'मोदी-ट्रंप के मिलन से एक सवाल उठता है… '

Wednesday, 28 June, 2017

निर्मलेंदु

कार्यकारी संपादक,

दैनिक राष्ट्रीय उजाला ।।


दो सितारों का मिलन

मोदी-ट्रंप की जुगलबंदी के मायने। दो सितारों का मिलन। वह ऐतिहासिक रात, जब दो स्टारों ने एक दूसरे को देखा और हंसते-हंसते गले लगा लिया। अभूतपूर्व, अतुलनीय और अकाट्य दृश्य। ट्रंप ने कहा कि वह भारत को सैल्यूट करते हैं। जिस तरह से ट्रंप ने कहा कि पाक अपनी धरती से आतंक फैलाना बंद करे, वह तारीफे काबिल है। आतंकवाद के खिलाफ साथ आए भारत अमेरिका। डी कंपनी को भी नहीं बख्शा। जब मिले दो सच्चे मित्र। मोदी ट्रंप की इस मुलाकात में अच्छी केमिस्ट्री देखने को मिली, जो भारत अमेरिका द्विपक्षीय रिश्तों के भविष्य के लिहाज से संभावनाएं जगाती हैं। डिप्लोमैटिक फ्रेमवर्क। अतुलनीय भाव और मुद्राएं। शालीन अंदाज और ट्रंप का वह हंसता हुआ हंसमुंख चेहरा। हंसते-हंसते पाक को फटकार। इससे सख्त संदेश नहीं हो सकता। कोहिनूर का एक गाना याद आ रहा है। दो सितारों का जमीं पर है मिलन सोमवार की रात/सारी दुनिया नजर आई है दुल्हन सोमवार की रात... दो सितारों का मिलन...

हां, यह दो सितारों का ही मिलन था। ऐसा रोमांच, ऐसा बॉन्डिंग और ऐसा शो मैनशिप देखने को मिला कि दिल झूमने लगा और ऐसा लगा कि भारत मुस्कुराने लगा। चारों ओर हरियाली छा गई। अमेरिकी प्रशासन द्वारा जिस तरह के कुछ कदम उठाए गए, वह भारत के लिए गौरव की बात है। हालांकि यह मुलाकात तो एक बहाना है, क्योंकि इसके बहाने आतंकवाद को खत्म करना ही इन दो सितारों का मकसद है।

इसमें कोई दो राय नहीं कि यह रणनीतिक साझेदारी भारत और अमेरिका को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगी। एक तरफ पाक को मिली चेतावनी, तो दूसरी ओर दोनों की बेहतरीन केमिस्ट्री भी देखने को मिली। हां, अब हम सभी यह भी कह सकते हैं कि पाकिस्तान को दोहरा झटका लगा। पाक पर सख्ती, तो अमेरिका के साथ भारत की भक्ति भी दिखी। लेकिन फिर भी एक सवाल यह उठता है कि मोदी और ट्रंप में जो कॉमन विशेषताएं हैं, उससे क्या भारत को आखिरकार लाभ पहुंचेगा? हां, यह भी सच है कि यह अमेरिका यात्रा पहले से कुछ भिन्न जरूर थी। इसे हम भारत की महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में भी देख सकते हैं। यहां हम यह भी कह सकते हैं कि हमारी लीडरशिप के यानी भारत के जो उद्देश्य थे, उन्हें हासिल करने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विफल नहीं रहे। दरअसल, कूटनीतिक संधि के मर्म को वह भलिभांति समझते और जानते हैं। मोदी की अंतर्मुखी दूरदृष्टि से भारत को कितना, कैसे और कब लाभ मिलेगा, यह तो वक्त ही बता सकता है, लेकिन हां, यह तय है कि ट्रंप को जिस कूटनीतिक शालीनता के तहत मोदी ने घेरा है, वह अकाट्य, अतुलनीय और दूरदर्शी है।

सच तो यही है कि यदि दोनों के साझा वक्तव्य पर ध्यान देंगे, तो हम यह आसानी से समझ जाएंगे कि दुनिया के दो प्रमुख लोकतांत्रिक देशों के नेताओं ने वैश्विक चुनौतियों और द्विपक्षीय मुद्दों को लेकर व्यापक सहमति बनाने की कोशिश अपनी अपनी तरफ से भरसक प्रयास की है। गुनहगारों के खिलाफ जिस तरह से दोनों सितारे एकजुट हो गये, वह हिटलर की याद दिलाता है। हिटलर को लोग गलत समझते हैं। दरअसल, हिटलर तानाशाह नहीं थे, गुनहगारों के लिए तानाशाह, तो दोस्तों और अच्छे देशों के लिए एक आम इंसान। इंसानियत के दुश्मन नहीं थे, बल्कि इंसान की करतूतों के दुश्मन थे। दरअसल, ट्रंप का नजरिया पूर्ववर्ती राष्ट्रपतियों से पूरी तरह से अलग है। मोदी का जिस तरह से एक रॉक स्टार की तरह परिचय कराया गया, वह वही कर सकता है, जिसमें जुनून, जज्बात और गलत को गलत और सही को सही कहने का माद्दा है।

 

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