UGC ने 4305 पत्र-पत्रिकाओं को अपनी अप्रूवल लिस्ट से किया बाहर, मचा बवाल...

UGC ने 4305 पत्र-पत्रिकाओं को अपनी अप्रूवल लिस्ट से किया बाहर, मचा बवाल...

Monday, 14 May, 2018

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने हाल ही में एक अधिसूचना जारी कर 4305 पत्र-पत्रिकाओं को अपनी अप्रूवल लिस्ट से बाहर कर दिया है। यूजीसी की मानें तो इन सभी पत्रिकाओं में फर्जीवाड़ा पाया गया है। वहीं 191 पत्रिकाओं की जांच पेंडिंग है।

बता दें कि जिन पत्रिकाओं को यूजीसी ने बाहर किया है, उनमें हंसइतिहास दर्पण, फारवर्ड प्रेसइकनॉमिक एंड पॉलिटिकल वीकली (ईपीडब्लयू)वागर्थ आदि पत्रिकाएं शामिल हैं। इन पत्रिकाओं में कुछ पत्रिकाएं ऐसी भी शामिल हैंजिनकी शोध और मौलिक विचारों के प्रकाशन के क्षेत्र में गहरी साख रही है।

जारी की गई अधिसूचना के मुताबिक, शोध पत्रिकाओं में गलत तथ्यअधूरी सूचनाएंखराब गुणवत्ता और गलत दावे जांच में पाए गए थे।  

हालांकि यूजीसी द्वारा उठाए गए इस कदम से विवाद शुरू हो गया और ऐसे आरोप लगाए जा रहे हैं कि राइट विंग की केंद्र में सरकार होने के कारण यूजीसी का भी तेजी से भगवाकरण किया जा रहा है। साथ ही वह देश में अभिव्यक्ति के सारे विकल्पों को बंद कर देना चाहती है। यही वजह है कि प्रगतिशील विचार और सरोकार वाली पत्र-पत्रिकाओं को यूजीसी की मान्यता सूची से बाहर किया जा रहा है। स्वीकृत लिस्ट से बाहर हुई ज्यादातर शोध पत्रिकाएं हिंदी भाषा की हैं।

वहीं उत्पन्न हुए इस विवाद के बाद, यूजीसी ने स्पष्ट किया है कि नाम हटाने का मतलब जरूरी नहीं कि वे पत्रिकाएं निम्न स्तर की थीं। यूजीसी का कहना है कि हो सकता है कि जिन पत्रिकाओं के नाम हटाए गए हैं उनमें से कुछ बुनियादी मानकों को पूरा न करती हों और जब वे इन्हें पूरा कर लें, तो इन्हें फिर इस सूची में शामिल किया जा सकता है।

यूजीसी के मुताबिक, सूची से पत्रिकाओं के हटाने का काम दस सदस्यों की एक स्थायी समिति ने किया था, जिनमें प्रोफेसर वी.एस.चौहान, (यूजीसी)सुरंजन दास (वाइसचांसलरजादवपुर विश्वविद्यालय)राम सिंह (दिल्ली स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स)जी.जे.वी. प्रसाद (जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय) और अन्य लोग शामिल थे।

यूजीसी ने बताया कि पत्रिकाओं को इस सूची में शामिल रखने का एक बुनियादी मानक यह भी है कि इसकी कोई अपनी खुद की वेबसाइट है या नहीं। उपलब्ध वेबसाइट में पत्रिका का डाक का पूर्ण पता है या नहींप्रधान संपादक और संपादकों के ईमेल पते होने भी चाहिए और इन पतों में से कुछ ऐसे होने चाहिए, जिनकी आधिकारिक तौर पर पुष्टि की जा सके। हो सकता है कि विश्वविद्यालयों द्वारा अनुशंसा प्राप्त कुछ पत्रिकाओं की अपनी वेबसाइट न हों, या वेबसाइट हो भी तो उन्हें अपडेट न किया गया हो। इसलिए उन्हें अप्रूवल लिस्ट से बाहर कर दिया गया हो।  

यूजीसी ने जिन पत्र-पत्रिकाओं को मान्यता सूची से बाहर किया है, उनमें ईपीडब्ल्यू जैसी चर्चित और शोधपरक मैगजीन है, जो देश की अर्थनीति और सामाजिक सरोकार के वित्तीय नजरिए को गहराई से प्रस्तुत करती है, तो हंस जैसी चर्चित साहित्यिक मैगजीन भी है, जिसने दशकों तक देश की साहित्यिक दशा-दिशा को नेतृत्व प्रदान किया। वरिष्ठ पत्रकार अनिल चमड़िया के नेतृत्व में निकलने वाली मैगजीन मास मीडिया को भी मान्यता सूची से बाहर किया है।

आक्सफोर्ड और हावर्ड यूनिवर्सिटी की शोध पत्रिकाओं को भी इस सूची से बाहर किया गया है। यूजीसी की सूची में अखरा पत्रिका भी शामिल है जिसका प्रकाशन रांची से किया जाता है। यह पत्रिका झारखंड आदिवासी भाषाओं में आलेख प्रकाशित करती है।



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