CNN-न्यूज18 के ज़ाका जैकब बोले, करणी सेना और लश्कर-ए-तैयबा में कोई अंतर नहीं...

CNN-न्यूज18 के ज़ाका जैकब बोले, करणी सेना और लश्कर-ए-तैयबा में कोई अंतर नहीं...

Saturday, 27 January, 2018

सीएनएन न्यूज18 के डिप्टी एग्जिक्यूटिव एडिटर ज़ाका जैकब ने समूह के डिजिटल प्लेट (न्यूज18 हिंदी) पर करणी सेना को खुला खत लिखा है, जिसे आप यहां पढ़ सकते हैं-

मैं उन पत्रकारों में से एक हूंजिन्होंने तब पद्मावत देखी जब इसका नाम पद्मावती था। तब मैंने यह सोचकर कुछ नहीं लिखा कि शायद सब शांत हो जाएगा। मुझे लगा कि जब करणी सेना यह देख लेगी तो फिर अपने प्रोटेस्ट से पीछे हट जाएगी। कितना गलत था मैं।

परिस्थितियां बद से बदतर हो गईं। और हद तो तब हो गई जब जी डी गोयनका स्कूल की बस पर बुधवार उपद्रवियों ने हमला किया। यह अतिवादिता की हद थी। आप विरोध के लिए बच्चों पर हमला नहीं कर सकते। आपके ऐतिहासिक मूल्य भले ही कितना क्षत-विक्षत हो रहे होंलेकिन बच्चों की बस पर किए गए हमले को आप न्यायोचित नहीं ठहरा सकते।

इसका एहसास मुझे तब हुआ जब मेरी पांच साल की बेटी ने कहा 'पापाये लोग बच्चों को क्यों मार रहे थे?' मेरे पास कोई जवाब नहीं था। तब मुझे लगा कि भारत के कई बच्चों ने यह विडियो क्लिप देखी होगी। इंटरनेट की दुनिया में फेसबुकट्विटर और सोशल मीडिया पर कुछ भी रोका नहीं जा सकता।

मेरे लिए करणी सेना और लश्कर-ए-तैयबा में कोई अंतर नहीं है। लोकेंद्र कलवी और हाफिज मोहम्मद सईद में कोई अंतर नहीं है। दोनों आतंकी हैं।

मैंने जब करणी सेना के एक सदस्य से यह अपने शो फेसऑफ में कहावह गुस्साते हुए शो छोड़कर चला गया। मुझे यह बात दोहराने में कोई पछतावा नहीं है कि करणी सेना के लोग गुंडे नहीं आतंकवादी हैं।

US के स्टेट डिपार्टमेंट ने आंतकवाद की परिभाषा चैप्टर 38, टाइटल 38 में दी है कि

राजनीतिक मंशा से प्रेरित होकर आम जनता पर किया गया हिंसक आक्रमण आतंकवाद है।

मुझे अच्छा लग रहा है कि बुद्धिजीवी लोग इन्हें आतंकवादी कह रहे हैं। फरहान अख्तर ने ट्वीट किया है कि स्कूल बस पर आक्रमण करना आंदोलन नहीं है। यह आतंकवाद है। जिन लोगों ने ऐसा किया हैआतंकवादी हैं।

मेरे एक संपादक ने मुझसे कहा कि कोई भी दंगा तब तक नहीं हो सकताजब तक उसे भड़कने देने में राज्य सरकार की मंशा न हो।

गुजरातहरियाणा और राजस्थान जैसे राज्यों में राज्य सरकारों की अक्षमता और पुलिस प्रशासन की निष्क्रियता से हिंसा भड़क रही है। ऐसा लगता है कि वसुंधरा राजेमनोहर लाल खट्टर और विजय रूपाणी हिंसा को भड़कने देने में अपना राजनीतिक लाभ देखते हैं। क्या इनके लिए थोड़ा सा वोटबैंक हमारे बच्चों से बढ़कर है?

आज विदेश राज्य मंत्री और पूर्व आर्मी जनरल वीके सिंह ने कहा कि विरोध करने वालों के साथ बातचीत कर समस्या का हल निकालना चाहिए और चीजें जब सहमति से नहीं होती हैं तो गड़बड़ होती हैं। मैं वी के सिंह से पूछना चाहता हूं कि क्या भारतीय सेना को लश्कर-ए-तैयबा से बातचीत कर समस्या का हल निकालना चाहिएयह वाकई बेहद शर्मनाक बयान है।

मंगलवार को प्रधानमंत्री ने दावोस से गरज कर भाषण दिया था। उन्होंने अपने भाषण के अंत में कहा था कि अगर आप प्रॉस्पैरिटी के साथ पीस चाहते हैं तो भारत आएं। आसियान समिट में भाग लेने दस देशों के प्रतिनिधि आए हैं। सोचिए उन्होंने रात में टीवी पर क्या देखा होगा और अखबार में सुबह क्या पढ़ा होगा?

क्या हम ऐसा नया भारत उन्हें और पूरी दुनिया को दिखाना चाहते हैंआज के भारत की सच्चाई यही है।

एक पांच वर्षीय बच्ची का पिता


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