BARC के एकधिकार को खत्म करने की कवायद में जुटी है सरकार!

BARC के एकधिकार को खत्म करने की कवायद में जुटी है सरकार!

Monday, 16 April, 2018

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।


अब आप कौन सा टीवी चैनल देखते हैं और कितनी देर तक देखते हैं, इसकी पूरी जानकारी केंद्र सरकार के पास होगी। दरअसल, यह पता लगाने के लिए सरकार नए सेट-टॉप बॉक्स में चिप लगाने की तैयारी में है। सूचना-प्रसारण मंत्रालय ने टेलिकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी (ट्राई) के पास यह प्रस्ताव भेजा है, जिसमें सेट टॉप बॉक्स में एक नई चिप लगाने के बारे में पूछा गया है।


मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंत्रालय के एक सीनियर अफसर ने बताया कि इसका मकसद हर एक चैनल के लिए दर्शकों के ज्यादा विश्वसनीयआंकड़े (व्युअरशिप डेटा) एकत्रित करना है। इससे विज्ञापनदाता और डीएवीपी अपने विज्ञापनों पर सोच-समझकर खर्च कर सकेंगे। केवल उन्हीं चैनलों को प्रचार मिलेगा, जो व्यापक तौर पर देखे जाते हैं।’ 


बता दें कि डीएवीपी विभिन्न मंत्रालयों और इनके संगठनों के विज्ञापन जारी करने के लिए सरकार की नोडल एजेंसी है। नए प्रस्ताव में, मंत्रालय ने ट्राई के चेयरमैन आरएस शर्मा से कहा है, ‘प्रस्ताव यह है कि डीटीएच ऑपरेटरों से नए सेट टॉप बॉक्स में चिप लगाने के लिए कहा जाएगा, यह चिप देखे जाने वाले चैनलों और उन्हें देखने समय के बारे में आंकड़े देगी।यह प्रस्ताव डीटीएच लाइसेंस से जुड़े कई मुद्दों पर ट्राई की ओर से दी गई सिफारिशों पर मंत्रालय की प्रतिक्रिया का हिस्सा था।


हालांकि, हाल ही में भेजे गए जवाब में ट्राई ने कहा कि सेट-टॉप बॉक्स में चिप लगाने के मसले पर मंत्रालय को अलग से रेफरेंस भेजना होगा।


वैसे, सरकार का यह कदम ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल इंडिया ऑफ इंडिया (बार्क) का एकाधिकार खत्म करने के तौर पर भी देखा जा रहा है, क्योंकि मौजूदा समय में कौन किस चैनल को देख रहा है, इसका डेटा ब्रॉडकास्ट ऑडिएंस रिसर्च काउंसिल (बीएआरसी) रखता था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मंत्रालय को ऐसा लगता है कि दूरदर्शन की व्युअरशिप कम करके बताई जाती है और चिप लगाए जाने के बाद चैनल के असल व्युअरशिप आंकड़ों की जानकारी मिल सकेगी।


स्मृति ईरानी के मंत्रालय से जुड़े एक सीनियर अफसर ने मीडिया को बताया कि फिलहाल बार्क का एक तरह से कोई विकल्प नहीं है। वह यह नहीं बताता है कि व्युअरशिप के आंकड़े उसने कैसे जुटाए, उसकी प्रक्रिया क्या है और सर्वे का इलाका कौन सा है, लेकिन अब इस तरह से मंत्रालय अपने आंकड़े जुटाकर बार्क के आंकड़ों से तुलना कर यह पता लगा पाएगा कि उसके आंकड़े कितने वास्तविक हैं।


अधिकारी के मुताबिक, मंत्रालय ने बार्क के आंकड़ों को जांचने के लिए 300 मीटरों को भी खरीदने पर विचार किया था, लेकिन इतने कम मीटर लगाना नाकाफी समझा। अधिकारी ने बताया कि बार्क ने लोगों के टीवी देखने के आंकड़े बटोरने के लिए करीब 30 हजार मीटर टीवी सेट्स के मदरबोर्ड में लगवाए हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी शख्स नहीं चाहेगा कि उसकी टीवी में इस तरह की चीजें की जाएं।


हालांकि बार्क ने आरोपों का खंडन किया है और कहा है कि वह संयुक्त इंडस्ट्री बॉडी है जिसका गठन स्टेक होल्डर्स, सरकार के प्रतिनिधियों और ट्राई से सलाह-मश्विरा करके किया गया है। बार्क ने इस मामले से जुड़ी सभी जानकारियां उसकी वेबसाइट पर उपलब्ध होने की बात कही है।


बता दें कि मौजूदा समय कौन किस चैनल को देख रहा है, इसका डेटा ब्रॉडकास्ट ऑडिएंस रिसर्च काउंसिल (बार्क) रखता है। अभी तक बार्क ने 22,000 घरों में बीएआर-ओ मीटर लगाए हैं, जिसके जरिए वह टीआरपी के बारे में आंकड़े एकत्र करता है, जबकि नई चिप लगने के बाद इस मीटर की जरूरत नहीं पड़ेगी। बता दें कि बार्क इन मीटर को ग्राहक की मंजूरी के बाद उनके घरों में लगाती है।

 

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