'प्रसार भारती' के ऑडिट मामले में सरकार ने फिर उठाया ये कदम 'प्रसार भारती' के ऑडिट मामले में सरकार ने फिर उठाया ये कदम

'प्रसार भारती' के ऑडिट मामले में सरकार ने फिर उठाया ये कदम

Saturday, 02 June, 2018

समाचार4मी‍डिया ब्यूरो ।।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तहत काम करने वाली ‘ब्रॉडकास्‍ट इंजीनियरिंग कंसल्‍टेंट्स इंडिया लिमिटेड’ (Becil) ने ‘प्रसार भारती’ में मैनपॉवर आडिट के लिए निजी एजेंसी की तलाश फिर शुरू कर दी है। इसके लिए दोबारा से टेंडर जारी किए गए हैं। दरअसल, 'Becil' ऐसी एजेंसी के चयन की प्रक्रिया में जुटी है जो वैज्ञानिक व तर्कसंगत तरीके से प्रसार भारती में कर्मचारियों का ऑडिट कर सके।

अंग्रेजी अखबार 'द इकनॉमिक टाइम्‍स' में छपी वरिष्‍ठ पत्रकार वसुधा वेणुगोपाल की रिपोर्ट के अनुसार'Becil' की ओर से जारी नोटिस में कंपनियों को 26 जून से पहले अपने आवेदन जमा करने के लिए कहा गया है। नोटिस में यह भी कहा गया है कि सफल बोलीदाता को मैनपॉवर ऑडिट के लिए प्रसार भारती व इसकी इकाइयों से बातचीत के लिए नोडल अधिकारी नियुक्‍त करना होगा। इसके अलावा इस दिशा में काम कर रहीं टीमों की प्रगति पर सतत निगरानी भी रखनी होगी।

एजेंसी को एक एचआर पॉलिसी भी तैयार करनी होगी जो विभिन्‍न कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच करेगी। इसके अलावा उन पदों के बारे में भी रिपोर्ट तैयार करेगी जिनकी नई टेक्‍नोलॉजी (जैसे- रेडियो में एनॉलॉग से डिजिटल, आउटसोर्सिंग आदि) आने के बाद आवश्‍यकता नहीं है।

अधिकारियों का कहना है कि ऐसा ही टेंडर कुछ महीने पहले भी जारी किया गया था लेकिन इनमें से बहुत सारे आवेदकों के कौशल में कमी मिली थी, जो 16 महीने लंबी ऑडिट प्रकिया के लिए बहुत जरूरी है। 

वर्ष 2013 में जब प्रसार भारती ने संगठन को कम करने का प्रयास किया था उस समय बड़े कंसल्‍टेंट जैसे 'PWC', 'Boston Consulting Group' और 'E&Y' ने अप्‍लाई किया था। हालांकि प्रसार भारती के कर्मियों में कटौती की यह कवायद पूर्व में परवान नहीं चढ़ी थी। प्रसार भारती काफी समय से अपने कर्मचारियों में कटौती का प्रयास कर रहा है। हालांकि पूर्व सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्‍मृति ईरानी ने  प्रसार भारती से गैरजरूरी खर्चों में कटौती लाने को कहा था। पिछले दिनों सूचना एवं प्रसारण मंत्री राज्‍यवर्धन सिंह राठौड़ ने भी प्रसार भारती की स्‍वायत्‍ता से छेड़छाड़ किए बिना कर्मचारियों को सैलरी पर होने वाले खर्च के बारे में मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र का मुद्दा उठाया था।

गौरतलब है कि सैम पित्रोदा कमेटी ने प्रसार भारती मामले में जनवरी 2014 में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि अन्‍य देशों के पब्लिक ब्रॉडकास्‍टर्स की तुलना में यहां पर वर्कफोर्स काफी ज्‍यादा है। इसके अलावा प्रसार भारती में मैन पॉवर का ऑडिट कराने की सिफारिश भी की गई थीताकि पता चल सके कि यहां पर स्‍टाफ की क्‍या स्थिति और कितने स्‍टाफ की जरूरत है।

 


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