सिर्फ लोगो बदलने से नहीं चलेगा काम, दूरदर्शन को उठाने होंगे ये भी कदम सिर्फ लोगो बदलने से नहीं चलेगा काम, दूरदर्शन को उठाने होंगे ये भी कदम

सिर्फ लोगो बदलने से नहीं चलेगा काम, दूरदर्शन को उठाने होंगे ये भी कदम

Friday, 04 August, 2017

समाचार4मी‍डिया ब्यूरो ।।

सरकारी ब्रॉडकास्‍टर दूरदर्शनइन दिनों अपनी नई पहचान बनाने की जद्दोजहद में जुटा हुआ है। इसके लिए तमाम कवायद भी की जा रही है। इसके तहत दूरदर्शन ने 58 साल बाद अपने मौजूदा लोगो को बदलने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस लोगो का इस्तेमाल दूरदर्शन 1959 से कर रहा है।

देशभर में 23 चैनलों का प्रसारण करने वाले दूरदर्शन ने पिछले हफ्ते लोगो डिजाइन प्रतियोगिता की घोषणा भी की है। इसके विजेता को एक लाख रुपये बतौर पुरस्कार दिया जाएगा। दरअसल, दूरदर्शन इसके जरिये चैनल को नया लुक देकर युवा वर्ग पर फोकस करने के साथ ही इसे समकालीन बनाना चाहता है।

हालांकि दूरदर्शन के इस कदम का कई लोगों ने स्‍वागत किया है लेकिन कुछ लोगों का यह भी मानना है कि सिर्फ लोगो बदलने से ही कुछ होने वाला नहीं हैं। लोगो के साथ ही यह बदलाव कंटेंट और यहां के वर्ककल्‍चर में भी दिखना चाहिए।   

ऑल इंडिया रेडियोऔर दूरदर्शनकी पूर्व महानिदेशक अर्चना दत्‍ता ने इस मामले में मिलीजुली प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है, ‘बदलाव का हमेशा स्‍वागत है लेकिन यह सिर्फ एक सांकेतिक परिवर्तन है। दूरदर्शन के लोगो को वर्ष 1959 में डिजाइन किया गया था और अब अधिक से अधिक युवाओं को इससे जोड़ने के लिए यह प्रयास किया जा रहा है। हालांकि सिर्फ लोगो बदलने से ही रातोंरात इसमें बदलाव नहीं होने वाला है। इसके कल्‍चर में भी बदलाव होना चाहिए। सबसे ज्‍यादा जरूरी है कि दूरदर्शन को लेकर लोगों की मानसिकता को भी बदलना होगा।

वहीं, ‘दूरदर्शनऔर ऑल इंडिया रेडियोका संचालन करने वाली प्रसार भारती के मुख्य कार्यकारी अधिकारी शशि शेखर वेम्‍पती का कहना है,  ‘देश की कई पीढ़ियों के लिए दूरदर्शन ब्रैंड और लोगो यादों से जुड़ा है। आज देश की अधिसंख्य आबादी 30 साल से कम उम्र की है और दूरदर्शन को लेकर उनकी वैसी यादें नहीं हैं, जैसी इससे पहले की पीढ़ी की हैं। देश की करीब 65 फीसदी आबादी 35 साल से कम उम्र की है। 

दरअसल, प्रसार भारती के नए सीईओ की नियुक्ति के साथ ही इस संस्‍थान में बदलाव के प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। इसके लिए कई कदम उठाए भी जा चुके हैं। हमारी सहयोगी वेबसाइट एक्‍सचेंज4मीडिया’ (exchange4media) को पिछले दिनों दिए गए एक इंटरव्‍यू में वेम्‍पती ने स्‍वीकार किया था कि कई क्षेत्र ऐसे हैं जहां पर पिछले दो दशक में आधुनिकीकरण हो जाना चाहिए था लेकिन किन्‍हीं कारणों की वजह से ऐसा नहीं हो सका। ऐसे में सबसे बड़ी जरूरत प्रसार भारती को 21वी सदी के कॉरपोरेट के रूप में ढालने की है और इसे ऐसे मीडिया ऑर्गनाइजेशन में बदलना हैजो आज के डिजिटल युग में चल रहा है।

उनका कहना था, ‘हम अपनी क्षमता का पूरा इस्‍तेमाल नहीं कर पाए हैं। इसका कारण यह है कि हम अभी तक परंपरागत चीजों का ही अनुसरण कर रहे हैं और उससे आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं।

दूसरी बात यह है कि डीडी काफी पुराना संगठन है। हालांकि भारत एक युवा देश हो सकता है लेकिन यहां जितना भी स्‍टाफ काम कर रहा है, वह उम्र के पांचवें दशक में है। अगले पांच-छह वर्षों में काफी लोग रिटायर हो जाएंगे। ऐसे में यह अपने आप में बड़ी चुनौती है।

बड़े बदलाव की जरूरत

हालांकि नए लोगो की दिशा में हो रही कवायद सही दिशा में उठाया गया छोटा कदम हो सकता है। यहां नए वर्ककल्‍चर के लिए पिछले महीनों में कुछ काम भी किए गए हैं। इस बारे में वेम्‍पती का कहना है, ‘हमने अंदरूनी तौर पर कुछ बदलाव किए हैं। उदाहरण के लिए- यहां पर लंबे समय से एचआर विभाग नहीं था। पिछले एक साल में यहां पर एचआर इनफॉर्मेशन सिस्‍टम लगाया गया है। हालांकि यह काफी छोटा कदम है, लेकिन ऑर्गनाइजेशन के लिए यह काफी बड़ा बदलाव है और इसकी शुरुआत हो चुकी है। इसी तरह से हम अपनी जमीनों के रिकॉर्ड्स को डिजिटल कर रहे हैं ताकि हमें यह पता चल सके कि देश भर में हमारी संपत्ति कहां-कहां पर है। ऐसे ही कुछ उपाय किए जा रहे हैं और हमें इन्‍हें सुगम बनाने और आईटी के ढांचे में लाने की जरूरत है जो अभी मौजूद नहीं हैं।’ हालांकि यह ऑर्गनाइजेशन नई पहचान बनाने की तैयारी में है लेकिन इसके पूरी तरह से लागू होने को लेकर तमाम तरह की चिंताएं भी हैं।

 

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