डिजिटल मीडिया का है जमाना, पर इन तथ्यों को जरूरी है जानना...

Thursday, 22 February, 2018

दिनेश पाठक

वरिष्ठ पत्रकार ।।

समाचारों की छोटी वेबसाइट्स के भविष्य को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं और ऐसा होना स्वाभाविक भी है। तेज रफ़्तार से बदलते गूगल, फेसबुक और अन्य सपोर्ट सिस्टम के नियम इन्हें रोज कमजोर बना रहे हैं। मैं यह तो नहीं कहूंगा कि छोटी वेबसाइट्स का कोई भविष्य नहीं है लेकिन इतना पूरे भरोसे से कहूंगा कि सावधानी हटी, दुर्घटना घटी।

बाजार में वही छोटी वेबसाइट्स चलेंगी, जिनके कर्ता-धर्ता बहुत सावधान होंगे। डिजिटल की इस दुनिया में उनकी नजरें चौकस रहेंगी। ऐसा लिखकर मैं किसी को हतोत्साहित नहीं करना चाहता, लेकिन सच का सामना तो इससे जुड़े सभी पक्षों को करना होगा। लेकिन इस सच के बीच जरूरी तथ्य यह भी है कि जो सतर्क नज़रों से चलते रहे, वे धीमी रफ़्तार से ही सही, बाजार में प्रगति करते रहेंगे।

इस माध्यम का अखबार और टेलिविजन की तर्ज पर संचालन नहीं किया जा सकता। लगभग 22 वर्ष तक अखबार में काम करने के बाद जब मैंने इस दुनिया में खुद को उतारा तो लगभग एक वर्ष के अंदर मेरी वेबसाइट अपने पैरों पर खड़ी हो गई और बाद में लड़खड़ाती गई और आज अंतिम सांसें ले रही है। जब यह वेबसाइट मैंने शुरू की तो लगभग पांच लाख रुपए की सैलरी के साथ काम शुरू हुआ। बाद में कम्पनी की आर्थिक स्थिति कमजोर हुई तो तीन लाख रुपए की सैलरी के सहारे काम चलाया। दिन-रात एक कर सीखा, टीम को सिखाया और साल पूरा होने के बाद सर्वोत्तम कमाई लगभग 13 लाख रुपए एक महीने में की। फिर कुप्रबंधन की वजह से यह रकम देखते ही देखते 11, 09, 8, 7, 5 लाख होते हुए और नीचे गई। इस दौरान मैं खुद कुछ और प्रोजेक्ट के साथ आगे बढ़ा। लगभग सभी में यही सूरत बनी। जैसे ही पैसा आना शुरू हुआ, प्रोमोटर्स ने हाथ खींचना शुरू कर दिया और छोटी छोटी वेबसाइट्स को कामधेनु समझने की भूल कर बैठे। किसी भी सूरत में गैर जानकार ये लोग डिजिटल दुनिया में अपने ज्ञान को असल में बढ़ाने को तैयार नहीं हुए।

इन किस्सों को मैं इसलिए गिना रहा हूं जिससे यह समझना आसान हो सके कि किसी भी व्यापार को करने के लिए जरूरी है कि उसे समझ लिया जाए, हमारे बुजुर्गों ने भी यही कहा है। बीते लगभग तीन सालों में मेरे सामने करीब दर्जन भर ऐसे नौजवानों ने वेबसाइट शुरू की जो खुद 10-20 हजार रुपए महीने की नौकरी करते थे। अब यह सभी परेशान हैं।

असल में ज्यादातर लोगों को आय के स्रोतों की जानकारी नहीं है। किसी के जरिए थोड़ी सी जानकारी हुई नहीं कि उन्हें खुद को मास्टर कहने में कहीं से कोई कसर नहीं छोड़ते। लगभग तीन वर्षो में मैं खुद को एक विद्यार्थी से ज्यादा समझ नहीं पाया। कई बार ऐसा हुआ जब सुबह कुछ सीखा, शाम को उसका नया वर्जन आ गया और सुबह का सीखा बेकार साबित हुआ।

अब अगर किसी को भी वेबसाइट शुरू करनी है तो मैं सिर्फ यही कहूंगा कि कंटेंट 100 फ़ीसदी आपका हो। जितना पैसा आप कंटेंट क्रिएट करने में लगाएं, उसे तनिक भी कम बजट कंटेंट को प्रमोट करने के लिए न रखें। ऐसा करने पर कुछ उम्मीद बन जाती है। ऐसा करते हुए डिजिटल इंडस्ट्री में हो रहे बदलाव पर भी नजर हो। ऐसा इसलिए क्योंकि गूगल सर्च में आने के लिए कंटेंट का असली होना जरूरी है। तीन-चार महीना पहले तक फेसबुक जैसा प्लेटफॉर्म आसानी से 30-40 फीसद पाठक दे देता था। अब ऐसा नहीं है। यहां भी केवल और केवल असल कंटेंट को ही प्राथमिकता में रखा जा रहा है। आने वाले समय में ये दोनों ही माध्यम और सख्त होते हुए दिखाई दे रहे हैं।

ऐसे में छोटी वेबसाइट्स के सामने तगड़ी चुनौती है असली कंटेंट की। अभी तक यहां का माल उधर करने की प्रवृत्ति चल रही है। असली कंटेंट के लिए बड़ी टीम की जरूरत होगी, जो बड़े घराने ही कर पाएंगे। रुटीन की खबरों में उलझने वाली कोई भी छोटी वेबसाइट के सामने एक संकट भरोसे का भी है। डिजिटल दुनिया में खबर पढ़ने में रुचि रखने वालों को दर्जनों की संख्या में मौजूद एप मदद कर देते हैं। इन सभी या यूं कहिये कि ज्यादातर एप बड़ी वेबसाइट्स के कंटेंट को ज्यादा प्राथमिकता देते हैं। कारण साफ है कि संसाधनों से युक्त वेबसाइट्स/बड़े मीडिया घराने कम समय में उस प्लेटफॉर्म तक सूचनाएं पहुंचाने में कामयाब रहते हैं। जब तक छोटी वेबसाइट्स कापी पेस्ट करते हुए अपने को अपडेट करती हैं, तब तक बड़े मीडिया घरानों की खबरें वायरल हो चुकी होती हैं। ऐसे में किसी भी सर्च में उनके आने का सवाल ही नहीं उठता।

अब छोटी पूंजी के साथ अगर किसी को वेबसाइट में सर्वाइवल चाहिए तो उसे अलग तरह के कंटेंट पर काम करना होगा। कंटेंट ऐसा हो जो डिजिटल दुनिया में कहीं और न हो। कम कंटेंट तैयार करके भी इसे प्रोमोट करके हम धीरे-धीरे आगे जा सकते हैं। प्रोमोटर्स को यहां उतनी ही चिंता प्रोमोशन की करनी होगी, जितनी वे कमाई की करते हैं। सैलरी की करते हैं। प्रमोशन एक दिन के लिए भी रुकना नहीं चाहिए। इनके रुकने का मतलब यह हुआ कि उल्टी गिनती शुरू।

इसलिए मेरा वेबसाइट शुरू करने वाले किसी भी साथी को यही सुझाव है कि अगर आपके पास धन और धैर्य दोनों है तब इस दिशा में हाथ बढ़ाएं, अन्यथा नहीं। ध्यान यह भी रखना होगा कि देश के सभी बड़े मीडिया घराने डिजिटल में बहुत भारी इन्वेस्टमेंट कर रहे हैं और लगातार निवेश जारी है। उनसे टक्कर लेने की किसी छोटी वेबसाइट को सोचना भी नहीं चाहिए, लेकिन अलग कंटेंट क्रिएट करके, थोड़ा धैर्य रखकर ही इस काम में हाथ डालना उचित होगा।

 

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