साक्षात्कार

‘समाचार प्लस’ जल्द शुरू करेगा नया शो, एडिटर-इन-चीफ उमेश कुमार होंगे होस्ट

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उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड के रीजनल चैनल समाचार प्लस पर जल्द ही एक नया शो शुरू हो रहा है, जिसका नाम है- ‘फेस द नेशन विद उमेश कुमार’ (Face the Nation with Umesh Kumar)। इस शो को चैनल के एडिटर-इन-चीफ उमेश कुमार होस्ट करेंगे। क्या-कुछ खास है इस शो में इसे लेकर समाचार4मीडिया के असिसटेंट एडिटर अभिषेक मेहरोत्रा ने उनसे बातचीत की। पेश है उनकी बातचीत के कुछ अंश:

umesh1किस तरह का यह शो होगा?

देखिए, इस शो में कई मुद्दों और शख्सियतों का समावेश होगा, जैसे- राजनैतिक, समाजिक और देश की कुछ ऐसी प्रतिभाशाली व्यक्तियों का, जो वर्तमान में उभरी हैं। उनके जीवन के संघर्ष और सफलता पर इस प्रोग्राम में बात की जाएगी।वे किन-किन कठिनाइयों से होकर गुजरकर एक मुकाम तक पहुंचे हैं, ये उनकी जुबानी बताया जाएगा। इस शो में ऐसे ही लोगों को दर्शकों से रूबरू कराया जाएगा।

वहीं राजनीतिक मुद्दों को लेकर देश के बड़े राजनेताओं से भी सवाल-जवाब किए जाएंगे। यानी जनता को उनसे जो उम्मीदें थी, जो वादे उन्होंने किए थे, क्या वे इस पर खरे उतरे हैं और वे इसमें कहां तक पहुंचे हैं? ये सवाल भी हम उनसे पूछेंगे।

तमाम ऐसे शो है, जहां राजनेता कई बड़े वादे कर जाते हैं, लेकिन उसका बाद में कोई इंपैक्ट नहीं दिखता, फिर आपका शो अलग कैसे?

हमारे शो में जो भी राजनेता बड़े वादे करके जाएगा, उसके बाद हम फिर उन्हें जितनी जल्दी हो सकेगा बुलाएंगे और फिर उनसे पूछेंगे कि आपने हमारे शो में जो वादे किए थे उसे लेकर वर्तमान के क्या स्थिति है। हम उन्हें धरातल पर उनके वादों की स्थिति के बारे में दिखाएंगे और फिर उनकी प्रतिक्रिया जानेंगे।

यह शो कब तक और किस फॉर्मेट पर शुरू होगा ?

 ये अक्टूबर के तीसरे हफ्ते में शुरू होगा और वीकली शो होगा  ।

आजकल हर एंकर का अपना यूनीक स्टाइल होता है, इस शो में आपका यूनीक स्टाइल क्या होगा?

मेरा कोई स्टाइल नहीं है, क्योंकि मैं एक आमजन की तरह ही व्यवहार करता हूं और मेरे व्यवहार से हर कोई वाकिफ है। मैं जैसा हूं वैसा ही पेश आऊंगा। मुझे चिल्लाने या अपने बारे में बताने की जरूरत नहीं है और मैं मानता हूं कि यहां जो भी शख्सियतें आएंगी या जो दर्शक होंगे, उन्हें एक दूसरे से वाकिफ कराना जरूरी है न कि अपने बारे में। मुझे नहीं लगता कि ये बताना जरूरी है कि मैं किस तरह की एंकरिंग करता हूं। मैं दर्शक और मेहमान के बीच संवाद सूत्र का काम करूंगा।face-the-nation

आपका चैनल यूपी-उत्तराखंड बेस्ड है तो क्या शो में यूपी के ही बड़े चेहरे होंगे?

नहीं, ऐसा नहीं होगा कि चैनल यूपी बेस्ड है, तो प्रोग्राम भी यूपी बेस्ड होगा। बल्कि इसमें अलग-अलग जगह के कई चेहरे और हर तरह की प्रतिभाएं देखने को मिलेंगी, इसलिए ये शो न तो सिर्फ पॉलिटिक्स बेस्ड होगा और न ही यूपी बेस्ड।

शो का डिजिटल प्रमोशन किस तरह से हो रहा है?

हमारी चैनल की एक डिजिटल टीम है, जो चैनल के डिजिटल प्लेटफॉर्म को संभालती है। वही इस शो को डिजिटली हैंडल करेगी।

umesh-kumar1अपने शो के लिए हर एंकर को रिसर्च भी करनी पड़ती है। ऐसे में कई जिम्मेदारियों को बीच कितना मुश्किल होगा आपके लिए हर हफ्ते समय निकालना?

जैसे-जैसे आप आगे बढ़ते हैं और अपने क्षेत्र में तरक्की करते हैं आपसे जलने वालों की संख्या बढ़ती है, साथ ही आपके अपनों और चाहने वालों की संख्या भी बढ़ती है, इसलिए उस चाहत की कसौटी पर खरा उतरना ये भी अपने आप में बहुत बड़ा मिशन होता है और ऐसे में आप बेहतर प्रदर्शन करने के लिए टाइम मैनेजमेंट कर हर काम को बखूबी अंजाम देते हैं। मैं कोशिश करुंगा कि शो की गुणवत्ता के लिए पूरा समय दूं और इस कसौटी पर खरा उतर पाऊं।

आपकी इंडियाज न्यूजपेपर वेबसाइट पर कई छोटे-बड़े अखबार जुड़ें हैं, उसे किस तरह से मैनेज किया जाता है?

देखिए, ये समाचार प्लस का एक हिस्सा है, और यूपी के कई छोटे-बड़े क्षेत्रों समाचार प्लस नेटवर्क की कई अच्छी खबरों के फ्लो को बढ़ाने के लिए हमने इसकी शुरुआत की है। धरातल पर कुछ ऐसे समाचार पत्र हैं जो बहुत भारी संख्या में प्रकाशित नहीं होते हैं उन सबको भी हमने जोड़ा है और उन्हें एक डिजिटल प्लेटफार्म व ई-पेपर दिया है। इस वजह से आज प्रतिदिन एक लाख से ज्यादा रीडर हमारी इस वेबसाइट को पढ़ते हैं। इसे मैनेज करने के लिए हमारी एक अलग टीम है और उन्होंने इतने अच्छे तरीके से इसे मोनेटाइज किया है कि बहुत ही कम मैनपॉवर के साथ सबकुछ अच्छी तरह से अपने आप मैनेज हो जाता है।

आपकी इंडियाज न्यूजपेपर वेबसाइट पर कुल कितने अखबार जुड़े हैं?

मेरी इस वेबसाइट पर कुल 472 छोटे-बड़े अखबार जुड़ें हैं

क्या लगता है आपको कि बड़े अखबारों के प्रतिस्पर्धाओं के बीच छोटे अखबारों की मौजूदगी क्या रह जाती है?

देखिए, जरूरी नहीं कि सब जगह जागरण, अमर उजाला, हिन्दुस्तान अखबार पहुंचे ही, कुछ जगहों जैसे तहसील, कस्बों और गांवों में छोटे अखबार ही पहुंचते हैं और उनकी भी एक अलग पहचान होती है और वे अपने स्तर पर बहुत अच्छा काम कर रहे हैं।

umesh-kumarबिजनेस के लिहाज से ये प्लेटफॉर्म बहुत बड़ा वेंचर नहीं बन पाया है, ऐसा क्यों?

देखिए, मैंने पत्रकारिता को कभी बिजनेस की तरह नहीं लिया है। मैंने पत्रकारिता को आम लोगों से जोड़ने की कोशिश की है और एक सिस्टम की तरह से काम किया है। समाचार प्लस ने हाल ही में सरकारी विज्ञापन दो साल बाद उत्तर प्रदेश सरकार से लिया है। उत्तराखंड सरकार से विज्ञापन जारी होने के बाद भी हमने उसका बहिष्कार किया है और पिछले 9 महीनें से कोई विज्ञापन इस सरकार से नहीं लिया है और ये देश में पहली मिसाल होगी कि किसी चैनल ने किसी सरकारी विज्ञापन का बहिष्कार किया हो।

अक्सर देखा गया है कि रीजनल चैनल ज्यादा लंबी पारी नहीं खेल पाते हैं, ऐसे में समाचार प्लस को किस नजरिए से आप देखते हैं?

जिन चैनलों ने लंबी पारी नहीं खेली है वो एक या डेढ़ साल में बंद हो गए, लेकिन समाचार प्लस को पांचवा साल पूरा होने वाला है और ऐसे में ये सवाल रह नहीं जाता है कि समाचार प्लस लंबी पारी खेलेगा या नहीं।

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