चैनल के खिलाफ डीएम ने कराया मुकदमा, एडिटर ने बताया 'अघोषित आपातकाल'

Monday, 30 April, 2018

समाचार4मी‍डिया ब्यूरो ।।

समाचार चैनल 'समाचार प्‍लस' और 'न्‍यूज वन इंडिया'के खिलाफ गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की ओर से सिहानी गेट थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। जीडीए में घोटाले और घूसखोरी की खबर चलाने पर दोनों चैनलों के खिलाफ झूठी खबर प्रसारित करने के आरोप में यह रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। जीडीए के एग्जिक्‍यूटिव इंजीनियर आरपी सिंह की ओर से दर्ज कराई रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि दोनों चैनलों ने गलत खबर प्रसारित कर अथॉरिटी को ब्‍लैकमेल करने के साथ ही राज्‍य सरकार और सरकारी अधिकारियों की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि गाजियाबाद की जिलाधिकारी और गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की उपाध्‍यक्ष रितु माहेश्‍वरी पर लगाए गए  दो करोड़ रुपये की रिश्‍वत मांगने के आरोपों को लेकर दोनों चैनलों द्वारा एक पक्षीय खबर प्रसारित की गई है। हालांकि, दोनों चैनलों ने इन आरोपों से इनकार किया है। दोनों चैनलों का कहना है कि उन्‍होंने इस मामले में रितु माहेश्‍वरी से संपर्क करने का प्रयास किया था लेकिन उस समय उनका पक्ष नहीं मिल पाया था।

दरअसल, पिछले दिनों गाजियाबाद के बिल्‍डर त्रिलोक अग्रवाल ने जीडीए उपाध्‍यक्ष पर तमाम आरोप लगाए थे। शासन को लिखे पत्र में त्रिलोक अग्रवाल का कहना था कि उनकी बिल्डिंग को सीलिंग से बचाने के लिए जीडीए वीसी ने उनसे दो करोड़ रुपए देने को कहा। त्रिलोक अग्रवाल नीतिश्री बिल्डर अनिल जैन का पार्टनर है। उनका राजनगर एक्सटेंशन में चिमेरा नाम से प्रोजेक्ट चल रहा है। बिल्डर की राजनगर एक्सटेंशन में 48 दुकानें हैं। उन्होंने बताया कि प्रोजेक्ट को सीलिंग से बचाने के उन्होंने जीडीए सचिव और जीडीए के प्रवर्तन विभाग को 50-50 लाख रुपए दिए।

उन्होंने सीएम योगी आदित्यनाथ और पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अवगत कराया कि किस तरह डीएम ने गलत तरीके से राजस्व को 3 करोड़ की चपत लगाई है। उन्होंने कहा कि पैसे देकर जो दुकानों के नक्श पास कराए गएउन्हें नियमों के तहत अगर गिराई जाती है तो उन्हें आपत्ति नहीं है लेकिन उनके पैसे वापस मिलने चाहिए।

इस मामले में गाजियाबाद के वरिष्‍ठ पुलिस अधीक्षक वैभव कृष्‍ण का कहना है कि दोनों चैनलों के स्‍थानीय संवाददाताओं और चीफ एडिटर्स के खिलाफ सिहानी गेट पुलिस स्‍टेशन में आईपीसी की विभिन्‍न धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। वहीं, रितु माहेश्‍वरी का कहना है कि दोनों चैनलों ने यह न्‍यूज प्रसारित कर उन्‍हें मानसिक रूप से ब्‍लैकमेल किया और यह एक आपराधिक कृत्‍य है, इसलिए यह रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।  

'समाचार प्‍लस' चैनल के एग्जिक्‍यूटिव एडिटर प्रवीन साहनी का कहना है कि उन्‍होंने यह स्‍टोरी पीडि़त के आरोपों के आधार पर चलाई थी। हालांकि इस मामले में रितु माहेश्‍वरी का पक्ष जानने का प्रयास भी किया था लेकिन उन्‍होंने कॉल रिसीव नहीं की थी। साहनी के अनुसार, स्‍टोरी में यह भी बताया गया है कि मामले की शिकायत प्रधानमंत्री और मुख्‍यमंत्री से भी की गई है। उन्होंने कहा कि जिस तरह हम पर गुंडा एक्ट और सरकारी कार्य में बाधा डालने के अर्नगल आरोप लगाए गए है, वें उत्तर प्रदेश में प्रेस पर किस तरह अघोषित सेंसरशिप लगाई जा रही है, इसका उदाहरण है।

वहीं, 'न्‍यूज वन इंडिया' के एडिटर-इन-चीफ अनुराग चड्ढा का कहना है कि चैनल द्वारा चलाई गई स्‍टोरी न झूठी थी और न ही किसी तरह की गपशप थी, बल्कि यह पीडि़त की शिकायत के आधार पर थी।

वहीं इस मसले पर गाजियाबाद के मीडिया सेन्टर में सोमवार को श्रमजीवी पत्रकार संघ की आहूत बैठक में न्यूज चैनल समाचार प्लस और न्यूज वन इंडिया पर जिलाधिकारी रितु महेश्वरी की ओर से दायर कराई गई एफआईआर पर कड़ी आपत्ति दर्ज की गई। पत्रकारों ने इसे पत्रकार जगत पर हमला और बड़ी चुनौती करार देते हुए निर्णायक आंदोलन करने का निर्णय लिया। इलेक्ट्रॉनिक और प्रिन्ट मीडिया के पत्रकारों ने एकस्वर में कहा कि डीएम ने दो चैनलों पर जिस तरह फर्जी धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई है, स्पष्ट होता है कि डीएम पत्रकारों को दबाव में लेकर प्रशासन और जीडीए चलाना चाहती हैं, जो मीडिया जगत स्वीकार नहीं करेगा। बैठक में कहा गया कि एक बिल्डर के आरोपों को दोनों चैनलों ने प्रसारित कर कोई गुनाह नहीं किया है। दोनों चैनलों की ओर से खबर प्रसारित करते समय डएम रितु महेश्वरी को कई बार फोन कर उनसे उनका पक्ष जानने की कोशिश की, लेकिन उनकी ओर से फोन रिसीव नहीं किया गया। आखिर उनका पक्ष आने तक खबर को रोकना किसी सूरत में न संभव था और न जायज, लिहाजा न्यूज चैनलों ने कोई गलती नहीं की। मीडिया का धर्म ही है कि पीड़ित की पीड़ा को सामने रखना और ताकतवर को आईना दिखाना।

बैठक में श्रमजीवी पत्रकार संघ, गाजियाबाद के महासचिव अजय औदीच्य ने कहा कि न्यूज चैनलों पर दर्ज कराई गई एफआईआर में डीएम की ओर से देशद्रोह की धारा भी लगाई गई है। स्पष्ट है कि प्रशासनिक अधिकारी खुद को कानून से ऊपर और मीडिया को गुलाम दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। पत्रकारों ने तय किया कि प्रशासनिक भ्रष्टाचार की खबरों को वे और मुखर होकर प्रसारित करेंगे। प्रशासन को समझना होगा कि पत्रकार उनके ही नहीं, जनता के पहले प्रतिनिधि हैं। खबरों को आईने की तरह सामने रखना ही उनका पेशा भी है और धर्म भी।

बैठक में तय किया गया कि मंगलवार को दोपहर साढ़े 11 बजे मीडिया सेन्टर पर एकत्र होकर वे मेरठ मंडल के आयुक्त को ज्ञापन देंगे, जिसमें चेतावनी दी जाएगी कि 48 घंटे के भीतर यदि डीएम ने अपनी एफआईआर वापस नहीं ली तो जिले भर के पत्रकार सामूहिक गिरफ्तारी देंगे। इसके साथ ही निर्णायक आंदोलन छेड़ा जाएगा और जब तक एफआईआर वापस नहीं होगी, आंदोलन को विस्तार दिया जाता रहेगा। बैठक में इलैक्ट्रॉनिक और प्रिन्ट मीडिया के तकरीबन सौ पत्रकारों ने हिस्सा लिया। सभी पत्रकार बंधुओं से अपील है कि वे मंगलवार को दोपहर साढ़े 11 बजे मीडिया सेन्टर पर एकत्र होकर अपनी शक्ति का परिचय दें। 

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