जानें, विज्ञापन पर एक रुपया भी न खर्च कर कैसे यह ब्रैंड बन गया नंबर वन

जानें, विज्ञापन पर एक रुपया भी न खर्च कर कैसे यह ब्रैंड बन गया नंबर वन

Friday, 12 January, 2018

रुहैल अमीन ।।

शराब कारोबार के लिए दशकों से भारत एक मजबूत बाजार रहा है। मार्केट में आज कई घरेलू ब्रैंड की मौजूदगी के बीच ओल्‍ड मॉन्‍क‘ (Old Monk) रम ने अपनी अच्‍छी पकड़ बना रखी है और मजबूती से खड़ा हुआ है।

ओल्‍ड मॉन्‍कको अपने खास प्रॉडक्‍ट डिजाइन और बेहतरीन टेस्‍ट के लिए जाना जाता है और इसी वजह से यह दुनियाभर में डार्क रम के रूप में सबसे ज्‍यादा पसंद की जाती है।

Old Monk’ बनाने वाली कंपनी मोहन मीकिंग के पूर्व मैनेजिंग डायरेक्‍टर कपिल मोहन का पिछले दिनों 88 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। कपिल मोहन ने 1970 के दशक में कंपनी को एक नई ऊंचार्इ पर पहुंचाया था और इसे बहुआयामी व्‍यापारिक घराने के रूप में स्‍थापित किया था, जिसका टर्नओवर 400 करोड़ रुपये से ज्‍यादा था।   

खास बात तो यह है कि ओल्‍ड मॉन्‍कने अपने प्रचार के लिए कभी विज्ञापन का सहारा नहीं लिया क्‍योंकि कपिल मोहन का मानना था कि ओल्‍ड मॉन्‍क का स्‍वाद ही इसका सबसे बेहतर एडवर्टाइजमेंट है। वर्ष 2012 में एक बार किसी इंटरव्‍यू में कपिल मोहन ने कहा भी था, ‘हम कभी विज्ञापन नहीं करते, जब तक मैं इस कुर्सी पर हूं, मैं ओल्‍ड मॉन्‍क का विज्ञापन नहीं करूंगा।’   

इसमें कोई शक नहीं है कि वर्ष 2002 तक मार्केट में ओल्‍ड मॉन्‍क निर्विवाद रूप से ब्रैंड लीडर था और यह जलवा सिर्फ रम में ही नहीं बल्कि देश के पूरे शराब मार्केट में कायम था। इसके अलावा यह कई वर्षों तक सबसे बड़ी भारत निर्मित विदेशी शराब (largest Indian Made Foreign Liquor) थी।

अब ऐसे में यह सवाल उठता है कि आखिर वे कौन सी चीज अथवा कारण थे, जिसकी वजह से ओल्‍ड मॉन्‍कइतना बड़ा ब्रैंड बन गया ?

Motivator’(Group M Media India Pvt. Ltd) के मैनेजिंग डायरेक्‍टर राबे अय्यर (Rabe Iyer) का कहना है, ‘मुझे लगता है कि इसके पीछे कई कारक हैं, जिनमें ब्रैंड की पहचान, आकर्षक बोतल और इसके स्‍वाद ने ओल्‍ड मॉन्‍क को इस ऊंचाई तक पहुंचाने में काफी मदद की। इसके अलावा, समय-समय पर लोगो, पैकेजिंग और फॉन्‍ट में भी आवश्‍यक बदलाव किए गए, जिससे भी इसे मार्केट में बने रहने में काफी मदद मिली। हालांकि अब यह मार्केट में आसानी से उपलब्‍ध है लेकिन कई वर्षों तक यह सिर्फ मिलिट्री कैंटीन में ही मिलती थी, इसलिए इस पर कथित रूप से ऑरिजिनलका ठप्‍पा भी लगा था, जिससे भी इसकी लोकप्रियता काफी बढ़ी और यह मजबूत ब्रैंड बन गई।

ओल्‍ड मॉन्‍कको बहुत बड़ा ब्रैंड बताते हुए ‘Havas Media Group India’ के मैनेजिंग डायरेक्‍टर मोहित जोशी ने कहा, ‘यह अपने आप में बहुत बड़ा ब्रैंड है। इसकी यूनिक बोतल, स्‍वाद और खुशबू यादों को जीवंत कर देती है।

पब्लिक रिलेशंस, डिजिटल व पॉलिटिकल कम्‍युनिकेशन कंसल्‍टेंट अनूप शर्मा के अनुसार, ‘यह सिर्फ एक ब्रैंड नहीं है, बल्कि यह लोगों की यादों का हिस्‍सा है। कॉलेज जीवन से लेकर पहली नौकरी की खुशी में यह कई लोगों की पहली पसंद थी। यह इस ब्रैंड की लोकप्रियता ही थी कि बार में कई महंगी शराब के बीच इसे स्‍थान मिलता था।

भारतीय व्यवसाय में उल्‍लेखनीय योगदान के लिए कपिल मोहन को वर्ष 2010 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया। खास बात यह है कि कपिल मोहन के जिस ब्रैंड ओल्‍ड मॉन्‍ककी दुनिया दीवानी थी, उन्‍होंने कभी शराब नहीं पी।

राबे अय्यर ने इस ब्रैंड को सफलता की ऊंचाइयों तक ले जाने वाले कपिल मोहन को इन शब्‍दों के साथ अपनी श्रद्धांजलि दी है।

“The soldiers braved the weather’s might,

Keeping the border safe and tight,

Tin, mug or anything that could hold The Old Monk nice,

Blushed the soldiers out of the harsher night.

Topped with a little water or Thumbs Up with or without Ice,

Stole the thunder, rushing their enemies Out of sight.”

 

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