वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार गीताश्री के पहले उपन्यास के बारे में पढ़ें यहां...

वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार गीताश्री के पहले उपन्यास के बारे में पढ़ें यहां...

Wednesday, 08 November, 2017


वरिष्ठ पत्रकार गीताश्री के पहले उपन्यास ‘हसीनाबाद’ का कवर लॉन्च लखनऊ में दैनिक जागरण समूह द्वारा आयोजित ‘जागरण संवादी’ के मंच पर हुआ।
दो दशक से अधिक समय तक  सक्रिय पत्रकारिता के बाद फ़िलहाल स्वतंत्र पत्रकारिता और साहित्य लेखन गीताश्री वर्ष 2008-09 में पत्रकारिता का सर्वोच्च पुरस्कार रामनाथ गोयनका, बेस्ट हिंदी जर्नलिस्ट ऑफ द इयर समेत अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित हो चुकी है। राष्ट्रीय स्तर के पांच मीडिया फैलोशिप और उसके तहत विभिन्न सामाजिक सांस्कृतिक विषयो पर गहन शोध. कथा साहित्य के लिए इला त्रिवेणी सम्मान-2013 सृजनगाथा अंतराष्ट्रीय सम्मान भारतेंदु हरिश्चंद्र सम्मान, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए बिहार सरकार की तरफ से बिहार गौरव सम्मान-2015 से सम्मानित गीताश्री का पहला उपन्यास ‘हसीनाबाद’ वाणी प्रकाशन द्वारा प्रकाशित किया जा रहा है।
ये उपन्यास जल्द ही पाठकों के पढ़ने के लिए उपलब्ध होगा, लेकित तब तक इस उपन्यास के बारे हम आपको कुछ-कुछ बता सकते हैं...

 हसीनाबाद था। लेकिन नहीं था। ठाकुरों की ऐशगाह। हँसती गाती, रोती बेचैन त़पती हसीनाओं का ज़िन्दा जहान लेकिन लेकिन कहीं किसी नक़्शे पर उसका नामो-निशान नहीं।
न सही नामो-निशान, दास्तान मौजूद है। मौजूद है उसकी अपनी एक बेटी की ज़िन्दग़ी के बयान मेँ। उसकी प्रतिभा, उसकी कला उसका जनून उसे ले गया दायरों के पार, अपनी असली पहचान के परे, बुलन्दियों के कंगूरे पर जिसके चारो तरफ़ बस खाइयाँ ही खाइयाँ थी।
अनजाने अनचाहे राजनीति के गलियारोँ मेँ घसीट ली गयी ‌सकी ज़िन्दग़ी खाइयोँ पर तनी रस्सियों पर संतुलन साधती, चाहत ‌और नफ़रत, लगाव ‌और अलगाव, मोह और मोहभंग के हिचकोलों में झूलती डगमगाती पहचानती है रिश्तोँ की असलियत, देखती ‌और आंकती है खोये और पाये की कीमत, और अन्तत: कैसे तलाशती है अपना वजूद, खोजती है खुद तक लौटने का रास्ता.
एक बीती और खोई हुई  दुनिया से निकल कर दूसरी नृत्य-गीत-संगीत के लोक और संस्कृति की तेज़ी से लुप्त होती हुई दुनिया को अपने जुनून में खुद जीकर, ज़िन्दा करने की कहानी. 

. हसीनाबाद के नाम से ये भ्रम हो सकता है कि ये उपन्यास स्त्रियों की दशा-दुर्दशा पर केंद्रित है लेकिन नहीं, हसीनाबाद खालिस राजनीतिक उपन्यास है जिसमें इसकी लेखिका औसत को केंद्र में लाने के उपक्रम में विशिष्ट को व्यापक से संबद्ध करती चलती है।
गीताश्री का यह उपन्यास एक गांव की स्त्री के सतह से ऊपर उठने का स्वप्न है। स्त्री को अपनी रचनाओं में सतह से उपर उठाने का स्वप्न देखने की आखें तो कई लेखिकाओं के पास है लेकिन देखे गए स्वप्न को आदर्श और यथार्थ के संतुलन के साथ चरित्रों को मंजिल तक पहुंचाने का हुनर सिर्फ गीताश्री के पास ही दिखाई देता है। इस उपन्यास की नायिका के चरित्र को गढते हुए गीताश्री उसको वैशाली की मशहूर चरित्र आम्रपाली बना देती है, यह रचना कौशल पाठकों को ना केवल चमत्कृत कर सकता है बल्कि आलोचकों के सामने एक चुनौती बनकर भी खड़ा हो सकता है।
हसीनाबाद राजनीति सामंती व्यवस्था की लोक-कला की एक दारुण उपज है जिससे हिंदी उपन्यासों में लोक की वापसी का स्वप्न एकबार फिर से साकार हो उठा है।

 ग्रामीण जीवन में प्राकृतिक सरसता और शहरी जीवन में उत्तर आधुनिकता को अपनी रचनाओं में लगातार पेश कर हिंदी जगत का ध्यान अपनी ओर खींचने वाली गीताश्री का पहला उपन्यास हसीनाबाद ठेठ गंवई परिवेश से उठाया गया एक आधुनिक उपन्यास है। गीताश्री के इस उपन्यास हसीनाबाद की केंद्रीय पात्र गोलमी को पढ़ते हुए पाठकों को सहानुभूति नहीं बल्कि समयानुभूति होती है। गांवों की विपन्नता के बीच गोलमी जिस तरह से राजनीति के शिखर पर पहुंचती है उस यात्रा में लोक अंचल की सांस्कृतिक संपन्नता को उसके तमाम अंतर्विरोधों के साथ पेश कर उसको सार्थकता प्रदान कर देती है।
हसीनाबाद में गोलमी का सपाट और एक रेखीय नहीं है बल्कि वो वक्ररेखीय है जिसमें गोलाइयों के अलावा उचार चढ़ाव भी हैं, राजनीति के घुमावदार रास्ते हैं तो प्रेम की कठिन डगर भी है, संवेदनाओं की उलझने भी हैं। कह सकते हैं कि गीताश्री का ये उपन्यास लोकजीवन की दयनीय महानता की दिलचस्प दास्तां हैं।

गीताश्री की अन्य कृतियाँ -
 प्रार्थना के बाहर और अन्य कहानियां ( कहानी संग्रह, वाणी प्रकाशन)
स्वप्न, साजिश और स्त्री ( कहानी संग्रह, सामयिक प्रकाशन)
औरत की बोली ( स्त्री विमर्श, सामयिक प्रकाशन)
स्त्री आकांक्षा के मानचित्र ( स्त्री विमर्श, सामयिक प्रकाशन)
सपनों की मंडी ( आदिवासी लड़कियों की तस्करी पर आधारित शोध, वाणी प्रकाशन)
डाउनलोड होते हैं सपने ( कहानी संग्रह, शिल्पायन प्रकाशन)
हसीनाबाद ( उपन्यास, शीघ्र प्रकाश्य, वाणी प्रकाशन)

 संपादित कृतियाँ -
नागपाश में स्त्री ( स्त्री विमर्श)
कल के क़लमकार ( बाल कथा)
स्त्री को पुकारते हैं स्वप्न ( कहानी संग्रह )
हिंदी सिनेमा: दुनिया से अलग दुनिया ( सिनेमा)
कथा रंगपूर्वी ( कहानी संग्रह)
तेईस लेखिकाएँ और राजेन्द्र यादव( व्यक्तित्व) 



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