राज्यसभा टीवी के CEO गुरदीप सिंह सप्पल ने उठाया ये बड़ा कदम...

राज्यसभा टीवी के CEO गुरदीप सिंह सप्पल ने उठाया ये बड़ा कदम...

Saturday, 12 August, 2017

राज्यसभा टीवी के सीईओ व एडिटर-इन-चीफ गुरदीप सिंह सप्पल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। साल 2011 में राज्यसभा टीवी लॉन्च होने के बाद से ही सप्पल इस चैनल के सीईओ के पद पर कार्यरत थे। बताया जा रहा है कि जुलाई महीने में उन्होंने इस्तीफा दिया था, जिसके बाद उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया था। वे फिलहाल एक महीने के नोटिस पीरियड पर थे। 

सप्पल ने अपना इस्तीफा स्वीकार होने के बाद फेसबुक पर एक पोस्ट भी लिखी है, जिसमें उन्होंने लिखा, मैं शुक्रगुजार हूं माननीय उपराष्ट्रपति श्री वेंकैय्या नायडू जी का, जिन्होंने मेरा आग्रह मानकर मेरा इस्तीफा स्वीकार किया। उनकी पूरी पोस्ट आप यहां पढ़ सकते हैं-

राज्य सभा टीवी से इस्तीफ़ा

'चलो कि इक उम्र तमाम हुई

उठो कि महफ़िल की शाम हुई

जुड़ेंगे नए रिंद, अब नए साज़ सजेंगे

मिलेंगे उस पार, कि नए ख़्वाब बुनेंगे।'

राज्य सभा टीवी के साथ मेरा रिश्ता आज ख़त्म होता है। लेकिन संतोष है कि जो चैनल हमने सजाया है, उसकी चमक दूर से भी दिखायी देती रहेगी।

आज मुड़ कर देखूं तो एक सुखद अहसास ज़रूर है कि जो ज़िम्मेदारी मजबूरी में स्वीकार की थी, वो कुछ हद तक पूरी हुई। सच कहूं तो ये काम मुश्किल ज़रूर था, लेकिन विश्वास था कि 'अगर अतीत ब्लैकमेल योग्य न हो, आज कोई भय न हो और भविष्य से कोई आरज़ू न हो', तो जीवंत संस्थाएं बनाना सम्भव है।

जब हमने ये चैनल डिज़ाइन किया तो दो टैग लाइन चुनी: Knowledge Channel of India और Democracy at Work. आज छः साल बाद ये एक निर्विवाद सच है कि देशभर में छात्र, प्रशासक, बुद्धिजीवी RSTV देखते हैं। तथ्य तो गूगल सभी दे देता है, लेकिन विश्लेषण, अंत:दृष्टि और हाशिए पर रहे विषयों के लिए राज्य सभा टीवी ने अपनी अलग जगह बनायी है। इसकी डिबेट में सभी राजनैतिक रंग, सभी विचारधाराएं बराबर खिली हैं। शायद, कुछ हद तक ही सही, हम अपनी दोनों टैग लाइन पर खरे ज़रूर उतरे हैं।

मैं जानता हूं कि हमारे कुछ आलोचक, या कहूं कि निंदक भी रहे हैं। लेकिन शायद उनमें से ज़्यादातर हमारा चैनल देखते नहीं थे, क्योंकि उनकी आलोचना के बारे सोचते ही एक शेर बेसाख़्ता याद हो आता था :

'वो बात जिसका सारे फ़साने में ज़िक्र न था,

वो बात उनको बहुत ही नागवार गुज़री ।'

हां, इन्फ़ॉर्म्ड आलोचना को हमने हमेशा स्वीकारा और उस पर अमल किया।

ख़ैर, ये दास्तां बस इतनी ही। मैं शुक्रगुज़ार हूं माननीय उपराष्ट्रपति श्री वेंकैय्या नायडू जी का, जिन्होंने मेरा आग्रह मान कर मेरा इस्तीफ़ा स्वीकार किया।

लोग संस्था को गढ़ते हैं और संस्था लोगों को गढ़ती है ।मैं चैनल के अपने सभी साथियों का धन्यवाद करता हूं, जिन्होंने मेरे साथ मिल कर ये चैनल गढ़ा और उसे ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

और अंत में, धन्यवाद उस शख़्सियत का, जिसकी निस्वार्थ मौजूदगी, बौद्धिक विश्वास और स्वायत्ता में नैसर्गिक यक़ीन RSTV की बुनियाद रहा। शुक्रिया श्री हामिद अंसारी, भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति का। सम्पादक के पद को वे हमेशा एक महत्वपूर्ण संस्था मानते आए हैं और मुझे ख़ुशी है कि मैं उनके विश्वास पर खरा उतर सका ।

मेरी कामना है कि आने वाले दिनों में RSTV यूं ही उत्तरोत्तर तरक़्क़ी के पथ पर आगे बढ़ता रहे।


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