...तो क्या इस वजह से IIMC के टीचर को मिली यह सजा  

Tuesday, 03 January, 2017

  समाचार4मी‍डिया ब्यूरो ।।

देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) में एक एकैडमिक एसोसिएट को कथित तौर पर मजदूरों की आवाज़ उठाने की सजा मिली है। अंग्रेजी अखबार ‘फाइनैंशियल एक्सप्रेस’ के मुताबिक हाल ही में संस्थान में काम कर रहे 25 दलित मजदूरों को हटा दिया गया था। अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक नरेंद्र सिंह राव नाम के संविदा कर्मचारी (एकैडमिक एसोसिएट) ने कई साल से काम कर रहे इन मजदूरों की बर्खास्तगी का विरोध किया था। इसके साथ ही राव ने कोर्स डायरेक्टर की नियुक्ति को लेकर सवाल उठाए थे।

इस पर IIMC ने नरेंद्र सिंह राव को हटाने के साथ ही कैंपस के अंदर उनके घुसने पर रोक लगा दी है। आदेश में कहा गया है कि राव के आने सेIIMC कैंपस का शांतिपूर्ण माहौल प्रभावित होगा। नरेंद्र सिंह राव 2010 से संविदा कर्मी के तौर पर इंस्टीट्यूट में काम कर रहे थे। राव का दावा है कि जब वह मेडिकल लीव पर चल रहे थे,  इसी दौरान उनको बर्खास्त किया गया है। बताया जाता है कि राव ने IIMC के डायरेक्टर जनरल केजी सुरेश को एक ईमेल भेजकर अपने वरिष्ठों पर तरह-तरह से परेशान करने का आरोप भी लगाया था।

वहीं राव के आरोपों को आधारहीन बताते हुए IIMC ने अपनी सफाई में कहा है कि सर्विस कॉन्ट्रैक्ट के नियमों (उपधारा-1) के तहत उनके खिलाफ कार्रवाई हुई है, जिसके मुताबिक किसी भी कर्मचारी की सेवाएं किसी भी वक्त बिना कोई वजह बताए खत्म की जा सकती हैं।

गौरतलब है कि IIMC हाल के दिनों में कई बार विवाद में आया है। इसी साल एसोसिएट प्रोफेसर अमित सेनगुप्ता का ओडिशा स्थित संस्थान की ब्रांच में ट्रांसफर कर दिया गया था। सेनगुप्ता पर जेएनयू और एफटीआईआई के छात्रों के समर्थन का आरोप लगाया गया था। इसके साथ ही दलित छात्र रोहित वेमुला सुसाइड मामले में भी उन्होंने विरोध दर्ज कराया था। सेनगुप्ता ने जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया के समर्थन पर खुद को निशाना बनाए जाने का आरोप लगाते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।

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