‘IIMC’ में लागू हो सकते हैं ये नियम, नहीं कर सकेंगे सरकार की आलोचना!

‘IIMC’ में लागू हो सकते हैं ये नियम, नहीं कर सकेंगे सरकार की आलोचना!

Friday, 11 August, 2017

समाचार4मी‍डिया ब्यूरो ।।

देश का प्रतिष्ठित मीडिया प्रशिक्षण संस्‍थान इंडियन इंस्‍टीट्यूट ऑफ मास कम्‍युनिकेशन’ (IIMC)  अनुशासन के मामलों में अपने फैकल्‍टी मेंबर्स पर सेंट्रल सिविल सर्विसेज (CCS) के वही नियम लागू करने जा रहा है, जो सरकारी कर्मचारियों के लिए तय हैं।  आईआईएमसी की ओर से जारी किए गए एजेंडा नोट में बताया गया है कि शुक्रवार को होने वाली बैठक में एग्जिक्‍यूटिव काउंसिल इस मुद्दे पर चर्चा करेगी। 

फैकल्‍टी मेंबर्स के एक वर्ग का कहना है कि यह किसी भी तरह के मतभदे को दबाने और शैक्षिक स्‍वतंत्रता खत्‍म करने का प्रयास है। इसको लेकर जनता दल (यूनाइटेड) के तीन सांसदों ने 26 जुलाई को अपनी आशंका जताते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्री को पत्र भी लिखा था।

दरअसल, ‘CCS’ के नियम 1964 में कहा गया है, ‘कोई भी सरकारी कर्मचारी अपने नाम से अथवा छद्म नाम से कोई भी ऐसी सामग्री न तो रेडियो पर ब्रॉडकास्‍ट करेगा और न ही किसी इलेक्‍ट्रोनिक मीडिया में टेलिकास्‍ट करेगा अथवा प्रेस या आम जनता में कोई ऐसा बयान नहीं देगा जो सरकार की आलोचना करने वाला हो और उस पर गलत प्रभाव डाले।

एजेंडा नोट में कहा गया है कि आईआईएमसी के महानिदेश द्वारा एक कमेटी गठित की गई थी, जिसका काम संस्‍थान में आचार संहिता को प्रभावी रूप से लागू करना था। कमेटी की मीटिंग में ये सुझाव दिए गए थे कि अनुशासन संबंधी मामलों को निपटाने के लिए यहां पर भी सरकार अथवा ‘CCS’ के नियम लागू किए जाने चाहिए। 

एजेंडा नोट में ये भी कहा गया है कि कुछ फैकल्‍टी मेंबर्स इस तरह के नियमों के पक्ष में नहीं हैं। मेंबर्स का कहना था कि मीडिया को वॉचडॉग की भूमिका निभानी है। हालांकि, नोट में यह भी कहा गया है कि आईआईएमसी एक मीडिया ऑर्गनाइजेशन नहीं बल्कि एक मीडिया इंस्‍टीट्यूट है और इस प्रकार फैकल्‍टी मेंबर्स के इन तर्कों को स्‍वीकार नहीं किया जा सकता है।

कमेटी का यह भी मानना है कि आईआईएमसी के बॉयलॉज को दोबारा से गठित किए जाने के बजाय इसमें एक उपनियम शामिल किया जाना चाहिए कि इंस्‍टीट्यूट केंद्र सरकार के नियमों का पालन करेगा। ऐसे में अनुशासन संबंधी मामलों के निपटारे में किसी भी तरह की परेशानी नहीं आएगी।

वहीं, समृति ईरानी को भेजे गए पत्र में जदयू के सांसद अली अनवर अंसारी, कहकशां परवीन और रामनाथ ठाकुर का कहना है कि आईआईएमसी प्रशासन ‘CCS’ नियमों को जबर्दस्‍ती थोपने का प्रयास कर रहा है। उनका कहना है, ‘यह उच्‍च शैक्षणिक संस्‍थानों के फैकल्‍टी मेंबर्स की स्‍वतंत्रता को छीनने का प्रयास है, खासकर पत्रकाररिता के संस्‍थानों में।’ 

आईआईएसी के फैकल्‍टी मेंबर का कहना है कि इससे ऐसा लग रहा है कि जर्नलिज्‍म अथवा मीडिया फैकल्‍टी को अपने विचार, पब्लिक पॉलिसी अथवा सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर मीडिया में बात करने की अनुमति नहीं है।   

उनका कहना है कि आईआईएमसी की सेवा नियमावली के तहत वरिष्‍ठ पत्रकार और एडिटर्स भी फैकल्‍टी के लिए आवेदन कर सकते हैं। लेकिन क्‍या हम ये मानकर चलें कि कि किसी अखबार अथवा न्‍यूज चैनल का वरिष्‍ठ संपादक आईआईएमसी का फैकल्‍टी बनने के बाद लिखना छोड़ देगा अथवा इस तरह के मामलों में अपनी टिप्‍पणी नहीं देगा। अक्‍टूबर 2016 तक कमेटी की मेंबर रहीं सेवानिवृत्‍त प्रोफेसर जयश्री जेठवानी ने कहा कि उन्‍होंने नहीं पता था कि कमेटी ने इस तरह की रिपोर्ट दी है। यह तय हुआ था कि इस बारे में बड़े स्‍तर पर लोगों के विचार जाने जाएंगे। वहीं, इस बारे में आईआईएमसी के महानिदेशक केजी सुरेश ने मीटिंग से पहले एग्जिक्‍यूटिव कमेटी के एजेंडा के बारे में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।

 

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