ऐसी बातें कर रहे हैं, कि इन्हें अपना हीरो मानने में शर्म सी आती है। पूर्व नौ-सैनिक कुलभूषण जाधव को भारतीय जासूस बताकर जिस तरह पाकिस्तान ने फांसी की सज़ा सुनाई, पूरा देश गुस्से में उबल रहा था,पाकिस्तान के इस प्रपंच पर उसे कोस रहा था, इधर भारत सरकार लगातार कहती रही कि जाधव रॉ का जासूस नहीं है इसे पाकिस्तान ने साज़िशन फंसाया है। वहीं दूसरी ओर हून पाकिस्तान के एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं, जाधव को जासूस मानते हुए रॉ की ट्रेनिंग में कमी की बात कह रहे हैं, जाधव को नौसिखिया जासूस बता रहे हैं।

ऐसी अनर्गल बात कहते वक्त उनकी देशभक्ति कहां थी, ये सवाल तो बाद में पूछेंगे लेकिन काश सेना में बिताए गए अपने लंबे अनुभव का एक छोटा सा हिस्सा भी उनके ज़हन में बाकी रहा होता तो वो ये सवाल नहीं उठाते। उन्हें ये ध्यान क्यों नहीं रहा कि जिस कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान ने भारतीय जासूस बताया है, उसके पास से भारतीय पासपोर्ट मिला है और क्या कभी कोई देश अपने पासपोर्ट पर जासूस भेजता है? क्या उन्हें पता नहीं कि कोई भी देश जब किसी देश में जासूस भेजता है तो या तो वो फर्ज़ी पासपोर्ट पर जाता है या राजनयिक पासपोर्ट पर दूतावासों में नियुक्त किया जाता है। जाधव के मामले में ऐसा कुछ भी नहीं था, बावजूद उसके पाकिस्तान ने उसे जासूस बताते हुए बिना किसी सुनवाई के फांसी की सज़ा सुना दी।

पाकिस्तान के पास जाधव के खिलाफ जासूसी का कोई सबूत नहीं, सिर्फ विडियो में दर्ज उसका कबूलनामा है, वहीं विडियो जिसमें 102 बार कांटछांट की गई है, क्या ऐसे विडियो को कभी किसी भी अदालत में साक्ष्य माना जा सकता है? तो बिना साक्ष्य के दी गई मौत की इस सज़ा पर हमारे पूर्व-सैनिक श्री हून का खून क्यों नहीं खौला? क्यों उन्हें जाधव के परिवार का दर्द महसूस नहीं हुआ?

श्री हून के साथ मैंने टीवी पर कई चर्चाओं में हिस्सा लिया है, जब भी बहस भारत-पाकिस्तान पर केंद्रित होती थी, तो वो बड़े आक्रामक तरीके से पाकिस्तान पर हमला करते थे, उन डिबेट शो में ऐसा लगता था मानो श्री हून सीमा पर खड़े होकर शब्दों की ताबड़तोड़ गोलियां चला रहे हैं। लेकिन पिछले कुछ वक्त से इनके रुख को बदलते हुए महसूस किया है।

श्री हून ने ये बयान देते वक्त क्यों नहीं सोचा वो सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी रह चुके हैं, और इस तरह की बातों से पाकिस्तान की घटिया दलीलों को बल मिलता है? जब भारत सरकार ये साबित करने की कोशिश कर रही होगी कि जाधव जासूस नहीं है, उस वक्त क्या पाकिस्तान अपने तरकश से आपके बयान का तीर निकाल कर हमारी ओर नहीं चलाएगा?

कुलभूषण जाधव के मामले में पाकिस्तान की घटिया दलीलों को पाकिस्तान के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज़ ने भी खोखला माना, उन्होंने पिछले साल पाकिस्तानी सीनेट को बताया था कि जाधव के खिलाफ पुख्ता सबूत नहीं है, ये मामला इतना कच्चा है कि इस पर डोज़ियर तक तैयार नहीं हो सकता। पाकिस्तानी दावे में जहां एक ओर सरताज अजीज़ के सवाल छेद कर रहे थे, वहीं श्री हून के एक बयान ने उस छेद को ढकने का काम किया है। ज़ाहिर सी बात है कि सरताज अजीज़ के सवालों से सिर्फ पाकिस्तान के दावों की हवा नहीं निकल रही थी, बल्कि नवाज़ सरकार की साख पर भी बट्टा बैठ रहा था, तो ऐसे में क्या नवाज़ के रिश्तेदार श्री हून उनके लिए संकटमोचक बन कर आए हैं?

जी हां, श्री हून नवाज़ शरीफ के रिश्तेदार हैं। श्री हून के पोते की शादी पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ की भतीजी से हुई है, तो अब सवाल वही है जहां से बात शुरू हुई, क्या नए रिश्तों ने हमारे हीरो की देशभक्ति को बदल दिया है?

(ये लेखक के निजी विचार हैं।)

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