न्‍यूज ब्रॉडकास्‍ट कंपनियों के लिए इस तरह उथल-पुथल भरा रहा FY17 न्‍यूज ब्रॉडकास्‍ट कंपनियों के लिए इस तरह उथल-पुथल भरा रहा FY17

न्‍यूज ब्रॉडकास्‍ट कंपनियों के लिए इस तरह उथल-पुथल भरा रहा FY17

Tuesday, 13 June, 2017

समाचार4मी‍डिया ब्यूरो ।।

देश में सूचीबद्ध (listed) कई न्‍यूज ब्रॉडकास्‍ट कंपनियों के लिए 31 मार्च 2017 को समाप्‍त हुआ वित्‍तीय वर्ष काफी उथल-पुथल भरा रहा। यदि रेवेन्‍यू के दृष्टिकोण से देखें तो या तो कंपनियों की ग्रोथ में कमी आई है अथवा उनकी परफॉर्मेंस में 1से 6 प्रतिशत की मामूली वृद्धि दर्ज की गई है। 

उदाहरण के लिए, ‘CNN-News18और ‘CNBC TV18जैसे बड़े ब्रैंड वाली कंपनी नेटवर्क18’ (Network18) के कुल रेवेन्‍यू में 4.92 प्रतिशत की कमी आई है और पिछले वित्‍तीय वर्ष के 1625.89 करोड़ रुपये के मुकाबले इस वित्‍तीय वर्ष में यह 1545.76 करोड़ रुपये रह गया। एनडीटीवीकी टॉपलाइन में भी 7.2 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली है और यह 577.12 करोड़ रुपये से घटकर 535.21 करोड़ रुपये रह गया है।

दूसरी तरफ, इनके प्रतिद्वंद्वियों की टॉपलाइन में मामूली बढ़त दर्ज की गई है।  जी मीडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड’ (ZMCL) के रेवेन्‍यू में 1.74 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है और यह 561.59 करोड़ रुपये से बढ़कर 571.41  करोड़ रुपये हो गया है। नेटवर्क18की सहायक कंपनी ‘TV18के रेवेन्‍यू में 6.62 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है और यह 959.2 करोड़ रुपये से बढ़कर 1022.7 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। टीवी टुडेकी स्थिति भी सही रही है। टॉपलाइन में 4.71 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ इसका रेवेन्‍यू 602.19 करोड़ रुपये से बढकर 630.57 करोड रुपये हो गया है।

अनुराधा प्रसाद के ‘BAG Films’ की टॉपलाइन में 16.58 की मजबूती हुई और इसका रेवेन्‍यू 117.24 करोड रुपये से बढकर 136.68  करोड रुपये हो गया। दिलचस्‍प बात यह रही कि उपरोक्‍त पांच कंपनियों के अलावा अन्‍य अपनी टॉपलाइन प्रतिशत ग्रोथ में दो अंकों का आंकड़ा हासिल नहीं कर सकीं।

 इस बारे में नेटवर्क18 न्‍यूज मीडिया नेटवर्क के पूर्व सीईओ संजय दुआ का कहना है, ‘मुझे लगता है कि वित्‍तीय परिणाम थोड़े बेहतर यानी आठ से 12 प्रतिशत के बीच होने चाहिए थे।

रेवेन्‍यू घटने के कारणों पर प्रकाश डालते हुए उन्‍होंने कहा कि नोटबंदी (demonetisation) के कारण करीब तीन महीने तक ब्रॉडकास्‍ट बिजनेस काफी प्रभावित हुआ। हालांकि विधानसभा चुनाव के दौरान तीन महीने में मिली सफलता ने इस प्रभाव को शून्‍य कर दिया। फरवरी और मार्च के महीने का हवाला देते हुए दुआ ने कहा कि चैनल वापसी करने में सक्षम है और वित्‍तीय वर्ष 2018 (FY18) की प‍हली तिमाही के दौरान इसके परिणाम नजर आ जाएंगे। 

हालांकि ‘NDTV’ और ‘Network18जैसी कंपनियां न्‍यूज ब्रॉडकास्‍ट के अलावा व्‍यापारिक हितों के कारण एक साथ आती हैं, उनकी टेलिविजन संचालन में लगी हुई लागत चिंता का विषय है। किसी भी कीमत पर खर्चों में कटौती के कारण एनडीटीवीअपने खर्चों में 8.09 प्रतिशत की कटौती यानी करीब 50 करोड़ रुपये बचाने में सफल रहा। कंपनी का कुल खर्च 645.23 करोड़ रुपये से घटकर 593.02 करोड़ रुपये पर आ गया लेकिन ऐसा दूसरों के बारे में नहीं कहा जा सकता है। ‘Network18और ‘TV18दोनों के खर्च में क्रमश: 11.82 और 21.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

‘Network18के खर्च में 189.22 करोड़ और जुड़ने से यह राशि 1599.84 करोड रुपये से बढकर 1789.06 करोड रुपये हो गई। इस मामले में ‘TV18भी ज्‍यादा पीछे नहीं रहा और खर्च में 179.3 करोड रुपये की वृद्धि के साथ यह 847.6 करोड़ रुपये से बढकर 1026.9 करोड़ रुपये हो गया। यहां तक कि ‘BAG Films’ के खर्च में भी 13.12 प्रतिशत की बढोतरी होने से यह 104.11 करोड़ रुपये से बढ़कर 117.74 करोड़ रुपये हो गया। हालांकि ‘ZMCL’ और ‘TV Today’ अपने खर्चों को बेहतर तरीके से व्‍यवस्थित करने में सफल रहे। डॉ. सुभाष चंद्रा के जी मीडियाके खर्च में 1.9 प्रतिशत की मामूली बढ़त हुई और यह 559.49 करोड से बढकर 570.46 करोड रुपये पर पहुंच गई। वहीं, अरुण पुरी के नेतृत्‍व में ‘TV Today Network’ के खर्च में 6.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ यह 457.2 करोड रुपये से बढकर 485.87 करोड रुपये हो गया।

आईपीजी मीडिया ब्रैंड्स’ (IPG Mediabrands) के सीईओ शशि सिन्‍हा का कहना है कि ब्रॉडकास्‍ट कंपनियों पर कैरिज शुल्‍क (carriage fee) लिया जा रहा था। विदेश में ब्रॉडकास्‍ट ईकोसिस्‍टम का उदाहरण देते हुए उन्‍होंने इस बात पर जोर दिया कि दुनिया में कहीं पर भी व्‍यूअर्स तक अपने चैनलों को पहुंचाने के लिए ब्रॉडकास्‍टर्स को इतनी बड़ी रकम खर्च नहीं करनी पड़ती। न्‍यूज ब्रॉडकास्‍टर्स द्वारा एक और चुनौती का सामना किए जाने के बारे में शशि सिन्‍हा ने कहा, ‘हालांकि जनरल ऐंटरटेनमेंट चैनलों (GECs) से सबस्क्रिप्‍शन रेवेन्‍यू मिल रहा है लेकिन न्‍यूज चैनलों के सबस्क्रिप्‍शन से किसी तरह के धन की प्राप्ति नहीं हो रही है।

कैरिज फीस के मुद्दे पर शशि सिन्‍हा द्वारा दिए गए जवाब से इंडसइंड मीडिया एंड कम्‍युनिकेशनके मैनेजिंग डायरेक्‍ट और सीईओ रहे टोनी डिसिल्‍वा ने असहमति जताई हुए कहा कि यह व्‍यवसाय की लागत है।’ 

डीडी फ्री डिशका उदाहरण देते हुए उन्‍होंने बताया कि यह चैनल भी रिजर्व प्राइस वसूलता है। उन्‍होंने कहा कि कई जगहों की तुलना में हमारे देश में ऐडवर्टाइजिंग रेवेन्‍यू काफी ज्‍यादा है। उन्‍होंने इस बात को लेकर ब्रॉडकास्‍टर्स की आलोचना भी की कि वे ऐड और सबस्क्रिप्‍शन रेवेन्‍यू तो लेना चाहते हैं लेकिन फ्री कैरिज की उम्‍मीद भी रखते हैं।

न्‍यूज चैनलों को आर्थिक रूप से लाभकारी बनाने के लिए सबस्क्रिप्‍शन को व्‍यवहारिक बनाने की मांग करते हुए डिसिल्‍वा ने कहा, ‘उन्‍हें अपने ऑपरेशंस की कीमत में कटौती करनी होगी।फिलहाल उन्‍होंने न्‍यूज चैनलों के कंटेंट में कुछ भी ऐसा ए‍क्‍स‍क्‍लूसिव नहीं पाया, जो सबसे बड़ा कारण था कि कंज्‍यूमर इसके लिए भुगतान नहीं करते और इसके प्रति अनिच्‍छा रखते हैं।

डिस्‍ट्रीब्‍यूशन, मैनपॉवर और कंटेंट पर सबसे ज्‍यादा खर्च की बात करते हुए संजय दुआ ने न्‍यूज ब्रॉडकास्‍ट बिजनेस में लगी पूंजी के बारे में जानकारी दी। दुआ ने कहा, ‘यदि आप तीनों इन चीजों पर काम कर रहे हैं तो जरूर कुछ न कुछ होगा।उन्‍होंने कहा कि इलेक्‍शन सीजन के कारण वित्‍तीय वर्ष 2017 (FY17) की चौथी तिमाही पर असर पड़ा, क्‍योंकि इसकी कवरेज के लिए न्‍यूज चैनलों ने इस तिमाही में काफी खर्च किया। पिछले दिनों मल्‍टीपल लॉजिकल चैनल नंबर्स (LCNs) को लेकर हुए विवाद के बारे में उन्‍होंने कहा कि इससे कैरिज फीस बढ़ेगी। दुआ ने कहा, ‘यदि आप अपने चैनल को मल्‍टीपल फ्रीक्‍वेंसी पर रखेंगे तो कीमत स्‍वाभाविक रूप से बढ़ जाएगी।

इस बारे में क्‍लाउडवर्स्‍ट मीडियावर्क्‍सके एडिटर-इन-चीफ और डायरेक्‍टर पंकज पचौरी का कहना है, ‘पिछले पांच साल में देश में न्‍यूज टेलिविजन की पहुंच में 15 प्रतिशत की कमी आई है।हालांकि नए प्‍लेयर्स ने मार्केट में एक साथ प्रवेश किया है और वे भी शुरुआत से ही इन चीजों का सामना कर रहे हैं। पचौरी का मानना है कि इससे कंटेंट संदिग्‍ध और सबस्‍टैंडर्ड का हो गया है, जिसके लिए ऐडवर्टाइजर्स पैसा खर्च करने के लिए तैयार नहीं हैं। उन्‍होंने कहा, ‘न्‍यूज टेलिविजन इंडस्‍ट्री को अपने ऑडियंस से इस तरह जुड़ना होगा जिससे वे कंटेंट के लिए पैसा देने को तैयार हों। हालांकि इससे मीडिया के लिए सिर्फ सबस्क्रिप्‍शन रेवेन्‍यू नहीं बढ़ेगा, बल्कि प्राइवेट कंपनियां भी इससे आकर्षित होंगी और ब्रैंडेंट कंटेंट के लिए पार्टनरशिप करना चाहेंगी। इससे इंडस्‍ट्री की वित्‍तीय स्थिति में सुधार होगा।

पिछले दिनों समाप्‍त हुए वित्‍तीय वर्ष की बात करें तो रेवेन्‍यू और खर्च के अलावा कुछ बड़े न्‍यूज नेटवर्क को प्रॉफिट नहीं हुआ। वित्‍तीय वर्ष 2016 में प्रॉफिट हासिल करने वाला नेटवर्क18को इस वित्‍तीय वर्ष में काफी घाटा हुआ। इसकी सहायक कंपनी टीवी18फायदे में रही लेकिन इसमें 166.6  करोड़ रुपये की कमी देखने को मिली। टीवी 18का प्रॉफिट बिफोर टैक्‍स 198.1 करोड़ रुपये से घटकर सिर्फ 31.5 करोड़ रुपये रह गया।

वहीं, पिछले वित्‍तीय वर्ष में 4.04 करोड़ रुपये का नुकसान झेलने वाली ‘ZMCL’ को इस वित्‍तीय वर्ष में 20.91 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। हालांकि एनडीटीवीको नुकसान में कुछ राहत मिली और यह 68.11 करोड़ रुपये से घटकर 65.21 करोड़ रुपये रह गया।

सौभाग्‍य से टीवी टुडेके प्रॉफिट में 38.57 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई और यह 114.68  करोड रुपये से बढकर 153.25 करोड़ रुपये हो गया। हालांकि ‘BAG Films’ वित्‍तीय वर्ष 2016 में 50 लाख रुपये से अधिक नुकसान हुआ था, लेकिन वित्‍तीय वर्ष 2017 में इसे 3.52 करोड़ रुपये का फायदा हुआ है। 

इस बारे में प्रसार भारती के पूर्व सीईओ जवाहर सरकार का कहना है, ‘लगभग सभी आर्थिक मोर्चे पर खराब हालात से गुजर रहे हैं। एनडीटीवी को लंबे समय से नुकसान हो रहा है, वहीं मार्केट में चर्चा है कि टाइम्‍स नाउभी इसी रास्‍ते पर चल रहा है। हालांकि वह सूचीबद्ध इकाई नहीं है।

उनका कहना है, ‘इंग्लिश न्‍यूज मीडिया का दर्शक वर्ग ज्‍यादा नहीं है और सिर्फ 0.01-0.02% लोग ही इसे देखते हैं।जैसे कि उन्‍होंने संकेत दिए थे कि रिलांयसद्वारा नेटवर्क18को टेकओवर करने के बाद न्‍यूज मीडिया में बड़ी पूंजी आएगी, उन्‍होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इंग्लिश न्‍यूज ब्रॉकाडस्‍ट अच्‍छे वित्‍तीय संसाधनों के साथ बड़े मनी प्‍लेयर बन जाएंगे। इस बीच, संजय दुआ ने स्‍वीकार किया कि न्‍यूज को अभी भी उतना रेवेन्‍यू नहीं मिल पा रहा है। इंग्लिश टेलिविजन की बात करें तो वहां भी स्थिति बहुत अच्‍छी नहीं है, डिजिटल ठीक चल रहा है।

वहीं डेंट्सू एजिस नेटवर्क (साउथ एशिया)के चेयरमैन और सीईओ आशीष भसीन का मानना है कि मार्केट का साइज सीमित है, जो बड़ा मुद्दा है। उन्‍होंने कहा, ‘मैं मानता हूं कि इस समय मार्केट में विभिन्‍न जॉनर्स में ढेरों प्‍लेयर्स हैं, जिनमें न्‍यूज भी शामिल है। चूंकि मार्केट सीमित है इसलिए इतने न्‍यूज चैनलों के लिए ज्‍यादा जगह नहीं है।उन्‍होंने कहा कि मार्केट इस समय एकीकरण की ओर बढ़ रहा है।

भसीन के अनुसार, ‘इसका मतलब है कि तीन-चार बड़े प्‍लेयर्स या तो अधिग्रहण अथवा विलय में जुटे हुए हैं। पांच साल के अंदर काफी परिवर्तनकारी प्रक्रिया देखने को मिलेगी।



समाचार4मीडिया.कॉम देश के प्रतिष्ठित और नं.1 मीडियापोर्टल exchange4media.com की हिंदी वेबसाइट है। समाचार4मीडिया में हम अपकी राय और सुझावों की कद्र करते हैं। आप अपनी राय, सुझाव और ख़बरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। आप हमें हमारे फेसबुक पेज पर भी फॉलो कर सकते हैं।



पोल

गौरी लंकेश की हत्या के बाद आयोजित विरोधसभा के मंच पर नेताओ का आना क्या ठीक है?

हां

नहीं

पता नहीं

Copyright © 2017 samachar4media.com