उदय शंकर को पहचानने में मुझसे चूक हुई: अरुण पुरी, चेयरमैन, इंडिया टुडे ग्रुप

उदय शंकर को पहचानने में मुझसे चूक हुई: अरुण पुरी, चेयरमैन, इंडिया टुडे ग्रुप

Tuesday, 04 July, 2017

अरुण पुरी

चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ

इंडिया टुडे ग्रुप ।।

मुझे अपनी इस खूबी पर काफी गर्व है कि मैं टैलेंट को बहुत अच्‍छे से पहचान लेता हूं। हमारे न्‍यूजरूम में अक्‍सर यह चुटकुला बोला जाता है कि हम खुद से मुकाबले के लिए एडिटर्स तैयार करते हैं।

उदय शंकर वाले मामले को देखें तो यहां कुछ अलग हो गया। 

उदय शंकर ने मेरे साथ लगभग पांच साल तक टीवी टुडेमें बतौर मैनेजिंग एडिटर काम किया। वह ऐसे पत्रकार थे, जिनके अंदर गजब का न्‍यूज सेंस था, जेएनयू बैकग्राउंड से आए उदय किसी भी स्‍टोरी को ऐसी प्रासंगिक बनाकर पेश करते थे कि सामान्‍य दर्शक भी उस स्‍टोरी से खुद जुड़ जाता था।

जब हमने आज तकलॉन्‍च किया था तब उदय हमारे साथ ही थे और उनके नेतृत्‍व में ही इस चैनल ने अपनी सफलता का काफी लंबा सफर तय किया था। दरअसल, उदय ने सही मायने में हिन्‍दी चैनलों को न्‍यूज कवर करना सिखाया। वह न्‍यूज को स्‍टूडियो से निकालकर गलियों से लेकर गरीब लोगों तक ले गए और उन्‍हें अपने साथ जोड़ा। वर्ष 2001 में गुजरात में आए विनाशकारी भूकंप और कुंभ मेला की आज तककी बेहतरीन कवरेज मुझे अभी तक याद है, जिसके बाद उन्‍होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।  

उदय के अंदर न्‍यूज के लिए जबरदस्‍त पैशन था और उस पर वह तुरंत प्रतिक्रिया व्‍यक्‍त करते थे। मैं नोटिस करता था कि न्‍यूज की आपाधापी में वह कैसे अपनी टीम का नेतृत्‍व करने के लिए तेजी से सक्रिय हो जाते थे। मैंने उन्‍हें आईआईएम अहमदाबाद में एडिमिनिस्‍ट्रेशन और फाइनेंस का क्रैश कोर्स करने के लिए भेजा था। उन्‍हें तो देश का सबसे तेजी से सीखने वाला विद्यार्थी होना चाहिए। आज देखो वह कहां है।

उदय मुझसे कहते थे कि वह नौकरी में तीन साल से ज्‍यादा नहीं रह सकते हैं क्‍योंकि वह बोर हो जाते हैं। उन्‍होंने मेरे साथ इतना लंबा सफर तय किया और फिर अपना खुद का दायरा काफी बढ़ा लिया। वह समय आज तकके लिए काफी अच्‍छा था। मैंने उदय के साथ मिलकर काफी काम किया। उनके साथ काम करके मैं खुद को काफी फ्री महसूस करता था क्‍योंकि वह न्‍यूज के लिए काफी जुनूनी रहते थे।  

जब उदय ने हमारा साथ छोड़ा तो मैंने सोचा कि एक न्‍यूज चैनल में मैनेजिंग एडिटर की 24x7 की नौकरी के कारण ही उन्‍होंने हमें छोड़ा और वह इससे दूर होकर फ्रीलॉन्‍स अथवा शिक्षण के क्षेत्र में जाना चाहते हैं। लेकिन मैंने उन्‍हें कभी भी कॉरपोरेट की तरह नहीं देखा जो बॉटम लाइन के लिए चिंतित रहते हैं।

मैं उन्‍हें हमेशा जेएनयू का झोलावालाकहता था और उन्‍हें टेलिविजन के बिजनेस पक्ष को लेकर कोई भी दिलचस्‍पी नहीं रहती थी। मुझे लगता था कि न्‍यूज ही उनकी पहली प्राथमिकता थी और मुझे अभी भी लगता है कि न्‍यूज ही उनका पहली पसंद है।    

अब मैं उन्‍हें ऐसे मीडिया मुगल के रूप में देखता हूं जो मीडिया के जटिल मुद्दों जैसे डिस्‍ट्रीब्‍यूशन, ऐडवर्टाइजिंग रेट्स, फाइनेंस, सोप ओपेरा और मीडिया पॉलिसी से डील करते हैं, जिनका न्‍यूज से ज्‍यादा वास्‍ता नहीं है। मुझे उदय शंकर पर काफी गर्व है।

मुझे नहीं पता था जो व्‍यक्ति न्‍यूज और बौद्धिक मुद्दों में इतनी गहराई तक जुड़ा हुआ है, वह एक दिन ऐंटरटेनमेंट व स्‍पोर्ट्स में देश की सबसे बड़ी मीडिया कंपनी की कमान संभालेगा।

मीडिया मुगल रूपर्ट मर्डोक ने उदय शंकर के अंदर वो टैलेंट देख लिया जो समझने में मैं चूक गया। तब से लेकर अब तक मैं अपने आपको कोस रहा हूं।

 

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