इस तरह रेडियो इंडस्‍ट्री को और ऊंचाई तक ले जाना चाहती हैं अनुराधा प्रसाद

इस तरह रेडियो इंडस्‍ट्री को और ऊंचाई तक ले जाना चाहती हैं अनुराधा प्रसाद

Wednesday, 11 October, 2017

समाचार4मी‍डिया ब्यूरो ।।

प्रिंट, टेलिविजन और रेडियो के क्षेत्र में महत्‍वपूर्ण भूमिका अदा कर रही बीएजी फिल्‍म्‍स’ (BAG FILMS) की चेयरपर्सन-मैनेजिंग डायरेक्‍टर और एसोसिएशन ऑफ रेडियो ऑपरेटर्स फॉर इंडिया’ (AROI) की प्रेजिडेंट अनुराधा प्रसाद इंडस्‍ट्री से संबंधित मुद्दों के निस्‍तारण के लिए योजना तैयार करने में जुटी हुई हैं।

हमारी सहयोगी मैगजीन इंपैक्‍ट’ (IMPACT) ने उनसे इस विषय पर विस्‍तार से बातचीत की। प्रस्‍तुत हैं इस बातचीत के प्रमुख अंश:    

AROI’ के प्रेजिडेंट के रूप में आपकी प्राथमिकताएं क्‍या हैं?

मैं चाहती हूं कि इंडस्‍ट्री से जुड़े जितने भी मुद्दे अथवा समस्‍याएं हैं, उनका निस्‍तारण व्‍यवस्थित तरीके से होना चाहिए। यह भी सुनिश्चित करना है कि छोटे ऑपरेटर्स को भी पर्याप्‍त महत्‍व मिले। इसके अलावा हम इंडस्‍ट्री की ग्रोथ पर भी ध्‍यान देंगे, खासकर छोटे इलाकों पर ज्‍यादा फोकस किया जाएगा। इसके अलावा प्रिंट, टेलिविजन और रेडियो के लिए एक बेहतर मार्केट तैयार करना है।

फिलहाल आपके समक्ष क्‍या चुनौतियां हैं

हमें ऐसा कॉपीराइट बोर्ड स्थापित करना है, जिससे कि कॉपीराइट संशोधन अधिनियम के अनुसार म्‍यूजिक के लिए वैधानिक लाइसेंस जारी किया जा सके। इसके द्वारा म्‍यूजिक और रेडियो इंडस्‍ट्री के बीच लंबे समय से चली आ रही मुकदमेबाजी और विवादों को खत्‍म किया जाएगा। खासकर रॉयल्‍टी के माध्‍यम से छोटे रेडियो स्‍टेशनों की मदद की जाएगी।

हमारे समक्ष एक और बड़ी चुनौती है कि डीएवीपीऔर निजी ऐडवर्टाइजर्स द्वारा रेडियो स्‍टेशनों को समय से भुगतान किया जाना सुनिश्चित करना है। इसके अलावा फेज-तीन की नीलामी की सफलता सुनिश्चित करने के लिए हम सरकार से न्‍यूनतम रिजर्व प्राइज ज्‍यादा रखने की नीति पर पुनर्विचार करने के लिए भी कहेंगे। एक और चुनौती है कि हमें स्‍पोर्ट्स, न्‍यूज और करेंट अफेयर्स की अनुमति देकर निजी रेडियो पर कंटेंट की बैंडविथ को और बढ़ाना है।

रेडियो को और कमाऊ बनाने के लिए आपके पास क्‍या योजना है?   

हम चाहते हैं कि सरकारी निकायों ‘BECIL’ आदि की तरह ‍सरकारी निकायों द्वारा रेडियो स्‍टेशन लगाने की दिशा में तेजी आए। आमतौर पर इस तरह के कामों में जितनी देरी होती है, लागत बढ़ती जाती है। इसके अलावा रेडियो के लिए एक विश्‍वसनीय ‘Listnership measurement systems’ भी तैयार किए जाने की जरूरत है। वहीं, रेडियो के पास इसके टेलिकॉम ऑपरेटर्स के लिए भुगतान के लिए वनटाइम एंट्री फीस’ (OTEF) का ऑप्‍शन भी होना चाहिए। इस समय जो सिस्‍टम है उससे ज्‍यादा आर्थिक दबाव बढ़ जाता है और ब्‍याज भी लगती है।    

फेज-3 की पॉलिसी के अनुसार देश में किसी भी ऑपरेटर के लिए स्‍टेशनों की सीमा 15 प्रतिशत तय की गई है। हालांकि किसी शहर के लिए यह 40 प्रतिशत है। ऐसे में ऑपरेटर्स छोटे शहरों अथवा कस्‍बों में निवेश करने से बचते हैं। क्‍योंकि वे बड़े शहरों में ज्‍यादा स्‍टेशन लगाना चाहेंगे क्‍योंकि वहां 15 प्रतिशत की सीमा है। ऐसे में यह सीमा एकसमान होनी चाहिए। ऐसे में नीलामी में ज्‍यादा प्रतिस्‍पर्द्धा बढ़ेगी और सरकार को ज्‍यादा रेवेन्‍यू मिलेगा।

 

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