एक सीनियर पत्रकार के पास किसी नेता की सेक्स सीडी क्यों है?

एक सीनियर पत्रकार के पास किसी नेता की सेक्स सीडी क्यों है?

Saturday, 28 October, 2017

अजीत भारती

ब्लॉगर ।।

बीबीसी के पूर्व पत्रकार विनोद वर्मा को कल उनके घर से गिरफ़्तार कर लिया गया। कुल 3000 सीडी और एक पेन ड्राइव के साथ। आरोप है कि उन्होंने भाजपा के किसी नेता को अपनी एक 'खोजी पत्रकारिता' की कहानी के लिए डराया और पैसे मांगे। एक्सटोर्शन के पीछे कथित नेता की 'सेक्स सीडी' का पत्रकार के पास होना भी एक कारण बताया जा रहा है।

इस में कितनी सच्चाई है मुझे नहीं पता। लेकिन पत्रकार महोदय का खुद का ये बयान आया चूंकि उनके पास छत्तीसगढ़ के इस भाजपा नेता की सेक्स सीडी है, तो उसे सरकार गिरफ़्तार करके फंसा रही है। पुलिस ने, विभिन्न रिपोर्ट्स के मुताबिक़, सेक्स क्लिप के सीडी की 500 से 3000 कॉपीज़ उनके घर से बरामद की हैं।

क़ानूनन सेक्स से संबंधित किसी भी तरह की सामग्री का आपके पास होना एक जुर्म है जिसमें हम और आप जो पोर्न कंटेंट देखते हैं वो भी आता है। आपके फोन पर अगर वो पाया जाएगा तो आप पर केस बनता है।

दूसरी बात, किसी भी व्यक्ति से संबंधित सेक्स सीडी का किसी के पास होना भी अपने आप में एक जुर्म है क्योंकि सवाल ये उठता है कि वो आपके पास क्यों है? आप उन 3000 सीडी का क्या करना चाह रहे थे? किसी की सेक्स सीडी से किस प्रकार की पत्रकारिता होती है?

और हां, फिर से बता रहा हूं कि ये बयान पत्रकार का ही है कि उनके पास सीडी है, इसीलिए उन्हें फंसाया जा रहा है।

आगे उन्होंने कहा कि सीडी तो पहले से ही पब्लिक डोमेन में है, तो उनके भी पास है। पब्लिक डोमेन में बहुत सारी चीज़ें होती हैं, लेकिन किसी पत्रकार के पास एक ग़ैरक़ानूनी सामग्री का होना, जिसमें किसी दो व्यक्तियों का (शायद) कन्सेन्सुअल सेक्सुअल एक्ट में पाए जाने की बात हो, बहुत सारी बातें कहता है।

मसलन, क्या वो नेता बलात्कार कर रहा था? क्या उस नेता ने ऐसी सीडी बनाकर महिला को ब्लैकमेल करने की कोशिश की? सीडी किसने बनाई? अगर नेता ने बनाई और ये पब्लिक डोमेन में है तो सरकार क्या कर रही है? सीडी में जो महिला है उसने कभी नेता के खिलाफ रपट लिखवाई? क्या पत्रकार ने, जिस भी कारण से सीडी अपने पास रखी हो, उस महिला तक पहुंचने की कोशिश की? या वो किसी मौक़े की तलाश में था कि कथित सीडी का इस्तेमाल किया जा सके?

आपके पास किसी की सेक्स सीडी आज के ज़माने में क्यों है जबकि क्लिप की सॉफ़्ट कॉपी फोन पर वॉट्सऐप आदि के ज़रिए मिल जाती है? आपको अपने निजी उपयोग के लिए किसी नेता की सीडी क्यों चाहिए? इसमें तो एक्सटोर्शन छोड़कर बाकी कोई एंगल तो मेरी समझ से बाहर है। आपके पास सीडी थी, और किसी की भी सीडी बनाना, बिना महिला और पुरुष की सहमति के कानून जुर्म है, तो क्या आप पुलिस के पास गए?

अब जब पत्रकार महोदय पकड़ लिए गए हैं तो बीबीसी, वायर, स्क्रॉल के साथ ही बाकी जो यूजुअल सस्पैक्ट मीडिया हैं, वो फिर से 'फ़्रीडम ऑफ़ एक्सप्रेशन को दबाने की कोशिश' वाला झुनझुना बजाना चालू कर चुके हैं। चूंकि पत्रकार विनोद वर्मा एडिटर्स गिल्ड के सदस्य भी हैं तो हो सकता है कि प्रेस क्लब में इनके दोस्त आदि सरकार को कोसने भी पहुंच जाएं। लेकिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मानक तय करने वाले सारे पुरोधाओं के लिए मेरे ऊपर के सवाल हैं, जिनका मैं जवाब चाहूंगा।

एक पत्रकार उर्मिलेश है, उसका क्या एजेंडा है वो उसके आर्टिकल के टोन से पता चल जाता है। इसका काम पानी पी-पीकर सरकार को बिलावजह कोसना भी रहा है। इसमें इन्हें बहुत ही आले दर्जे की क़ाबिलियत हासिल है।  पत्रकार , जो स्वयं कह रहा हो कि उसके पास नेता की सेक्स सीडी है, गिरफ़्तारी प्रेस को दबाने का प्रयास कैसे है, ये उर्मिलेश नहीं बता पाएंगे।

इनको बस पत्रकार और गिरफ़्तारी नामक दो शब्द दिख रहे हैं। इसमें कानून का एंगल कि सेक्स सीडी क्यों किसी के पास है, वो गायब कर दी गई है। पुलिस अपनी जांच करेगी, लेकिन उर्मिलेश स्वयं में ही पत्रकार हैं तो जज, वक़ील और फांसी का लीवर खींचने वाला एक्ज़ीक्यूशनर भी हैं। अतः, वो जो कह रहे हैं वो मूसा के टेन कमांडमेंट्स में से ग्यारहवां है कि पत्रकार क़ानूनी प्रक्रिया से इम्यून है।

पत्रकार खुद को मठाधीश समझते हों, लेकिन वो बाबा नहीं हैं। कानून सबके लिए है। भाजपा नेता के लिए भी, और पत्रकार के लिए भी। हां, आप सुप्रीम कोर्ट के जज हैं तो कानून आपके लिए नहीं है। इसलिए भी, अगर सेक्स सीडी ही पूरे प्रक्रम के केन्द्र में है तो उसकी जांच होनी चाहिए कि क्या ये बलात्कार है; क्या महिला की असहमति थी; क्या नेता ने महिला को किसी लालच या ब्लैकमेल के लिए सीडी बनाई; क्या नेता शादीशुदा है, अगर हां तो शादी से बाहर संबंध बनाने का जुर्म उसने किया है, उसके लिए जांच के बाद सजा होनी चाहिए।

हर पत्रकार की गिरफ़्तारी प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला नहीं है। पत्रकारों की ये जमात जिसके पुरोधा आज से लेकर अगले दो-तीन दिन तक कॉलम, ट्वीट और पोस्ट के ज़रिए बेकार के प्रयत्न में ये साबित करने की कोशिश करेंगे कि विनोद वर्मा का अरेस्ट होना प्रेस की स्वतंत्रता पर अनकहा दबाव है, वो अपनी इन कोशिशों में कितने सेलेक्टिव होते हैं ये दिखता रहता है।

गौरी लंकेश की हत्या के बाद एक और पत्रकार की हत्या हुई, और उससे पहले बाईस और की। न तो उससे पहले कोई कॉलम लिखा गया, सभा आयोजित हुई न ही उसके बाद। तरुण तेजपाल मामले में ये कहा गया मीडिया ट्रायल नहीं होना चाहिए, लेकिन बाकी हर जगह ये खुद ही बिना सबूत और तर्क के सजा सुना देते हैं।

कुछ दिन पहले भी इसी तरह राया सरकार नाम की लड़की के द्वारा कम से कम 57 विश्वविद्यालयों में कार्यरत पुरुषों की लिस्ट एक फेसबुक पर जारी कर दी गई जो, राया के अनुसार, सेक्सुअल हरासमेंट के आरोपी हैं, जिससे इस जमात में खलबली मच गई। इन्हें स्टेटमेंट देना पड़ गया कि 'किसी का भी नाम बिना किसी प्रूफ़ के क्यों दिया जा रहा है'। स्टेटमेंट बहुत लम्बा था। तो उसी तर्क के ज़रिए, विनोद वर्मा को सरकार ने सजा तो नहीं दी है ना, उसे गिरफ़्तार किया गया है, जांच होगी और जो सच होगा निकल आएगा।

ये एक प्रक्रिया है, होने दीजिए। क्या इससे उनका रुतबा और चरित्र खराब हो रहा है? शायद नहीं, क्योंकि उन्होंने खुद ही बयान दिया है कि उनके पास सीडी है। पत्रकारों का काम ख़बरें पहुंचाना है, पक्ष लेकर किसी अजेंडा को आगे ढकेलना नहीं। पत्रकार हमेशा ही सरकारों की ग़लतियों, नाकामियों, घोटालों को उजागर करते रहे हैं। लेकिन आज के दौर में पत्रकार फिरौती मांगकर ख़बरों को छापता भी है, छुपाता भी है। आजकल कई पत्रकार इसे एक धंधा बनाकर चल रहे हैं।

अंततः, किसी पत्रकार के पास किसी नेता की सेक्स सीडी क्यों है, ये अभी भी मेरी समझ से परे है। इससे समाज को किस तरह की दिशा मिल जाएगी, मुझे नहीं पता। ये सारी ख़बरें, चाहे वो अभिषेक मनु सिंघवी की हो, या किसी और नेता की, सिर्फ छवि खराब करने के उद्देश्य से बनाई जाती हैं। इसी में आम आदमी पार्टी वाला कांड भी याद आता है, लेकिन वहां बाद में पता चला कि उसे नेता जी राशन कार्ड दे रहे थे, जो कि क़ानूनन गलत है। मेरा ये कहना है कि नेताजी की सीडी की भी जांच होनी चाहिए कि क्या वो भी किसी का राशन कार्ड बना रहे हैं, या फिर ये एक निजी व्यभिचार था जिसकी किसी ने सीडी बना ली।

जो भी हो, एक पत्रकार के पास वो सीडी क्यों है; उसकी हजारों प्रतियां क्यों बनवाई गईं; कितने दिनों से है; और उससे संबंधित किस ख़बर पर कार्य हो रहा था; ये सब भी पब्लिक डोमेन में आना चाहिए।

 

समाचार4मीडिया.कॉम देश के प्रतिष्ठित और नं.मीडियापोर्टल exchange4media.com की हिंदी वेबसाइट है। समाचार4मीडिया में हम अपकी राय और सुझावों की कद्र करते हैं। आप अपनी रायसुझाव और ख़बरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। आप हमें हमारे फेसबुक पेज पर भी फॉलो कर सकते हैं।



Copyright © 2017 samachar4media.com