विदेश में कही वरिष्‍ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने अपने ‘मन की बात’ विदेश में कही वरिष्‍ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने अपने ‘मन की बात’

विदेश में कही वरिष्‍ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने अपने ‘मन की बात’

Friday, 03 November, 2017

समाचार4मी‍डिया ब्यूरो ।।

वरिष्‍ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने वर्तमान राजनीतिक और मीडिया संस्‍कृति पर काफी गहरी चिंता जताई है। अंग्रेजी वेबसाइट गल्‍फ न्‍यूज’ (Gulf News) से बातचीत में इंडिया टुडे’ (India Today group) के कंसल्टिंग एडिटर राजदीप का कहना है कि सत्‍तासीन राजनीतिक दलों और पत्रकारिता के बीच की रेखाएं धुंधली होती जा रही हैं। अब किसी भी अखबार अथवा चैनल को मिलने वाला सरकारी अनुदान इस बात पर निर्भर करता है कि वह सत्‍ता से कितना फ्रेंडली है जबकि आवाज उठाने वालों को हाशिये पर कर दिया जाता है।  

संयुक्त अरब अमीरात के शारजाह में हुए शारजाह इंटरनेशनल बुक फेयर’ (Sharjah International Book Fair) के 36वें एडिशन में सरदेसाई भी प्रमुख वक्‍ताओं के तौर पर इसका हिस्सा बने हैं।  उल्लेखनीय है कि क्रिकेट को समर्पित उनकी नई पुस्‍तक ‘Democracy’s XI’ है।  

सरदेसाई ने कहा, ‘क्रिकेट हमेशा से मेरे लिए काफी खास रहा है। मुझे लगता है कि मैं बचपन से ही क्रिकेट के बीच में रहा हूं, जहां पर मेरे पिता मुझसे क्रिकेट की बातें करते थे। मैं फर्स्‍ट क्‍लास लेवल तक क्रिकेट खेला लेकिन इस खेल में इतना अच्‍छा कभी नहीं रहा कि इसमें आगे बढ़ूं। जो भी हो क्रिकेट में मेरिट और टैलेंट की जरूरत पड़ती है, यह विरासत में मिलने वाला खेल नहीं है। यही कारण है कि मैंने अपनी किताब का नाम ‘Democracy’s XI’ रखा है। इसमें यह भी बताने की कोशिश की गई है कि , जिनकी पारिवारिक पृष्‍ठभूमि क्रिकेट न रही हो, वे भी अपने टैलेंट के दम पर नेशनल क्रिकेट टीम का हिस्‍सा बन सकते हैं।

इतने वर्षों से पत्रकारिता करते हुए सरदेसाई ने देश में राजनीति और मीडिया संस्‍कृति को काफी करीब से देखा है, ऐसे में अपने अनुभवों के बारे में उन्‍होंने कहा कि चीजों में तत्‍काल सुधार की जरूरत है।

सरदेसाई के अनुसार, ‘इस समय भारतीय मीडिया की विश्‍वसनीयता पर गंभीर संकट है। लोग हमसे डरते हैं, भले ही लोग हमें टीवी पर देखते हैं लेकिन वे हमारा सम्‍मान नहीं करते हैं। इलेक्‍ट्रोनिक मीडिया की बात करें तो इस पर न्‍यूज से ज्‍यादा शोर होता है। इसमें लोगों के विचारों को एक व्‍य‍वस्थित क्रम में पेश करने के स्‍थान पर उनका धु्वीकरण किया जा रहा है। हमें इन चीजों को तत्‍काल सही करने की जरूरत है। 

रोशनी ज्‍यादा और गर्मी कम’ (more light and less heat) जैसे नए मीडिया मंत्र के बारे में चुटकी लेते हुए उन्‍होंने कहा, ‘लोगों को ज्‍यादा अच्‍छे तरीके से सूचनाएं प्रदान करने के लिए हमें पुराने जमाने की पत्रकारिता में वापस जाना होगा जिसमें ग्राउंड रिपोर्टिंग के साथ-साथ तमाम लोगों के विचार शामिल होते थे, जिसमें सामान्‍य राजनीतिक गुणगान से आगे बढ़कर स्‍जटोरी निकलती थी और उसमें बहस कम लेकिन न्‍यूज ज्‍यादा होती थी। इसके अलावा उसमें लाइट कम लेकिन हीट ज्‍यादा होती है।’ 

हालांकि सरदेसाई का मानना है कि देश में विरोध करने वालों की आवाज को दबा दिया जाता है, लेकिन इसके साथ ही उन्‍होंने उम्‍मीद भी जताई कि हालात में बदलाव आएगा।

सरदेसाई ने कहा, ‘भारत विविधताओं वाला देश है, जहां पर तमाम धर्मों, भाषाओं और विचारों वाले लोग रहते हैं। जो लोग इस तरह का काम कर रहे हैं, वह ज्‍यादा लंबे समय तक नहीं टिकने वाले हैं और उन्‍हें मुंह की खानी पड़ेगी। अंत में मिलजुलकर काम करने वाला एजेंडा ही काम करेगा।’ 

 

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