आर्थिक मोर्चे पर इस साल कुछ यूं रहा एनडीटीवी का प्रदर्शन

Wednesday, 17 May, 2017

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

31 मार्च 2017 को समाप्‍त हुए इस वित्‍तीय वर्ष में एनडीटीवी के वित्‍तीय परिणाम मिले-जुले रहे हैं।यदि रेवेन्‍यू के नजरिये से देखें तो प्रणॉय रॉय और राधिका रॉय के इस ग्रुप की कुल आय में 7.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है और यह 577.12 करोड़ रुपये से घटकर 535.21 करोड़ रुपये रह गई है। लेकिन यदि दूसरी ओर देखें तो पिछले वर्ष के मुकाबले इस वित्‍तीय वर्ष में ग्रुप के खर्चों (expenditure) में कमी आई है। खासकर साल के आखिरी छह महीनों में एनडीटीवी अपने खर्चों में कटौती करने में सफल रहा है और यह 645.23 करोड़ रुपये से घटकर 593.02 करोड़ रुपये हो गया है।

हालांकि इस वित्‍तीय वर्ष में नेटवर्क घाटे में रहा है लेकिन इसकी कुल लागत में कटौती 52.12 करोड़ रुपये यानी 8.09 प्रतिशत रही है, जो कंपनी के लिए अच्‍छा संकेत है। कर कटौती से पहले हुए नुकसान और असाधारण वस्तुओं को 57.81 करोड़ रुपये तक घटा दिया गया थाकरों के बाद नुकसान, कम ब्याज और सहयोगियों का हिस्सा 68.7 9 करोड़ रुपए तक पहुंच गया।

बड़े स्‍तर पर हुई कमी (Top line depletion)

यदि हम अप्रैल 2016 से मार्च 2017 के बीच के समय को देखें तो एनडीटीवी को विभिन्‍न परिचालनों (operations) से 522.67 करोड़ रुपये का रेवेन्‍यू हासिल हुआ। इनमें से अधिकांश रेवेन्‍यू एनडीटीवी के टेलिविजन मीडिया बिजनेस और उससे संबंधित कार्यों से आया।

सेगमेंट वाइज परिणामों को 515 करोड़ रुपये रखा गया है। ई-कॉमर्स/रिटेल बिजनेस ने एक साथ मिलाकर कुल 14.34 करोड़ रुपये का रेवेन्‍यू हासिल किया है।

यहां यह बताना जरूरी है कि 522.67 करोड़ रुपये का रेवेन्‍यू 6.67 करोड़ रुपये का इंटरसेगमेंट रेवेन्‍यू घटाने के बाद टेलिविजन और ई-कॉमर्स बिजनेस से हासिल हुआ है। 

यदि तुलनात्‍मक रूप से देखें तो टेलिविजन और ई:कॉमर्स बिजनेस में क्रमश: 7.8 और 11.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। वित्‍तीय वर्ष 2016 (FY16) में एनडीटीवी को टेलिविजन बिजनेस से 559.13 करोड़ रुपये मिले थे, जबकि इसके ई-कॉमर्स बिजनेस ने 16.14 करोड़ रुपये की कमाई की थी। इस साल दोनों स्‍तरों पर गिरावट के बाद रेवेन्‍यू में 40 करोड़ रुपये से ज्‍यादा की गिरावट आई है और यह 565.76  करोड़ रुपये से घटकर 522.67 करोड़ रुपये रह गया है।

इसमें सिर्फ एक ही अच्‍छी बात रही है कि शीर्ष स्‍तर (top line positioning) पर किए गए बदलावों से रेवेन्‍यू में दूसरी इनकम के मुकाबले बढ़ोतरी हुई है। पहले जहां यह 11.36 करोड़ रुपये थी, वह बढ़कर 12.54 करोड़ रुपये हो गई है। इसके परिणास्‍वरूप एनडीटीवी का कुल रेवेन्‍यू वित्‍तीय वर्ष 2017 में 535.21  करोड़ रुपये हो गया, हालांकि वित्‍तीय वर्ष 2016 में यह 577.12 करोड़ रुपये था।

कॉस्‍ट में कटौती (Reduced costs)

इस साल जहां कर्मचारियों पर किया गया खर्च (employee benefit expenses) 201.36 करोड़ रुपये से बढ़कर 213.21 करोड़ रुपये हो गया, वहीं अन्‍य सभी बड़े खर्चों में काफी कटौती की गई। उदाहरण के लिए: प्रॉडक्‍शन और अन्‍य सेवाओं पर होने वाला खर्च 123.72 करोड़ रुपये से घटाकर 120.84 करोड़ रुपये किया गया। इसी तरह, परिचालन (operating) और प्रशासनिक (administrative) खर्च भी 132.76 करोड़ रुपये से घटाकर 125.04 करोड़ रुपये किया गया।

इनमें सबसे खास बात यह रही कि एनडीटीवी ने मार्केटिंग, डिस्‍ट्रीब्‍यूशन और प्रमोशन खर्च में कटौती कर लगभग 40 करोड़ रुपये की बचत की। इन पर होने वाले खर्च में कटौती की गई और जहां पहले यह राशि 126.63  करोड़ रुपये थी, इस साल उसे घटाकर 88.67 करोड़ तक ले आया गया। इसके अलावा मूल्‍यहृास (depreciation) और ऋणमुक्ति (amortization) लागत, स्‍टॉक की खरीदारी और स्‍टॉक की इन्‍वेंट्री में बदलाव में भी कटौती की गई। हालांकि वित्‍तीय लागत (Finance costs) में बढ़ोतरी हुई है।

फिर भी, इतनी कॉस्‍ट कटिंग के बाद भी एनडीटीवी के प्रॉफिट के लिए पर्याप्‍त नहीं रही। इस साल जहां इसके खर्च 593.02 करोड़ रुपये रहे, वहीं इसकी कुल आय 535.21 करोड़ रुपये रही।

निचले स्‍तर पर सुधार नहीं (Unhealthy bottom line)

पिछले वित्‍तीय वर्ष के आखिर में एनडीटीवी को टैक्‍स काटने के बाद 54.82 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इस साल टैक्‍स हटाने, कम ब्‍याज और अन्‍य सहयोगियों के शेयर से यह 25.48 प्रतिशत बढ़कर 68.79 करोड़ रुपये हो गया। कंपनी को पहले ही 300 करोड़ रुपये का घाटा हो रहा है। अतिरिक्‍त नुकसान से निचले स्‍तर पर और तनाव बढ़ेगा।

देश के सबसे पुराने न्‍यूज ब्रॉडकास्‍टर्स में से एक एनडीटीवी को अब अपनी बॉटम लाइन को दुरुस्‍त करने के लिए जूझना पड़ रहा है। पिछले साल नवंबर में हुई नोटबंदी (demonetisation) के बाद अब मार्केट थोड़ा सुधार रहा है, 370 करोड़ रुपये के नुकसान को पूरा करने के लिए एनडीटीवी को कॉस्‍ट कटिंग के अलावा भी अन्‍य कड़े कदम उठाने होंगे।

 

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