ब्रॉडकास्टर्स और सूचना-प्रसारण मंत्री के बीच बैठक में टीवी स्क्रीन पर चल रही खबर पर हुई चर्चा ब्रॉडकास्टर्स और सूचना-प्रसारण मंत्री के बीच बैठक में टीवी स्क्रीन पर चल रही खबर पर हुई चर्चा

ब्रॉडकास्टर्स और सूचना-प्रसारण मंत्री के बीच बैठक में टीवी स्क्रीन पर चल रही खबर पर हुई चर्चा

Wednesday, 30 August, 2017

सैफ अहमद खान ।।

डेरा सच्‍चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम के मामले को लेकर पंचकूला में शुक्रवार को जब हिंसा हुई थी, तब सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्‍मृति ईरानी इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन’ (आईबीएफ) के सदस्‍यों के साथ एक बैठक को संबोधित कर रही थीं। बताया जाता है कि इस बैठक में पुनीत गोयनका, रजत शर्मा और गिरीश श्रीवास्‍तव आदि शामिल थे।       

जैसे ही कोर्ट ने साध्‍वी से शोषण के मामले में राम रहीम को दोषी करार दिया, उसके समर्थकों की ओर से हिंसा शुरू हो गई और उन्‍होंने मीडियाकर्मियों पर भी हमला बोल दिया। देखते ही देखते यह खबर टेलिविजन चैनलों की सुर्खियां बन गई। वहीं, स्‍मृति ईरानी के कमरे में जहां बैठक चल रही थी, वहां भी यह टेलिविजन स्‍क्रीन पर दिखने लगी। फिर क्‍या था, उस बैठक में भी पंचकूला हिंसा की कवरेज को लेकर चर्चा शुरू हो गई। हालांकि यह बैठक का एजेंडा नहीं थी। बैठक में शामिल एक सूत्र के अनुसार, ‘हम टीवी पर सबकुछ अपनी आंखों के सामने देख रहे थे। इसलिए सभी लोगों के बीच यह भी चर्चा का विषय बन गया।

बता दें कि आईबीएफ बोर्ड में शामिल कुछ एग्जिक्‍यूटिव न्‍यूज ब्रॉडकास्‍ट के क्षेत्र में भी दखल रखते हैं और न्‍यूज ब्रॉडकास्‍टर्स एसोसिएशन के सदस्‍य हैं। उसी दिन शाम को ईरानी ने एक ट्वीट कर न्‍यूज ब्रॉडकास्‍ट स्‍टैंडर्ड्स अथॉरिटी’ (News Broadcasting Standards Authority) को गाइडलाइंस जारी कीं। इस एडवाइजरी में कहा गया था, ‘राम रहीम के मामले में हो रही हिंसा की कवरेज दिखाते समय सभी एडिटर्स को विशेष ध्‍यान रखना चाहिए। इस समय काफी अफवाहें भी उड़ रही हैं,  इसलिए चैनलों को कोई भी सामग्री प्रसारित करने से पूर्व सभी तथ्‍यों को चेक कर लेना चाहिए।

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गौरतलब है कि वेंकैया नायडू को उपराष्‍ट्रपति बनाए जाने के बाद उनकी जगह भाजपा ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का प्रभार स्‍मृति ईरानी को सौंपा है। स्‍मृति ईरानी ने जब से कार्यभार संभाला है, तब से उन्‍हें इस मंत्रालय  में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

अक्‍सर विवादों से जूझने वाले मीडिया और ऐंटरटेनमेंट सेक्‍टर को कानूनी पचड़ों का सामना भी करना पड़ रहा है। इसका हालिया उदाहरण टेलिकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया’ (TRAI) के टैरिफ ऑर्डर से जुड़ा हुआ विवाद है। इसके अलावा गुड्स एवं सर्विस टैक्‍स’ (GST) लागू होने के बाद इंडस्‍ट्री के कई सेक्‍शंस इसके द्वारा पड़ने वाले प्रभाव से जूझ रहे हैं। इसको लेकर एसोसिएशन ऑफ इंडियन मैगजीन्‍सने लाइटवेट कोटेड पेपर (LWC) पर लगाए गए 12 प्रतिशत जीएसटी को वापस लेने की मांग भी की थी।     

हालांकि इस बारे में अंतिम निर्णय जीएसटी काउंसिल को लेना है, लेकिन मैगजीन पब्लिशर्स को उम्‍मीद है कि उनके मामले में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से अनुशंसा की जाएगी। ऐसे में पब्लिशर्स की निगाहें स्‍मृति ईरानी की ओर लगी हुई हैं। इसके अलावा करीब दो हफ्ते पूर्व इंडियन न्‍यूजपेपर सोसायटी’ (Indian Newspaper Society) का एक प्रतिनिधिमंडल भी सरकारी अधिकारियों से मिला था और लाइटवेट कोटेड पेपर पर लगाए गए भारी टैक्‍स के बारे में पुनर्विचार करने की मांग की थी। हालांकि प्रिंट मीडिया ने प्रिंट ऐडवर्टाइजमेंट पर पांच प्रतिशत जीएसटी लगाने के बात कही थी लेकिन उस समय सभी लोगों के दिमाग से लाइटवेट कोटेड पेपर पर लगने वाले जीएसटी की बात नहीं आई थी।

 

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