कुरान में क्या है 'तीन तलाक' का स्वरूप, पहले समझें, फिर बहस करें: नदीम अख्तर, टीवी पत्रकार

Thursday, 30 March, 2017

नदीम अख्तर

टीवी पत्रकार ।।

इस देश में दिक्कत ये है कि लोग पढ़ते-लिखते नहीं हैं और फेसबुक पर धर्म जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर बहस करने लग जाते हैं। मसलन ट्रिपल तलाक के बारे में ज्यादातर लोगों को पता नहीं है और वे इसकी आड़ में इस्लाम को भला-बुरा कहने लगते हैं। वैसे ही हिन्दू धर्म के बारे में कई लोगों को मालूम नहीं और वो मांस भक्षण जैसे विषय पे बेवजह जिरह किए रहते हैं।

अरे भाई !! पहले थोड़ा पढ़-लिख तो लो, फिर ज्ञान देना। आप तो अपना कान लिए कौए के पीछे दौड़ने लगे! अभी एक मित्र की वॉल पर देखा कि एक गर्भवती महिला को ट्रिपल तलाक दे दिया गया है और वे लोग उसके ‘न्याय’ के लिए "I stand with.." का नारा बुलंद किए हुए हैं। पूरी बहस छेड़ रखी है।

उनमें से किसी को शायद नहीं पता कि कुरान में तलाक के तरीके बहुत साफ-साफ बताए गए हैं और उनमें से एक ये भी है कि गर्भवती महिला को तलाक नहीं दिया जा सकता। अगर गुस्से में पति ने दे भी दिया, तो ये तलाक मान्य नहीं होगा, क्योंकि महिला अभी इंडिपेंडेंट नहीं है। साथ ही एक बार में तीन तलाक देने का कोई जिक्र भी कुरान में नहीं है। हर एक तलाक के बाद तीन महीने की इद्दत की अवधि गुजारनी होती है यानी तीन monthly cycle. इसके बाद ही शोहर दूसरा तलाक दे सकता है। दूसरे तलाक के बाद फिर तीन महीने की इद्दत होगी। उसके बाद ही तीसरा तलाक दे सकता है।

पहले तलाक के बाद इद्दत की इस अवधि के अंदर अगर पति-पत्नी में सुलह हो जाती है या शारीरिक सम्बंध बन जाते हैं, तो वे फिर साथ-साथ जीवनभर रह सकते हैं। उन्हें दुबारा निकाह की जरूरत नही होगी पर हां। शोहर के पास अब सिर्फ दो तलाक ही बचे जिसका इस्तेमाल वह जीवन में कभी भी कर सकता है लेकिन हर तलाक के बाद तीन महीने की इद्दत की अवधि गुजारनी जरूरी है। कुरान में तीनों तलाक एक साथ देने की इजाजत ही नहीं दी गई है और ये सब अलग-अलग समय में आलिमों के अलग-अलग इंटरप्रिटेशन हैं, जिसने एक साथ तीन तलाक को जायज ठहरा दिया। कुरान में इसकी सख्त मनाही है। सो कुरान की मानी जाएगी या मुल्लाओं-आलिमों की..?? तीन तलाक की उनकी दकियानूसी व्याख्या उन्हें मुबारक। ये इस्लाम का तरीका नहीं है।

इसी तरह कुरान में बीवी को भी पति से अलग होने का बराबर का अधिकार दिया गया है। पति से नहीं बनने पर या अन्य किसी भी कारण से अगर वह चाहती है कि अब उसे अपने शौहर के साथ नहीं रहना है तो वह ‘खुला’ नामक तरीके के जरिए अपने शौहर से divorce ले सकती है। उसे कोई नहीं रोक सकता।

अब बताइए। खराबी कहां है। धर्म में या मुल्लाओं के दिमाग में या फिर आपके मस्तिष्क में,, जो बिना जाने-समझे फेसबुक पर बंदरकूद मचाने लगते हैं। पहले अध्ययन करिए, फिर बोलिए। वरना बंदर और आपमें क्या फर्क रह जाएगा।

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