लाइक, शेयर और रिट्वीट से तय नहीं होती कंटेंट की क्वॉलिटी: विनय सिंघल, WittyFeed

लाइक, शेयर और रिट्वीट से तय नहीं होती कंटेंट की क्वॉलिटी: विनय सिंघल, WittyFeed

Wednesday, 10 January, 2018

अनम खान ।।

विटीफीड’ (WittyFeed) देश की उन बड़ी वायरल कंटेंट कंपनियों में से एक है, जो लाइफस्‍टाइल, टेक्‍नोलॉजी, ह्यूमर, एंटरटेनमेंट, स्‍पोर्ट्स आदि से संबंधित कंटेंट को शेयर करने के लिए एक यूनिक प्‍लेटफॉर्म उपलब्‍ध कराती है। हमारी सहयोगी वेबसाइट एक्‍सचेंज4मीडिया’ (exchange4media) की अनम खान ने विटीफीडके सह-संस्‍थापक विनय सिंघल से विभिन्‍न मुद्दों पर खास बातचीत की। इस बातचीत के दौरान विनय सिंघल ने पिछले वर्षों के दौरान कंटेट में हुए विकास के अलावा यह भी बताया कि जिस कंटेंट को पब्लिश किया जाना है, उसे सभी तरह के दबावों से मुक्‍त होना चाहिए। खासकर जब कैंपेन के लिए ऑर्गेनिक कंटेंट की बात आती है तो इसे ब्रैंड मालिकों के हस्‍तक्षेप से मुक्‍त होना चाहिए।

वर्ष 2017 में वायरल ट्रेंड्स के बारे में बातचीत करते हुए सिंघल ने कहा कि वायरलिटी ऑडियो, विडियो और टेक्‍स्‍ट पर निर्भर नहीं है लेकिन कोई भी चीज जो कंज्‍यूमर को अच्‍छी लगती है और उसमें नयापन हो, वह काफी है।

प्रस्‍तुत हैं इस बातचीत के प्रमुख अंश-

आजकल सूचना क्रांति का युग है और सूचनाओं की बाढ सी आई हुई है, ऐसे माहौल में टिके रहने के लिए ब्रैंड्स के सामने कौन से सबसे बडी चुनौतियां हैं ?

ब्रैंड के साथ आज के समय में सबसे बडी दिक्‍कत ये है कि डिस्‍प्‍ले एडवर्टाइजिंग बहुत ज्‍यादा हो रही है। यूजर इस पर ज्‍यादा ध्‍यान नहीं देता है। दरअसल, यूजर्स सामान्‍य बैनर वाले विज्ञापनों के आदी हो गए हैं और इन्‍हें नजरअंदाज कर रहे हैं। सबसे बडी चुनौती ये है कि लोगों का ध्‍यान आकर्षण घटता जा रहा है। ऐसे में सबसे जरूरी लोगों का ध्‍यान आकर्षित करना है ताकि वे विज्ञापन को देखें और समझें कि इसके द्वारा क्‍या कहने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए विभिन्‍न फॉर्मेट वाले विज्ञापन जैसे-मल्‍टीमीडिया विज्ञापन, विडियो/साउंड आदि का इस्‍तेमाल किया जा सकता है लेकिन सिर्फ एक समस्‍या इनके साथ ये होती है कि वे बहुत ज्‍यादा पकाऊ होते हैं। ये विज्ञापन लोगों को अपने साथ जोडने के बजाय उन्‍हें दूर कर सकते हैं। 

आजकल लाइक्‍स, शेयर्स और रिट्वीट खूब छाया हुआ है, क्‍या ये माना जा सकता है कि इनके आधार पर अच्‍छे कंटेंट का आकलन किया जा सकता है ?

नहीं, मुझे नहीं लगता कि अच्‍छे कंटेंट को लाइक्‍स, शेयर और रिट्वीट से परिभाषित किया जा सकता है। मेरी नजर में ये अलग चीज है और कंटेंट अलग है। इसके आधार पर हम ये नहीं कह सकते हैं कि कंटेंट अच्‍छा ही होगा।

अच्‍छे कंटेंट के बारे में स्थिति बिल्‍कुल स्‍पष्‍ट होनी चाहिए आखिर हम खास कंटेंट क्‍यों तैयार करना चाहते हैं। कंटेंट की सफलता का मापदंड यही है कि सही संख्‍या में चीजें सही ऑडियंस तक पहुंचे। और जब हम सही ऑडियंस की बात करते हैं तो उसमें प्रादेशिक कंज्‍यूमर के लिए भी कंटेंट तैयार होना चाहिए।

मान लीजिए कि यदि मैं दिल्‍ली वालों के लिए कोई कंटेंट तैयार करता हूं और चाहता हूं कि इसे सबसे पहले दिल्‍ली वाले इस्‍तेमाल करें तो वे मेरे टार्गेट ऑडियंस होंगे और मैं पहले उनके बारे में सोचूंगा। इसी तरह, यदि मैं राष्‍ट्रीय स्‍तर के लिए कोई कंटेंट तैयार करता हूं तो मुझे पता होता है कि यह सिर्फ सैकडों अथवा हजारों लोगों के लिए नहीं है बल्कि मुझे यह सुनिश्चित करना होगा कि कम से कम सात से दस मिलियन लोग इसका उपभोग कर रहे हैं।  

एक शब्‍द में कहूं तो अच्‍छे कंटेंट की सफलता को मापने का सही तरीका उसका उपभोग (consumption) है। लाइक, शेयर और रिट्वीट के बजाए उस पर आने वाले कॉमेंट्स(comments) कंटेंट की सफलता को जांचने का सही तरीका है क्‍योंकि यूजर्स को लिखने के लिए प्रभावित करना और उनका विचारों को व्‍यक्‍त करना काफी महत्‍वपूर्ण होता है।

क्‍या कंटेंट की वायरल होना किसी ब्रैंड की सफलता की गारंटी होती है ?

बिल्‍कुल, ऐसे ही होता है। यदि आप इंटरनेट के युग में किसी ब्रैंड को तैयार होते देखना चाहते हैं तो आपको इस बात को सुनिश्चित करना होगा कि पर्याप्‍त संख्‍या में और सही टाइप (यानी आप जिन लोगों तक उस कंटेंट को पहुंचाना चाहते हैं) लोग उस कंटेंट को देखें। ‍

इन दिनों वायरलिटी सिर्फ विडियो, ऑडियो और टेक्‍स्‍ट के रूप में ही नहीं है बल्कि हैशटैग भी वायरल हो रहा है। महिलाओं से हो रहीं छेडछा़ड़ के मुद्दे पर बनाया गया #METOO कैंपेन इंटरनेट पर पूरे साल छाया रहा और गूगल पर इस की-वर्ड के बारे में सबसे ज्‍यादा बातें हुईं। वायरलिटी इसी प्रकार की होनी चाहिए।

आजकल लोग इस तरह की चीजों पर कम ध्‍यान दे रहे हैं या यूं कहें कि वे कंटेंट पर ज्‍यादा ध्‍यान नहीं दे रहे हैं, ऐसे में आप अपने मेसेज की डिलीवरी को कैसे सुनिश्चित करते हैं ?

जैसा कि मैंने पहले भी कहा है कि आपका कंटेंट बेहतर होना चाहिए और लोगों को पसंद आना चाहिए। आपको इस‍के लिए काफी डाटा के इस्‍तेमाल की जरूरत पड़ती है ताकि इस डाटा के द्वारा आप अपने ऑडियंस की पसंद और जरूरतों को समझ सकें। इस स्थिति में रीजनल कंटेंट अच्‍छा काम करता है क्‍योंकि उसमें ऑडियंस के साथ भावनात्‍मक जुड़ाव होता है। यदि आप कोई कंटेंट इंटरनेट के लिए तैयार कर रहे हैं, यानी किसी कंटेंट को विभिन्‍न कल्‍चर अथवा बैकग्राउंड के लोगों के लिए तैयार किया जा रहा है तो आपको कंटेंट दूसरे प्रकार से तैयार करना चाहिए। उदाहरण के लिए- कोलकाता के लिए तैयार किया जाने वाला कंटेंट दिल्‍ली और चेन्‍नई के कंटेंट से अलग होना चाहिए। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि तीनों विभिन्‍न मायनों में काफी अलग हैं और उनकी भौगोलिक स्थिति भी अलग है। ऐसे में आपको ये उम्‍मीद नहीं रखनी चाहिए कि देश के प्रत्‍येक कोने में एक ही तरीके का कंटेंट काम करेगा।

उदाहरण के लिए- यदि मान्‍यवर अपनी क्‍लोथिंग लाइन यानी कपड़ों की श्रंखला के लिए कोई कंटेंट तैयार करता है तो उसे प्रादेशिक ड्रेस सेंस की जानकारी होनी चाहिए। उसे पता होना चाहिए कि रीजनल स्‍तर पर लोग किस तरह की ड्रेस को पसंद करते हैं। क्‍योंकि यदि हम दुल्‍हन के कपड़ों की ही बात करें तो हर राज्‍य में पहनावा और पसंद अलग-अलग होती है। इसलिए कंटेंट तैयार करते समय इन बातों का भी ध्‍यान रखना चाहिए और उसी हिसाब से काम करना चाहिए।

आजकल के समय में वायरल कैंपेन को तैयार करने के लिए ब्रैंड मार्केटर्स को किस तरह का काम करने की जरूरत है ?

ब्रैंड्स के साथ सबसे बड़ी दिक्‍कत ये है कि वे चाहते तो ये है कि पब्लिशर्स ऐसा कंटेंट तैयार करें जो खूब वायरल हो लेकिन वे उन्‍हें उनके हिसाब से काम नहीं करने देते हैं। वे कंटेंट को तैयार करने के लिए उन्‍हें पर्याप्‍त स्‍वतंत्रता भी नहीं देते हैं। ऐसे में ज्‍यादा हस्‍तक्षेप करने से कंटेंट की ऑरिजनल क्रिएटिविटी प्रभावित हो सकती है। आज के समय में यूजर्स बहुत स्‍मार्ट हैं। ऐसे में आपको इस बात के प्रति काफी ध्‍यान देना होगा कि जहां तक संभव हो सके, कंटेंट आर्गनिक दिखे।

आपको क्‍या लगता है, निकट भविष्‍य में कंटेंट कंजप्‍शन ट्रेंड्स (content consumption trends) किस प्रकार का होगा ?

विडियो काफी तेजी से और बड़े पैमाने पर आगे बढ़ रहा है। यदि आप विडियो पर काम नहीं कर रहे हैं तो आप कुछ चीज छोड़ रहे हैं।

विटीफीड के लिए आप अपने विजन के बारे में बताएं ?

दुनिया के लिए हम एक कंटेंट कंपनी हैं और खुद के लिए टेक्‍नोलॉजी कंपनी हैं। अब हम ऐसी टेक्‍नोलॉजी पर काम कर रहे हैं जहां पर हम पब्लिशर्स और कंज्‍यूमर्स के बारे में पहले से ही अंदाजा लगा सकेंगे और उसी के अनुसार अपनी ओर से ढेर सारा कंटेंट दे सकेंगे। 

 

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