वरिष्ठ पत्रकार निर्मलेंदु का सवाल- लेडी सिंघम का तबादला क्यों?

वरिष्ठ पत्रकार निर्मलेंदु का सवाल- लेडी सिंघम का तबादला क्यों?

Monday, 03 July, 2017

निर्मलेंदु

कार्यकारी संपादक,

दैनिक राष्ट्रीय उजाला

लेडी सिंघम का तबादला क्यों?

यूपी की लेडी सिंघमको मिला ट्रांसफर लेटर। इन दिनों लेडी सिंघम यह गाना गाती फिर रही हैं कि हमसे का भूल हुई, हमका सजा ऐसन मिली। ए.एस. ठाकुर नाम के अकाउंट पर उन्होंने लिखा है कि जहां भी जाएगा, रोशनी लुटाएगा, किसी चराग का अपना मकां नहीं होता। दरअसल, उन्हें सही काम करने का फल मिला। एक मासूम सा सवाल। ईमानदारी से काम करने का फल यदि यह होता है, तो लोग बेईमानों की जय जयकार करना शुरू कर देंगे। कसूर क्या था इस महिला पुलिस ऑफिसर का। बस इतना ही कि बीजेपी कार्यकर्ता को उन्होंने फटकारा था।

दरअसल, हुआ यह था कि इसी साल 23 जून को स्याना में चेकिंग के दौरान जब जिला पंचायत सदस्या प्रवेश देवी के पति प्रमोद लोधी को पुलिस ने बिना हेलमेट और बिना कागजात के बाइक चलाते पकड़ा और चालान किया, तो वह सीओ स्याना श्रेष्ठा सिंह से ही भिड़ गए। प्रमोद लोधी ने सीओ से भी अभद्रता की, जिसके बाद उनके खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने के मामले में एफआईआर दर्ज कराकर गिरफ्तार कर लिया गया।

सच तो यही है कि वहां खड़े पब्लिक का कहना है कि इसमें बीजेपी के उस तथाकथित लीडर की गलती थी। वह रौब झाड़ रहे थे कि वे बीजेपी के लीडर हैं। अब बता दें कि पिछले महीने उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में ट्रैफिक नियम तोड़ने पर बीजेपी नेता का चालान करने वाली महिला पुलिस अधिकारी का तबादला कर दिया गया है। तबादले के बाद उस पुलिस ऑफिसर ने फेसबुक पोस्ट किया है, जिसमें उन्होंने एक शेर के जरिए अपनी बात रखी है।

ए.एस. ठाकुर नाम के अकाउंट पर उन्होंने लिखा है कि जहां भी जाएगा, रोशनी लुटाएगा, किसी चराग का अपना मकां नहीं होता। उन्होंने लिखा है कि मेरा ट्रांसफर बहराइच हो गया है। यह नेपाल की सीमा से सटा हुआ इलाका है।

गौरतलब है कि बुलंदशहर के स्याना में सीओ के पद पर तैनात श्रेष्ठा सिंह को अब बहराइच भेज दिया गया है। बीजेपी नेता की धमकी के बाद भी उन पर कानून का डंडा चलाने वाली महिला पुलिस ऑफिसर का विडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, लोग इन्हें लेडी सिंघमजैसी उपाधि से संबोधित कर रहे थे।

अब सवाल यह उठता है कि इस पुलिस ऑफिसर को सजा मिलनी चाहिए, या फिर पुरस्कार। जानने वाले और दर्शक बने गवाहों का तो यही मानना है कि पुलिस ऑफिसर का कोई दोष नहीं। तो ऐसे में सवाल यह उठता है कि दोष किसका है?

ईश्वरचंद्र विद्यासागर ने कहा था कि अगर हम हल का हिस्सा नहीं हैं, तो हम समस्या हैं। कानून के रखवाले ने कानून के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अपना काम किया। हल निकाला और चालान काटा। अंजाम- तबादला। इस तबादले से यदि यह कहें कि कोई भी पुलिसवाला दोबारा यह हिमाकत नहीं करेगा कि किसी बीजेपी के लीडर को गलत करने पर कोई सजा दे। इस घटना के बाद कोई पुलिसवाला साहस नहीं जुटा पाएगा। इस पुलिस वाले ने जो किया है, उसे हम देशभक्ति कहें या फिर कुछ और या फिर यह कहें कि एक ईमानदार पुलिस ऑफिसर, जिसने अपना कर्तव्य निडर होकर निभाया।

अगर हम उसे देशभक्त कहेंगे, तो हम जानते हैं कि देशभक्तों को अक्सर लोग पागल कहते हैं। तो हो सकता है कि वह पागल हो। हालांकि हम सब जानते ही नहीं, बल्कि मानते भी है कि कष्ट और विपत्ति मनुष्य को शिक्षा देने वाले श्रेष्ठ गुण हैं। जो साहस के साथ उनका सामना करते हैं, वे विजयी होते हैं। इस ऑफिसर ने साहस के साथ विरोध किया, यह जानते हुए कि वे बीजेपी के कद्दावर नेता हैं, तो इसे हम यही कहेंगे कि वह साहसी और बिना सोचे समझे गलत को गलत और सही को सही कहने वाली पुलिस ऑफिसर हैं, यानी एक पागल पुलिस ऑफिसर।

दरअसल, हमे ऐसी शिक्षा चाहिए, जिससे चरित्र का निर्माण हो, मन की शक्ति बढ़े, बुद्धि का विकास हो और मनुष्य अपने पैर पर खड़ा हो सके। अपने पद का गुरूर इंसान को नहीं करना चाहिए, क्योंकि पद तो आज है और हो सकता है, कल न हो, लेकिन मान मर्यादा और चरित्र की इमेज जीवन भर बनी रहती है। चरित्र निर्माण करने में सालों लग जाते हैं, गिराने में क्षण भर का समय चाहिए। हमें यह भी याद रखना होगा कि कुएं में उतरने वाली बाल्टी यदि झुकती है, तो वह बाल्टी भर कर बाहर आती है। जीवन का भी यही गणित है, जो झुकता है वह प्राप्त करता है। दादागिरि तो हम मरने के बाद भी करेंगे लोग पैदल चलेंगे और हम कंधों पर। लेकिन सच तो यही है कि गलती का अहसास जो कर लेते हैं, उनकी अपनी इमेज और अच्छी हो जाती है। समाज में वह पद से नहीं जाना जाता, बल्कि नाम से जाना जाता है।

स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि जो सत्य है, उसे साहसपूर्वक निर्भीक होकर लोगों से कहो। उससे किसी को कष्ट होता है या नहीं, इस ओर ध्यान मत दो। दुर्बलता को कभी प्रश्रय मत दो। यही काम उस पुलिस ऑफिसर ने किया। जब उस महिला पुलिस ऑफिसर ने बीजेपी के नेता से कहा कि आपका चालान कटेगा, तो अगर वह विनम्रता से कहते कि मैं आगे से ध्यान रखूंगा, तो शायद बात आज इतनी बड़ी नहीं होती कि ईमानदारी से काम करने वाले का ही तबादला कर दिया जाता। एक कटु सत्य तो यह भी है कि इस तबादले से योगी सरकार की इमेज भी खराब हो गई। योगी सरकार ने पिछले 100 दिनों में जो नाम कमाया, वह इस एक गलत निर्णय से धूमिल हो गया।

हम सभी यह जानते हैं कि विनय अपयश का नाश करता है, पराक्रम अनर्थ को दूर करता है, क्षमा सदा ही क्रोध का नाश करती है और सदाचार कुलक्षण का अंत करता है। इसीलिए गुरु नानक की यह वाणी है- दूब की तरह छोटे बनकर रहो, क्योंकि जब घास-पात जल जाते हैं, तब भी दूब जस की तस बनी रहती है। सत्य को हजार तरीकों से बताया जा सकता है, फिर भी हर एक सत्य ही होगा। दरअसल...

वक़्त सबको मिलता है

जिन्दगी बदलने के लिए

पर जिन्दगी दोबारा नहीं मिलती

वक़्त बदलने के लिए


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