डॉ. वैदिक बोले-अपनी अम्मा पर कौन हाथ डालेगा?

डॉ. वैदिक बोले-अपनी अम्मा पर कौन हाथ डालेगा?

Thursday, 09 November, 2017

डॉ. वेद प्रताप वैदिक

वरिष्ठ पत्रकार ।।

अपनी अम्मा पर कौन हाथ डालेगा?

बरमूदा से निकले पेरेडाइज पेपर्स’, अब पनामा पेपर्स से भी ज्यादा धूम मचा रहे हैं। इन पेपरों से पता चलता है कि भारत के कई मुख्यमंत्रियों, मंत्रियों, सांसदों, डॉक्टरों, अभिनेताओं, नौकरशाहों और व्यापारियों ने अपना काला धन वहां छिपा रखा था। उनकी सोहबत वहां मामूली लोगों से नहीं थी।

ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ, रुस के राष्ट्रपति पुतिन और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रिश्तेदारों, कनाडा आदि कई देशों के बड़े नामी-गिरामी लोगों की सोहबत से हमारी ये विभूतियां सुशोभित हैं। इनके नाम ज्यों ही इंडियन एक्सप्रेसने प्रकट किए, हमारी सरकार ने गजब की मुस्तैदी दिखाई। कुछ ही घंटों में पेरेडाइज़पेपर्सकी जांच की घोषणा कर दी। 714 नाम इसमें भारतीयों के हैं। लेकिन मैं कहता हूं कि जिन लोगों या कंपनियों के नाम उजागर हुए हैं, उन्हें बिल्कुल भी चिंता करने की जरुरत नहीं है। इसके कई कारण हैं।

पहला, बदनाम होंगे तो क्या नाम न होगा? इसी भांडाफोड़ के कारण कई अज्ञात कुल-शील कंपनियों और व्यक्तियों के नाम टीवी चैनलों और अखबारों में चमक रहे हैं।

दूसरा, इन खातों का भांडाफोड़ करने वाले पत्रकारों ने खुद ही कहा है कि हर खातेधारी को हम अपराधी नहीं मानते हैं याने कुछ खाते कानूनों का उल्लंघन नहीं भी करते होंगे।

तीसरा, इन खातों की जांच करने वाले कौन हैं? जो जुर्म करने वाले हैं, वही जांच करने वाले हैं। इन खातों में जो काला या सफेद धन छिपाकर रखा जाता है, वह किसके काम आता है? इसी धन से नेताओं की दुकानें चलती हैं, चुनाव लड़े जाते हैं, रिश्वतें खिलाई जाती हैं, गुप्त अपराध करवाए जाते हैं। यह धन हमारी राजनीति की अम्मा है। भला, ये नेता अपनी अम्मा पर हाथ कैसे डालेंगे? कांग्रेसी नेता कह रहे हैं कि भाजपा के जिन नेताओं और उनके रिश्तेदारों के नाम पेरेडाइज पेपर्समें आ रहे हैं, वे इस्तीफा दें। क्या खूब? लेकिन जिन कांग्रेसियों के नाम इसमें हैं, वे क्या करें? क्या वे जहर खा लें? आत्महत्या कर लें। कोई कुछ न करने वाला है और न ही कुछ होने वाला है। सब चोर-चोर मौसेरे भाई हैं।

सर्वज्ञजी की सरकार को साढ़े तीन साल हो गए। वह भ्रष्टाचार-विरोध पर बनी थी। क्या उसने एक भी भ्रष्टाचारी को अभी तक लटकाया? तो अब वह डेढ़ साल में कौन सा बरगद उखाड़ लेगी? साल भर उठक-बैठक लगाई और उसने पनामा पेपर्स में सिर्फ 792 करोड़ का तथाकथित काला धन अंदाजन पकड़ा है जबकि चुनाव अभियान के दौरान दावा यह किया जाता था कि कम से कम चार लाख करोड़ रु. का काला धन विदेशों में जमा है। काला धन तो जहां का तहां है। सफेद धन और सफेद जीवन वाले लोग फिजूल मारे गए।


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