अब फिर अरनब गोस्वामी के लिए कुछ अलग करने की बारी है...

Wednesday, 23 November, 2016

जॉन थॉमस john-thomasअरनब गोस्वामी द्वारा अपने एडिटोरियल स्टाफ की मीटिंग में अंग्रेजी चैनल टाइम्स नाउ (Times Now) और ईटी नाउ (ET Now) के एडिटर-इन-चीफ और प्रेजिडेंट-न्यूज पद से इस्‍तीफा देने की घोषणा के बाद लोगों में यह जानने की बड़ी उत्‍सुकता थी कि अगले दिन न्‍यूज ऑवर (News Hour) को कौन होस्ट करेगा। अपनी इस मीटिंग में अरनब ने स्‍टाफ से कई बार यह भी कहा कि खेल अब शुरू हुआ है (The game has just begun)। कई लोगों का यह मानना है कि अरनब ने अपना निजी चैनल लाने के प्लान को एग्जिक्यूट करने के लिए इस्तीफा दिया है। वर्तमान में आलम यह था कि टाइम्स नाउ और अरनब गोस्वामी एक-दूसरे के पर्याय बन गए थे। गोस्वामी के नेतृत्व में टाइम्स नाउ चैनल ने वर्ष 2006 में अपनी लॉन्चिंग के एक साल से भी कम समय में काफी ख्याति बटोर ली थी और उन्होंने अपना कमांड सेंटर दिल्ली को छोड़कर मुंबई के परेल कॉमर्शियल एरिया में बनाया था। अपनी लॉन्चिंग के एक हफ्ते के अंदर ही उन्होंने कुरुक्षेत्र में एक बोरवेल में गिरे प्रिंस नामक बच्चे को बचाने के लिए शुरू किए गए ऑपरेशन की नॉन स्टॉप कवरेज शुरू कर दी थी। उनके इस जज्बे और लगभग 50 घंटे की कवरेज की पूरे देश में काफी सराहना हुई थी। इसके अलावा मुंबई में वर्ष 2008 में हुए आतंकी हमले की कवरेज के दौरान भी टाइम्स नाउ ने दर्शकों का काफी ध्यान बटोरा था और अपनी रिपोर्टिंग और एंकरिंग को लेकर लोकप्रियता के मामले में वह दिल्ली में बैठे अपने सीनियर्स से भी काफी आगे बढ़ गए थे। टाइम्स नाउ में अरनब गोस्वामी ऐसे रिपोर्टिंग एडिटर थे जो न सिर्फ प्रत्येक रात को एक निश्चित समय पर दिखाई देते थे, बल्कि दिन में भी किसी भी समय उन्‍हें चैनल पर आने की आजादी थी। उन्‍होंने विभिन्न स्‍थानों से स्‍टोरी की और इनमें से कई एक्‍सक्‍लूसिव रहीं। इसके अलावा उन्होंने कई बड़ी स्‍टोरी भी ब्रेक कीं।  अपने शो द न्‍यूज ऑवर (The NewsHour) से उन्‍होंने काफी सुर्खियां भी बटोरीं, जिनमें वह किसी हस्‍ती को गेस्ट के तौर पर बुलाते थे और विभिन्‍न विषयों पर उनसे चर्चा करते थे। हालांकि पत्रकारिता की अरनब गोस्‍वामी की यह शैली कई लोगों को रास नहीं आती थी लेकिन वह अपने शो को इतने बेहतर अंदाज में ऐसे विजुअल का भी इस्‍तेमाल करते थे कि अंग्रेजी को न समझने वाला और टीवी की आवाज बंद कर देखने वाला भी उसे आसानी से समझ जाता था। दिल्ली में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में हुआ घोटाला हो, टू जी घोटाला हो अथवा मुंबई की आदर्श हाउसिंग सोसायटी में हुआ घोटाला हो, अरनब की इन स्‍टोरी से यूपीए सरकार की राजनीतिक छवि को काफी नुकसान पहुंचा था। अरनब गोस्‍वामी ही वह अकेले व्‍यक्ति थे, जिन्‍होंने तत्‍कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में भ्रष्‍टाचार को लेकर सवाल पूछा था। इसके अलावा भी अपनी कार्यशैली को लेकर वह हमेशा चर्चाओं में रहते थे। टाइम्स नाउ जैसे बड़े चैनल को छोड़ने का फैसला अरनब ही कर सकते हैं लेकिन यह देखना अभी बाकी है कि एक नए वेचर में शेयरधारक उनके जज्‍बे और स्‍वतंत्र पत्रकारिता पर कितना भरोसा कर पाते हैं। ये अरनब ही थे जिन्‍होंने अपने विरोधियों को भी न चाहने के बावजूद उनके जैसे कुछ तरीके अपनाने पर मजबूर कर दिया था लेकिन वे टाइम्स नाउ जितना सफल नहीं हो पाए।  टाइम्स नाउ में करीब दस साल काम करने के दौरान अरनब गोस्‍वामी ने टेलिविजन पत्रकारिता का अंदाज ही बदल दिया था। लेकिन अब समय है कि जब उन्‍हें मैनेजमेंट और बिजनेस के कार्यों को भी सीखना होगा... (लेखक मीडिया विश्लेषक और बेंगलुरु में प्रशिक्षक है, जिनके कुछ छात्र टाइम्स नाउ में भी काम कर चुके हैं)। समाचार4मीडिया देश के प्रतिष्ठित और नं.1 मीडियापोर्टल exchange4media.com की हिंदी वेबसाइट है। समाचार4मीडिया.कॉम में हम आपकी राय और सुझावों की कद्र करते हैं। आप अपनी राय, सुझाव और ख़बरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। आप हमें हमारे फेसबुक पेज पर भी फॉलो कर सकते हैं।



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