9 साल पहले मोदी की किताब का जो शीर्षक दिया, वो समय के साथ सच साबित हुआ : कुमार पंकज

Saturday, 17 September, 2016

कुमार पंकज 

विशेष संवाददाता, आउटलुक हिंदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुरू से ही दूरदर्शी सोच के रहे हैं। गोधरा कांड के बाद से गुजरात के बदले हालात की रिपोर्टिंग का अवसर जब मुझे मिला उस समय पूरे नरेंद्र मोदी modi-bookमुख्यमंत्री के तौर पर अलग छाप छोड़ रहे थे। बात 2007 के विधानसभा चुनाव की है। जब मुझे गुजरात में चुनाव की रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। उस समय गुजरात के कई इलाकों में नरेंद्र मोदी के विकास कार्य की चर्चा सुनने को मिल रही थी। गुजरात में कांग्रेस, भाजपा के कार्यकर्ताओं से मुलाकात और आम जनता के बीच जब नरेंद्र मोदी की चर्चा होती थी तो लोगों का यही कहना था कि दूरदर्शी सोच के हैं गुजरात के मुख्यमंत्री।

इस दौरान जब नरेंद्र मोदी की चुनावी सभाओं को भी सुना तो लगा कि अन्य राजनीतिज्ञों से अलग सोच रखने वाले नेता हैं नरेंद्र मोदी। जब मुलाकात हुई तो बातचीत में ऐसा लगा कि विजन बहुत साफ है और बहुत कुछ करने की तमन्ना है। प्रधानमंत्री बनने का भी सपना उन्होंने उसी समय सजो लिया था। लेकिन इस मिशन तक पहुंचने के लिए जो रणनीति उन्होने बनाई उसी का परिणाम रहा कि बड़े-बड़े राजनीतिक विश्लेषकों के गणित को पीछे छोड़ प्रचंड बहुमत से प्रधानमंत्री बने।

साल 2007 में जब नरेंद्र मोदी गुजरात में फिर सत्ता में आए तो डायमंड प्रकाशन के नरेंद्र कुमार वर्मा का मेरे पास फोन आया कि आपको नरेंद्र मोदी पर किताब लिखनी है। पहले मैंने सोचा कि किसी व्यक्ति की प्रोफाइल लिखना है तो इसके लिए तो बड़ा अध्ययन करना होगा। उन्होंने कहा कि कुछ सामग्री उनके पास है और कुछ और लोगों से संपर्क करा देंगे जिसको आधार बनाकर आप किताब लिख सकते हैं। बातचीत में नरेंद्र वर्मा ने कहा कि उन्होंने किताब का कवर भी तैयार कर लिया और उसको मुझे मेल भी कर दिया। अब मुझे अपनी तैयारी करनी थी।

बस फिर क्या था एक महीने में मैंने किताब तैयार कर ली और उस पुस्तक का नाम रखा 'दूरदृष्टा नरेंद्र मोदी'। हिंदी में नरेंद्र मोदी की पहली जीवनी किताब के रूप में लिखने का मुझे अवसर मिला। बाद में उस पुस्तक का अंग्रेजी, गुजराती और अन्य भाषाओं में अनुवाद भी हुआ। बाद में उसके कई संस्करण प्रकाशित हुए। आज प्रधानमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी देश और समाज के लिए क्या कर रहे हैं यह सभी को पता है। इसमें कोई कहने की बात नहीं है कि मैं उनका गुणगान करूं या फिर आलोचना करूं। जो भी हकीकत है जनता को सब पता है। जन्मदिन की मैं बधाई देता हूं।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और नरेंद्र मोदी पर लिखी उनकी पुस्तक ‘दूरदृष्टा नरेंद्र मोदी’ के कई संस्करण कई भाषाओं में प्रकाशित हो चुके हैं)

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