जितना बहुमत लोकसभा में मोदी के पास है, उतना ही न्यूजरूम में है: संजीव पालीवाल

Saturday, 17 September, 2016

प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी को उनके 67वें जन्मदिन की शुभकामनाएं। पीएम के जन्मदिन के मौके पर हमने देश के वरिष्ठ संपादकों से मोदी को लेकर उनके 'मन की बात' क्या है, ये जानने की कोशिश की है। इस कड़ी में पेश है वरिष्ठ पत्रकार संजीव पालीवाल जी का पीएम मोदी को लेकर एक नजरिया जो उन्होंने फेसबुक पर लिखा है...

संजीव पालीवाल

एग्जिक्यूटिव एडिटर, आजतक ।।

‘बात करनी मुझे मुश्किल कभी ऐसी तो ना थी .... जैसी अब है तेरी महफिल कभी ऐसी तो ना थी ‘ ये शेर देश के पत्रकार आजकल अक्सर गुनगुनाते रहते हैं। देश के तमाम पत्रकारों और मीडिया हाउसेस को इस बात का हरदम अहसास होता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनका कार्यालय अब पंहुच से दूर हो चुके हैं। अब शायद ही कोई पत्रकार होगा जो उनसे नजदीकी का दावा कर सके। अपने हिसाब से उनसे सवाल जवाब कर सके। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़े सलीके से खुद को देश के मीडिया के सभी सवालों से दूर कर लिया है।

पिछले सवा दो साल में जबसे नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने हैं उन्होंने एक भी प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की है। जो 2-4 इंटरव्यू उन्होंने दिये है उसमें मोदी की अपनी मर्जी और फायदा था ना कि करने वाले पत्रकारों की पसंद। मोदी जब इंटरव्यू देना चाहते हैं तभी देते हैं। इंटरव्यू किसे देना है ये भी वो ही तय करते हैं। इंटरव्यू देखकर लगता है कि सवाल क्या होंगे इसका एक मोटा खाका भी पहले से ही तय हो जाता होगा। यानी कि वो अचानक सवाल लेने के शौकीन नहीं है। वो पूरी तैयारी के साथ ही इंटरव्यू देना चाहते हैं। ऐसा पहले कभी नहीं था। सबसे कम बोलने वाले पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी पत्रकारों के सवाल लेते थे। प्रेस कॉंफ्रेंस करते थे। पर मोदी अलग हैं।

दरअसल मोदी को मीडिया हाउसेस की कमजोरी पता है। उन्हे पता है कि हर कोई उनका इंटरव्यू करना चाहता है। वो जानते हैं कि प्रेस कांफ्रेस करने से उन्हें कुछ हासिल नहीं होगा। बल्कि नुकसान होगा। कई ऐसे सवालों से उन्हें रूबरू होना पड़ेगा जिसका जवाब वो देना नहीं चाहते। मसलन, कालाधन, महंगायी, बैंक में 15 लाख रुपये, घर वापसी, गौ रक्षा, असहिष्णुता। जबकि इंटरव्यू में ऐसा खतरा नहीं है। इंटरव्यू से फायदा ये भी होता है कि जिसे इंटरव्यू मिलता है वो पूरे जोर शोर से उसका ऐसे प्रचार करता है जैसे मानो उसके हाथ कोई खजाना लग गया हो। टीवी के साथ-साथ अखबार में विज्ञापन तक छपते हैं। देशभर में उसकी चर्चा होती है। प्रधानमंत्री को जितना कवरेज मिलना चाहिये उससे ज्यादा मिलता है। मीडिया हाउस प्रधानमंत्री के इंटरव्यू को एक्सक्लूसिव करके बेचता है। और जिसे नहीं मिलता वो मीडिया हाउस अपने पत्रकारों को कोसता है। नरेंद्र मोदी ने अपने इंटरव्यू को एक बहुमूल्य प्रोडक्ट बना दिया है जो हर मीडिया हाउस को हर वक्त नहीं मिल सकता। मीडिया हाउस बस यही सोचता है कि ‘ मेरा नंबर कब आयेगा’ ।

पिछले सवा 2 साल में न्यूजरूम का स्वरूप भी पूरी तरह बदल गया है। पहले न्यूजरूम में लेफ्ट विचारधारा का बोलबाला था। लेकिन आज न्यूजरूम अखाड़े में तब्दील हो गया है। जितना बहुमत लोकसभा में नरेंद्र मोदी के पास है उतना या उससे ज्यादा न्यूजरूम में है। आज आप उनके भाषण के दौरान न्यूजरूम में तालियां सुन सकते हैं। उनके पक्ष में डेस्क से आने वाले कमेंट सुन सकते हैं। पक्ष-विपक्ष में जोरदार बहस सुन सकते हैं। कई बार तो ऐसा लगता है मानो हाथापायी हो जायेगी।ये किसी एक न्यूज रूम की बात नहीं है। ज्यादातर जगह ऐसा ही है।

एक और काम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करते है वो है सीधा संवाद। हर महीने रेडियो पर मन की बात, कभी बच्चों के साथ, कभी महिलाओं के साथ, कभी आम जनता के साथ सीधा संवाद।शायद ही इतना सीधा संवाद किसी प्रधानमंत्री ने पहले किया हो। इसका भी बड़ा फायदा यही है कि उन्हें असहज करने वाला सवाल नहीं सुनना पड़ेगा। जो सवाल जनता के होते हैं वो कैसे सेट किये जाते हैं ये टीवी प्रोग्राम करने वाले अच्छी तरह जानते हैं। ना कोई सवाल ना कोई जवाब। अपनी डफली अपना राग।

(साभार: फेसबुक वाल से)

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