डिजिटल में ग्रोथ को लेकर ‘Network18 Digital’ के सीईओ ने बताई ये बड़ी वजह... डिजिटल में ग्रोथ को लेकर ‘Network18 Digital’ के सीईओ ने बताई ये बड़ी वजह...

डिजिटल में ग्रोथ को लेकर ‘Network18 Digital’ के सीईओ ने बताई ये बड़ी वजह...

Thursday, 07 December, 2017

रुहैल अमीन ।।

सिलिकॉन वैली के साथ-साथ देश की बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों में काम कर चुके नेटवर्क18 डिजिटल’ (Network 18 Digital) के सीईओ मनीष माहेश्‍वरी का मानना है कि आने वाले समय में डिजिटल का और अधिक विस्‍तार होगा। उनका कहना है कि डिजिटल की काफी ग्रोथ हो रही है। इस पर अब विज्ञापन भी मिलने लगे हैं। यही नहीं, मेनस्‍ट्रीम में डिजिटल बहुत पहले ही अपनी जगह बना चुका है। माहेश्‍वरी ने ‘Moneycontrol’, ‘Firstpost’, ‘News18.com’, ‘Cricketnext’ और ‘Forbes India’ आदि के साथ काम किया है और इन्‍हें भविष्य में तैयार होने वाली इकाई के रूप में विकसित करने में काफी योगदान दिया है।

एक्‍सचेंज4मीडिया’ (exchange4media) के साथ एक विशेष बातचीत में मनीष माहेश्‍वरी ने इस बदलाव के बारे में विस्‍तार से बताया। नेटवर्क18 डिजिटल के लिए अपने विजन के साथ-साथ उन्‍होंने डिजिटल जर्नलिज्‍म के भविष्‍य, स्‍कोप और बदलते ट्रेंड्स के बारे में भी बातचीत की। यहां पढ़िए इस बातचीत के प्रमुख अंश:   

आजकल हर तरफ डिजिटल की बात हो रही है। यदि हम आपके नजरिये से देखें तो पिछले कुछ वर्षों में भारत में डिजिटल के क्षेत्र में कितना विस्‍तार हुआ है?

यदि हम पिछले दो-तीन वर्षों की तुलना करें तो देखेंगे कि अब डिजिटल पर विज्ञापन खर्च में काफी बढ़ोतरी हो रही है। यदि हम यूजर के नजरिये से देखें तो दो साल पहले ही डिजिटल मेनस्‍ट्रीम मीडियम बन चुका है और जियोने इसे सिर्फ मजबूती प्रदान की है। अ‍ब देशभर में लोग अपने मोबाइल फोन से चिपके रहते हैं। ऐसे में हम कह सकते हैं कि डिजिटल पहले ही मेनस्‍ट्रीम में शामिल हो चुका है।

अब डिजिटल को ज्‍यादा से ज्‍यादा एडवर्टाइजमेंट भी मिल रहा है और अब मीडिया एजेंसियों ने भी डिजिटल को एक प्रमुख कंपोनेंट के रूप में शामिल कर लिया है। अब क्‍लाइंट्स भी डिजिटल पर अपना प्रचार चाहते हैं। ऐसे में हम कह सकते हैं कि डिजिटल का प्रदर्शन अच्‍छा चल रहा है और इसकी ग्रोथ को लेकर हम काफी आशान्वित हैं।

आजकल कंटेंट के लिए यूजर्स मोबाइल का काफी इस्‍तेमाल करते हैं। यूजर्स के लिए मोबाइल काफी महत्‍वपूर्ण प्‍लेटफॉर्म बन गया है। ऐसे में आप इस दिशा में किस तरह काम कर रहे हैं?

हमने जो नोटिस किया है, उसके अनुसार डिजिटल का इस्‍तेमाल करने वाले लोग डेस्‍कटॉप से मोबाइल की ओर शिफ्ट हो रहे हैं। पिछले एक साल में हमारा ज्‍यादा से ज्‍यादा ‍ट्रैफिक मोबाइल से आ रहा है। हालांकि हम जो भी कंटेंट तैयार करते हैं वह डिजिटल फर्स्‍ट होता है लेकिन हम ऐसा कंटेंट भी तैयार करते हैं जो खासकर मोबाइल फर्स्‍ट होता है। मोबाइल के बारे में खास बात यह है कि यह हमेशा चलता रहता है और लोग कभी भी कंटेंट का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। हमारी स्‍ट्रेटजी यही है कि हम न सिर्फ डिजिटल के लिए कंटेंट तैयार करें बल्कि मोबाइल के लिए भी कंटेंट तैयार करें। लेकिन मोबाइल के साथ सबसे बड़ी परेशानी यही है कि इसमें कमाई इतनी अच्‍छी नहीं है, जितनी डेस्‍कटॉप में है।

दिलचस्‍प कंटेंट को तैयार करना कितना मुश्किल हैस्‍पीड और क्रेडिबिलिटी जैसे मुद्दों से आप कैसे निपटते हैं?

हमारी भूमिका आखिरकार स्‍टोरीटेलर्स की है। लोग हमारी स्‍टोरी को सिर्फ इसलिए सुनते हैं क्‍योंकि ये प्रामाणिकसच्ची और विश्‍वसनीय होने के साथ उन्‍हें समय पर उपलब्‍ध होती हैं। यही कारण है कि लोग हमारे पास आते हैं और हमसे जुड़े रहते हैं। इस बात का काफी फर्क पड़ता है कि आप किस प्‍लेटफॉर्म पर स्‍टोरी सुनाते हैं, उसका श्रोतावर्ग कौन है और वह स्‍टोरी किस प्रकार की है। आजकल जब लोग मोबाइल प्‍लेटफॉर्म्‍स पर न्‍यूज हासिल कर रहे हैं ऐसे में स्‍टोरी सुनाने के तरीके में भी निश्चित रूप से बदलाव होता है। हम क्‍वालिटी जर्नलिज्‍म के साथ क्रेडिबिलिटी पर भी पूरा ध्‍यान देते हैं। हालांकि स्‍पीड भी बहुत जरूरी है यानी लोगों को तेजी से सूचनाएं मिल सकें, लेकिन यह क्रेडिबिलिटी की कीमत पर नहीं होनी चाहिए। मेरे कहने का मतलब यह है कि हम क्रेडिबिलिटी से किसी तरह का समझौता नहीं कर सकते हैं। यदि आप किसी चीज को बहुत जल्‍दी पढ़ना चाहते हैं तो इसके लिए बहुत सारे सोशल मीडिया चैनल उपलब्‍ध हैं। हम पहले क्‍वालिटी और क्रेडिबिलिटी पर ध्‍यान देते हैं।    

यदि हम ट्रेडिशनल यानी पारंपरिक मीडिया की बात करें तो यह भी देश में काफी अच्‍छा प्रदर्शन कर रही है। ऐसे में निकट भविष्‍य में आपको ट्रेडिशनल और डिजिटल में किस तरह के प्रदर्शन की उम्‍मीद है?

भारत बहुत विशाल देश है और हम 1.3 बिलियन लोगों की बात कर रहे हैं। इतने लोगों में सिर्फ 300 मिलियन लोगों के पास इंटरनेट की सुविधा है। ऐसे में बड़ी संख्‍या में लोग अखबारों और टीवी पर निर्भर रहते हैं। इस स्थिति को देखते हुए मुझे लगता है कि ट्रेडिशनल और डिजिटल कई वर्षों तक मौजूद रहेंगे।  

क्‍या आप ऑनलाइन सबस्क्रिप्‍शन रेवेन्‍यू के बारे में भी सोच रहे हैं, क्‍या आप निकट भविष्‍य में पेवॉल’ (paywall) शुरू करने की भी कोई योजना बना रहे हैं?

हम अभी इस कॉन्‍सेप्‍ट को समझ रहे हैं लेकिन इस संबंध में हम तुरंत कुछ भी नहीं करने जा रहे हैं। हम फिलहाल ये देख रहे हैं कि देश में अन्‍य प्‍लेयर्स किस तरह यह कर रहे हैं, इसके आधार पर ही हम बाद में इस बारे में कोई निर्णय लेंगे।

न्‍यूज जॉनर (news genre) में डिजिटल प्‍लेयर्स Artificial Intelligenceऔर बिग डाटा का इस्‍तेमाल किस तरह कर रहे हैं

जहां तक ‘AI’ और बिग डाटा के इस्‍तेमाल की बात है तो मुझे लगता है कि देश को अभी और आगे बढ़ना होगा। हमारे पास अपने ऑडियंस के बारे में बहुत सारा डाटा मौजूद है, जिनसे पता लगाया जा सके कि कौन लोग हमारे प्‍लेटफॉर्म्‍स का इस्‍तेमाल कर रहे हैं। इससे हमें कंटेंट को और बेहतर बनाने में मदद मिलती है। दूसरी चीज हमें ये सुनिश्चित करना है कि लोगों को बैकग्राउंड में उनकी रुचि के अनुसार विज्ञापन दिखाई दें। ऐडवर्टाइजिंग रिकमंडेशन डाटा पर ज्‍यादा निर्भर होती जा रही हैं और हमने इस काम के लिए एक मजबूत विश्‍लेषक टीम लगा रखी है। ऐसे में मैं कह सकता हूं कि हमारा सबसे ज्‍यादा फोकस डाटा पर है और हम उसके आधार पर ही निर्णय ले रहे हैं।

क्‍या आज के समय में एडिटोरियल का संचालन विश्‍लेषकों के हाथ में है?

हम इस पर बहुत काम कर रहे हैं। डिजिटल के बारे में एक अच्‍छी बात यह है कि इसमें सभी चीजों को मापा-परखा जा सकता है। हम अपने पूरे डाटा को ट्रैक कर इसे अपनी एडिटोरियल टीम के साथ शेयर करते हैं। इसके आधार पर ही वे निर्णय लेते हैं कि कौन सी स्‍टोरी लिखी जानी हैं।

 

समाचार4मीडिया.कॉम देश के प्रतिष्ठित और नं.1 मीडियापोर्टल exchange4media.com की हिंदी वेबसाइट है। समाचार4मीडिया में हम अपकी राय और सुझावों की कद्र करते हैं। आप अपनी राय, सुझाव और ख़बरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। आप हमें हमारे फेसबुक पेज पर भी फॉलो कर सकते हैं। 



Copyright © 2017 samachar4media.com