अटल बिहारी वाजपेयी की पत्रिका पर चला मोदी सरकार का हथौड़ा...

Wednesday, 12 April, 2017

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा शुरू की गई पत्रिका ‘राष्ट्रधर्म’ को अब सरकारी विज्ञापन नहीं मिल सकेंगे। दरअसल ऐसा इसलिए, क्योंकि केंद्रीय सूचना-प्रसारण मंत्रालय के अधीन आने वाले डायरेक्टोरेट ऑफ एडवरटाईजिंग एंड विजुअल पब्लिसिटी ने सरकारी विज्ञापन  की सूची से पत्रिका की मान्यता को रद्द कर दिया है।

हालांकि पत्रिका के संपादकीय और प्रबंधकीय दल की ओर से कहा गया है कि इस तरह का कार्रवाई गलत है और अभी तक पत्रिका के कार्यालय में इस तरह की जानकारी नहीं आई है जानकारी आने पर हम अपना कदम उठाएंगे।

इस मामले में राष्ट्रधर्म के प्रबंधक पवन पुत्र बादल ने मीडिया को बताया कि यदि इस तरह की कार्रवाई की जाती है तो यह गलत है। उन्होंने कहा कि जब इमरजेंसी के दौरान इस पत्रिका के कार्यालय को सील कर दिया गया था, उस वक्त भी इसका प्रकाशन बंद नहीं हुआ था। अगर डीएवीपी और मंत्रालय को कॉपी नहीं मिल रही थी तो नोटिस जारी करना चाहिए था, लेकिन बिना किसी नोटिस के इस तरह की कार्रवाई गलत है।

दरअसल अक्टूबर 2016 के बाद से इस पत्रिका की कॉपी डीएवीपी और सूचना-प्रसारण मंत्रालय को नहीं पहुंच रही थी। इसी को आधार बनाकर डीएवीपी ने इस पत्रिका को विज्ञापन सूची से बाहर किया है।

गौरतलब है कि ‘राष्ट्रधर्म’ पत्रिका की शुरुआत अटल बिहारी वाजपेयी ने 1947 में की थी। वे इस पत्रिका के संपादक थे और जनसंघ के संस्थापक दीनदयाल उपाध्याय इस पत्रिका के प्रबंधक थे। दरअसल इस पत्रिका की शुरुआत एक बेहद नेक मकसद से की गई थी। अटल बिहारी वाजपेयी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय का विजन था कि देशवासियों में राष्ट्रप्रेम और राष्ट्र धर्म की भावना जगे। पत्रिका के जरिए लोगों को जागरुक करने का मकसद था।

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