सूचना प्रसारण मंत्रालय ने पकड़ी प्रसार भारती में सैलरी की 'गड़बड़ी'

Thursday, 08 March, 2018

सूचना व प्रसारण मंत्रालय प्रसार भारती में अब नियुक्तियों और कुछ सीनियर अफसरों के सैलरी पैकेज की समीक्षा कर रहा है। उसे जहां भी गड़बड़ी नजर आ रही है, वह उसकी जानकारी बोर्ड को दे रहा है। इसी संदर्भ में इकनॉमिक टाइम्स में पत्रकार वसुधा वेणुगोपाल की एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई है, जिसे आप यहां पढ़ सकते हैं-

सूचना प्रसारण मंत्रालय ने प्रसार भारती में सैलरी की गड़बड़ीपकड़ी

सूचना व प्रसारण मंत्रालय (आईऐंडबी मिनिस्ट्री) ने प्रसार भारती से संबंधित फाइनेंशियल मामलों में पारदर्शिता बनाए रखने की बात दोहराई है। मंत्रालय अब नियुक्तियों और कुछ सीनियर अफसरों के सैलरी पैकेज की समीक्षा कर रहा है। उसे जहां भी गड़बड़ी नजर आ रही है, वह उसकी जानकारी बोर्ड को दे रहा है। 26 फरवरी को मंत्रालय ने प्रसार भारती के सीनियर ऑफिशल राजीव सिंह को उनकी सैलरी के संबंध में एक लेटर लिखा था। राजीव बोर्ड में मेंबर (फाइनेंस) हैं। उसने फॉर्मर मेंबर (पर्सनेल) सुरेश चंद्र पांडा को भी ऐसे ही मामले में लेटर लिखा था।

नोटिस में बताया गया था, ‘सेंट्रल सेक्रेटेरियट सर्विस (सीसीएस) के नियमों के मुताबिक सैलरी की समीक्षा की जरूरत है।मंत्रालय ने कहा था कि प्रसार भारती का प्रशासनिक मंत्रालय होने के नाते वह रिटायर्ड अधिकारियों की सैलरी तय करने का अधिकार रखता है। वहीं, प्रसार भारती को इन मामलों में निर्णय करने का अधिकार नहीं है। मंत्रालय के एक बड़े अधिकारी ने बताया, ‘री-अपॉइटमेंट में सिंह ने अडिशनल सेक्रेटरी के पद पर जॉइन किया था, जबकि उन्हें सेक्रेटरी की सैलरी मिलती है। हम इस मामले को देख रहे हैं।’ 

सिंह पर प्रसार भारती के सभी वित्तीय मामलों की जिम्मेदारी है। अडिशनल सेक्रेटरी और सेक्रेटरी के वेतन में 20,000 मासिक का अंतर है। साथ ही, इससे पेंशन और भत्ते संबंधी मामले भी जुड़े हुए हैं। सिंह अप्रैल 2015 से प्रसार भारती में मेंबर (फाइनैंस) के तौर पर काम कर रहे हैं। वह इससे पहले भारत संचार निगम लिमिटेड में 9 साल तक काम कर चुके हैं। 

पिछले साल जनवरी में उन्होंने पांडा की जगह ली थी, जो नवंबर 2016 से प्रसार भारती में अंतरिम सीईओ के तौर पर सेवा दे रहे थे। सीईओ और चेयरमैन के अलावा प्रसार भारती में एक मेंबर पर्सनल और वित्तीय मामलों को देखने के लिए एक मेंबर होते हैं। इसमें अडिशनल डायरेक्टर जनरल रैंक के सात अधिकारी भी होते हैं। मंत्रालय इसका भी पता लगा रहा है कि ये नियुक्तियां किस तरह से की गईं। सिंह ने ईमेल से दिए एक जवाब में बताया कि मंत्रालय ने सीईओ से ब्योरा मांगा है। सिंह ने बताया कि उन्होंने कोई और डिटेल नहीं दी है। हाल ही में सिंह से दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो (एआईआर) की कमर्शल यूनिट्स को भी देखने को कहा गया था, जिसमें अडवर्टाइजमेंट स्लॉट्स की बिक्री और रिसोर्सेज शेयरिंग जैसे मामले जुड़े हुए हैं। 

प्राइवेट प्लेयर्स के साथ ट्रांसमिटर्स की शेयरिंग इसका हिस्सा है। मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि बोर्ड में कुछ लोग प्रसार भारती सेक्रेटेरियट को और पावरफुल बनाने के हक में हैं। वे इसे डीडी और एआईआर के लिए क्रिएटिव यूनिट भी बनाना चाहते हैं। मंत्रालय इन मामलों को भी देख रहा है। 2018 के बजट में सूचना व प्रसारण मंत्रालय को 4,089 करोड़ दिए गए हैं। इनमें से डीडी और एआईआर को चलाने वाले प्रसार भारती को आधी से अधिक रकम मिलेगी, जो करीब 2,820.56 करोड़ रुपये होगी। 

(साभार: इकनॉमिक टाइम्स)


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