जो पहले अखबार के अंदर होते थे, आज वो बाहर है: राजीव कटारा, कादम्बिनी

Thursday, 26 May, 2016

abhishek mehrotra thumbअभिषेक मेहरोत्रा  संपादकीय प्रभारी, समाचार4मीडिया डॉट कॉम करीब तीन दशकों से पत्रकारिता कर रहे वरिष्ठ पत्रकार राजीव कटारा को पिछले महीने प्रतिष्ठित पुरस्कार ‘गणेश शंकर विद्यार्थी 2013 से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर समाचार4मीडिया से उन्हें बधाई देते हुए उनसे बातचीत की। पेश है उस बातचीत के मुख्य अंश: ये अवॉर्ड आपके लिए क्या मायने रखता है? गौरव के इस क्षण का जीवन में क्या महत्व है? जब मैं ये अवॉर्ड ले रहा था तो वो टाइमिंग मेरे जीवन का अविस्मरणीय क्षण था क्योंकि मेरे साथ इसी अवॉर्ड को 2012 के लिए विश्वनाथ सचदेवजी ग्रहण कर रहे थे। ये मेरे लिए बेहद गौरव का पल था क्योंकि पत्रकारिता की दुनिया में मेरा पहला लेख सचदेवजी ने ही नवभारत टाइम्स में प्रकाशित किया था। इस कार्यक्रम की उद्घोषका सरला माहेश्वरीजी थी, जो हंसराज कॉलेज में मेरी टीचर रह चुकी है। ऐसे में अपने वरिष्ठों की उपस्थिति में सम्मानित होना मेरे लिए वाकई मेमोरेबल मोमेंट बन गया। rajeev-kataraआप काफी लंबे समय से हिन्दुस्तान समूह के साथ जुड़े है लेकिन आज के युवा पत्रकार तेजी से मीडिया संस्थान बदलते हैं, इस पर क्या कहना है आपका? ये सही है कि मैं करीब डेढ़ दशक से हिन्दुस्तान के साथ जुड़ा हुआ हूं पर उससे पहले मैंने भी कई संस्थान तेजी के साथ बदले हैं। हां फर्क ये रहा कि मैंने कभी पैकेज के लिए संस्थान नहीं बदला, सिर्फ विचारों की लड़ाई रही। मेरे करियर ग्राफ में करीब दर्जनभर संस्थान है जहां मैंने काम किया है। 1983 में ‘नवभारत टाइम्स’ से ट्रेनिंग लेने के बाद ‘चौथी दुनिया’, ‘संडे ऑब्जर्वर’, ‘राष्ट्रीय सहारा’, ‘माया’, ‘आजतक’, ‘दैनिक जागरण’, ‘अमर उजाला’, ‘दैनिक भास्कर’ में काम करने के बाद ‘हिन्दुस्तान’ से जुड़ा। 1986 में ‘चौथी दुनिया’ ने पत्रकारिता का बड़ा ब्रेक दिया। वहां कमर वहीद नकवी, रामकृपाल सिंह और संतोष भारतीय की टीम ने बहुत कुछ सिखाया। वो मेरी पत्रकारिता का यादगार दौर है। वहां काम करते वक्त गजब का आत्मविश्वास पैदा हुआ। अजय चौधरी, वीरेंद्र सैंगर, अर्चना झा, आदियोग के साथ हमने वहां खूब काम किया। उसके बाद उदयन शर्मा के साथ ‘संडे ऑब्जर्वर’ के जरिए अपनी पारी आगे बढ़ाई। करीब साढ़े तीन साल वहां काम करने के बाद ‘राष्ट्रीय सहारा’ गए। उस दौरान सुमिता, शेषनारायण सिंह जैसे पत्रकार हमारे साथी रहे। वहां नौ महीने काम करने के बाद ‘माया’ जॉइन की, पर वहां भी नौ महीने ही काम कर पाया। उसके बाद ‘आजतक’ चला गया।

1996 में जागरण में बतौर फीचर एडिटर दिल्ली में जॉइनिंग हुई। जागरण के साथ फीचर के कई प्रयोग किए। सहस्त्राब्दि अंकों का संयोजन किया। 2001 में ‘अमर उजाला’ के साथ सातों दिनों के फीचर पेज की शुरुआती की। 2003 में सीएसई की फैलोशिप के अंतर्गत बैतूल में काम किया। फिर 2006 में ‘हिन्दुस्तान’ आया और यहां रिसर्च और स्पेशल प्रोजेक्ट के इंजार्च, खेल संपादक के पद पर काम करते हुए अब ‘कादम्बिनी’ का प्रभार संभाल रहा हूं।

आप तीन दशकों से ज्यादा समय से पत्रकारिता में है, आज की पत्रकारिता में किस तरह का बदलाव देखते हैं? पहला बड़ा बदलाव तो ये हुआ है कि जो फीचर आइटम्स हमारे जमाने में अखबार के अंदर होते थे, वे अब हम बाहर देखते हैं। सिनेमा, खेल, एंटरटेनमेंट, फैशन, शिक्षा क्षेत्र की खबरें हमारे जमाने में पेज सात के बाद होती थी, पर आजकल ये खबरें पेज वन का हिस्सा बन गई है। दूसरा अब अखबारों में इंटलैक्चुअल स्पेस कम हुआ है। जहां पहले संपादकीय पेज पर प्रकाशित होने वाले लेख ढाई हजार शब्दों के होते थे, जो अब आधे से भी कम शब्दों के रह गए हैं। अखबारों के रिपोर्टर की अपनी एक्सक्लूसिव खबरों का अभाव दिखता है। आज रिपोर्टर अपनी खबरों के बजाए टीवी की खबरों पर काम करने लगे हैं। हां इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से ये फायदा जरूर हुआ है कि अब अखबार भी देर रात की खबरें प्रकाशित करने लगे हैं। आजकल ज्यादातर गुडी-गुडी (Goody-Goody) जर्नलिज्म दिखता है, जहां खबरों में आलोचना का स्वर धीमा दिखता है। सभी को खुश करने की पीआर पत्रकारिता तेजी से पनप रही है। पाठकों का पार्टिसिपेशन कम हुआ है। हां इतना जरूर है कि कैम्पैनों के जरिए अखबार स्पॉन्सर्ड पार्टिसिपेशन को खूब प्रमोट किया है। आज के युवा पत्रकारों को क्या कहना चाहेंगे आप? युवा पत्रकारों से मेरा यही कहना है कि वे अपना काम पूरी ईमानदारी के साथ करें। हर पत्रकार के पास अच्छा करने का मौका है, बस आप जहां जिस जगह है वहां क्या बेस्ट कर सकते हैं, उस पर ध्यान दीजिए और बढ़िया काम कीजिए। आपको अखबार में जो स्पेस मिल रही है, उसी के जरिए सरोकारी पत्रकारिता करते रहिए। जब आप अच्छा काम करते हैं, तो आपको खुद ही सुकून महसूस होता है।  पत्रकारों का समाज में एकअहम रोल है। पत्रकारों को समझना होगा कि आज भी जनता का उन पर बहुत भरोसा है। जैसा विश्वास वे डॉक्टर पर करती है, वैसे ही वे पत्रकारों और मीडिया को भी विश्वसनीय मानती है। समाचार4मीडिया देश के प्रतिष्ठित और नं.1 मीडियापोर्टल exchange4media.com की हिंदी वेबसाइट है। समाचार4मीडिया.कॉम में हम आपकी राय और सुझावों की कद्र करते हैं। आप अपनी राय, सुझाव और ख़बरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। आप हमें हमारे फेसबुक पेज पर भी फॉलो कर सकते हैं।

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