म‍हेंद्र मोहन गुप्‍त की जुबानी, जानिए 'जागरण' नाम की कहानी...

Thursday, 31 May, 2018

समाचार4मी‍डिया ब्यूरो ।।

'वीमेंस इकनॉमिक फोरम' (WEF) के मंच पर हिंदी अखबार 'दैनिक जागरण समूह' (Dainik Jagran) के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर महेंद्र मोहन गुप्‍त ने महिलाओं की शक्ति का बखान करते हुए बताया कि कैसे आज वो जो भी हैंउनमें महिलाओं का कितना बड़ा योगदान है। दैनिक जागरण के एक ब्रैंड बनने के पीछे की कहानी को भी उन्‍होंने लोगों से साझा किया।  

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दिल्‍ली के ताज विवांता होटल में हुए कार्यक्रम में अपने संबोधन की शुरुआत हिंदी में करते हुए उन्‍होंने कहा कि चूंकि वे हिंदी का अखबार निकालते हैंइसलिए हिंदी से शुरुआत कर रहे हैं। महेंद्र मोहन गुप्‍ता ने कहा, 'मैं भारतीय संस्‍कृति की एक-दो लाइन कहना चाहूता हूं कि यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता। ये वो देश हैवो धरती है जहां पर हम नारी की पूजा करते हैं। नारी में ही सरस्‍वती हैलक्ष्‍मी है और दुर्गा भी नारी में ही है। आज के समय में जो नारी शक्ति पीछे चली गई हैउसे आगे लाना है।'

कार्यक्रम में झारखंड राय यूनिवर्सिटी की चांसलर डॉ. हरबीन अरोड़ा के साथ ही शिक्षा व सामाजिक क्षेत्र की तमाम हस्तियों को बधाई देते हुए महेंद्र मोहन गुप्‍ता ने कहा, 'हमारे देश में अभी भी महिलाओं को वे अवसर नहीं मिल पा रहे हैंजिससे वे आगे बढ़ सकें। इस मंच के माध्‍यम से हमें महिलाओं को वे तमाम अवसर उपलब्‍ध कराने हैं। उन्‍होंने कहा कि हमेशा कहा जाता है कि घर में महिलाओं का शासन चलता है। मेरा मानना है कि आज मैं जो भी हूंउसमें मेरे माता-पिता के साथ-साथ पत्‍नी व साथ में काम कर रहे लोगों का सपोर्ट शामिल है। बिना इन सबके सहयोग के यह संभव नहीं था।

मैं आपको एक छोटी सी स्‍टोरी सुनाता हूं कि आज जिस दैनिक जागरण नाम की धूम देश-विदेश में हैदरअसलयह 'जागरण' नाम मेरी माताजी का दिया हुआ है। यह 1942 की बात हैजब देश में स्‍वतंत्रता आंदोलन की आंधी चल रही थी। उस समय मेरे पिताजी ने जब अखबार शुरू करने के बारे में सोचा तो इसके नाम को लेकर पूरी रात चर्चा होती रही। आखिर में मेरी माताजी ने आकर कहा कि जब पूरी रात जागे होअखबार का नाम 'जागरण' रख दो। उनकी सलाह पर ही यह नाम रखा गया और झांसी से इसकी शुरुआत हुई। आज यह अखबार विश्‍व का सबसे ज्‍यादा पढ़ा जाने वाला अखबार बन गया हैइन सबके पीछे मेरी माताजी की ही प्रेरणा है।'

उन्‍होंने कहा कि भारतीय संस्‍कृति में हम लोगों के जीवन की शुरुआत भी एक महिला का बहुत बड़ा योगदान होता है। वह महिला हमारी मां होती हैजो हमारी पहली गुरुपथ प्रदर्शक और जीवन की राह दिखाने वाली होती है। उन्‍हीं के कारण आज हम इस मुकाम पर पहुंचे हैंजहां से हम महिलाओं के उत्‍थान को लेकर बातें कर रहे हैं। आज मैं समाज के लिए जो कर पा रहा हूंउसमें मेरे माता-पिता के साथ ही मेरी पत्‍नी का सहयोग भी शामिल है।

जागरण समूह के चेयरमैने ने आगे कहा कि यदि आप लोग अपने जीवन में आगे बढ़ना चाहते हैं तो आपको अपने साथ काम कर रहे लोगों का विश्‍वास करना होगा। आपको अपने सामने मौजूद लोगों से डील करना आना चाहिएफिर चाहे वह बिजनेस डील हो अथवा आप कुछ नया करना चाहते हों। ऐसे में आपको सामने वाले के मनोविज्ञान को भी समझना होगा। यदि कोई आपके पास किसी इच्‍छा अथवा मदद की गुहार लेकर आया है तो आपको अपने आप को उस व्‍यक्ति की जगह रखकर सोचना होगा। यदि आप एक बार ये सोच लेंगे कि आप सामने वाले व्‍यक्ति की जगह होते तो आप उस व्‍यक्ति की मनोदशा का आसानी से अंदाजा लगा सकते हैं। इस तरह से ही आप आगे बढ़ सकते हैं और समाज को आगे ले जा सकते हैं। आप अपने विजन और कड़ी मेहनत के साथ ही सामने वाले लोगों पर विश्‍वास कर समाज के लिए बहुत कुछ कर सकते हैं।

गुप्त ने कहा, 'आज के समय में हमारे देश में रोजाना बहुत सारी चीजें हो रही हैं। उन्‍होंने कहा कि मुझे यह कहते हुए संकोच हो रहा है कि मीडिया खासकर इलेक्‍ट्रोनिक मीडिया में जिस तरह चीजों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा हैवह सही नहीं है। मैं मानता हूं कि हमारे देश में कई ऐसी चीजें हो रही हैंजो नहीं होनी चाहिए और हम भी इन सबके खिलाफ हैं लेकिन जिस तरह से चीजों को दर्शाया जा रहा है और बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा हैवह सही नहीं है। यह कहा जा रहा है कि भारत में महिलाओं का शोषण हो रहा हैउन्‍हें टॉर्चर किया जा रहा हैयह सही नहीं है। मेरा मानना है कि देश- विदेश से यहां आई हुई महिलाएं यदि देखें तो पाएंगी कि हमारे देश में महिलाएं लगातार आगे बढ़ रही हैं और सिर्फ यही ऐसा अकेला देश हैजहां महिलाओं को पूरा सम्‍मान दिया जाता है।'

उन्‍होंने कहा, 'मैंने अपने परिवार में भी यही देखा है कि यदि मुझे कुछ पैसों की जरूरत होती है तो या तो मैं अपनी मां अथवा पत्‍नी से कहता हूं। जैसा कि मैंने पहले भी कहा कि निजी तौर पर मेरा मानना है कि हमारा देश सामाजिक व सांस्‍कृतिक रूप से काफी समृद्ध है और हमारा यहां मां सरस्‍वतीमां लक्ष्‍मी और मां दुर्गा की पूजा होती है। तो जब हमारे पास ये सब हैं तो आखिर इस तरह की चीजें क्‍यों हो रही हैं।'   

कार्यक्रम के अंत में नारी के सम्‍मान में उन्‍होंने कहा कि नारी निंदा मत करोनारी नर की खाननारी से नर उपजेध्रुव प्रह्लाद समान। यानी नारी के बिना कोई जीवन नहीं है। हमारा कोई अस्तित्‍व नहीं हैस‍ब कुछ सिर्फ नारी है। इसलिए हमें सदैव महिलाओं का सम्‍मान करना चाहिए।

 

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