डिजिटाइजेशन प्रक्रिया पर नजर रखने के लिए संसदीय समिति ने ‘MIB’ को दिए ये सुझाव...

डिजिटाइजेशन प्रक्रिया पर नजर रखने के लिए संसदीय समिति ने ‘MIB’ को दिए ये सुझाव...

Friday, 05 January, 2018

निशांत सक्‍सेना ।।

सूचना तकनीक मामलों को लेकर गठित संसदीय स्‍थायी समिति (Parliament’s Standing committee) ने हाल ही में अपनी 44वीं रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में डिजिटल एड्रेसेबल सिस्‍टम (DAS) के कार्यान्‍वयन के मामले में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (एमआईबी) किसी भी सूरत में अपनी जिम्‍मेदारी से बच नहीं सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चूंकि एमआईबी एक प्रशासनिक मंत्रालय है जिसका काम समग्र कार्यान्‍वयन पर निगरानी रखना हैइसलिए इसे जिम्‍मेदारियों से मुक्‍त नहीं किया सकता है।

अनुराग ठाकुर की अध्यक्षता वाली समिति ने अपनी रिपोर्ट में सुझाव दिया कि ऑपरेटरों द्वारा किए जा रहे उल्लंघन पर नजर रखने के लिए अधिकृत अधिकारियों के साथ समन्वय स्‍थापित करने के लिए केंद्रीय स्तर पर एक जवाबदेह निगरानी तंत्र तैयार किया जाना चाहिए। इसके अलावा यह भी कहा गया है कि केबल टीवी सेवाओं में अनिवार्य रूप से डिजिटाइजेशन सुनिश्चित करने के लिए संबंधित के साथ बैठकें भी आयोजित की जानी चाहिए।

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘इस बात में कोई शक नहीं है कि न सिर्फ डिजिटाइजेशन में काफी देरी हुई है बल्कि एनॉलॉग टीवी सेवाओं को पूरी तरह बंद होने में भी काफी समय लगेगा।’ समिति को मिली शिकायतों के आधार पर रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि डिजिटाइजेशन की दिशा में संबंधित अधिकारी न सिर्फ अपनी जिम्‍मेदारी को पूरा करने में असफल रहे हैं बल्कि मल्‍टीपल सिस्‍टम ऑपरेटर्स/ऑपरेटर्स द्वारा अवैध रूप से किए जा रहे कार्यों की जांच भी सही से नहीं हुई है।  

11 नवंबर 2011 को जारी अधिसूचना के अनुसार एमआईबी को 31 दिसंबर 2014 तक चार चरणों में डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया पूरी करनी थी। लेकिन चेन्‍नई को छोड़ दिया जाए तो अब तक सिर्फ पहले और दूसरे चरण का काम पूरा हुआ है। वहींतमिलनाडु के अलावा तीसरे और चौथे चरण का काम करीब 75 प्रतिशत पूरा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, ‘तमिलनाडु में इस दिशा में आ रहीं समस्‍याओं के अलावा तीसरे और चौथे चरण की डिजिटाइजेशन प्रक्रिया में काफी देरी भी हुई है।’ अपने बचाव में एमआईबी ने कहा है कि इन मामले को लेकर चूंकि देश के विभिन्‍न हाई कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गई हैं और कोर्ट ने कहीं पर स्‍टे और कहीं पर समय सीमा बढ़ा दी हैजिसके कारण इसमें देरी हुई।   

तमिलनाडु में सिर्फ 33 प्रतिशत डिजिटाइजेशन से परेशानसमिति ने सुझाव दिया कि एमआईबी को तमिलनाडु सरकार द्वारा नियंत्रित अरासु केबल मामले में एक निश्चित समय-सीमा में ट्राई की सिफारिशों के अनुरूप ठोस निर्णय लेना चाहिए ताकि इस प्रक्रिया को गति दी जा सके और वहां केबल टीवी के डिजिटाइजेशन को पूरा किया जा सके।

कमेटी ने एमआईबी से तमिलनाडु में कुछ मल्‍टीपल सिस्‍टम ऑपरेटर्स और लोकल चैनल ऑपरेटर्स द्वारा दर्ज कराई शिकायतों में उठाए गए मुद्दों के संबंध में लिए गए फैसलों के बारे में तीन महीने के अंदर अवगत कराने को कहा है।   

इसके अलावा कमेटी ने एमआईबी को ये सुझाव भी दिया है कि वह मल्‍टीपल सिस्‍टम ऑपरेटर्स को मैनेजमेंट इनफॉर्मेशन सिस्‍टम (एमआईएस) में अपना डाटा दर्ज करने के लिए राजी करे। अपना डाटा एमआईएस में दर्ज न करने वाले मल्‍टीपल सिस्‍टम ऑपरेटर्स के खिलाफ एमआईबी ने उनका रजिस्‍ट्रेशन कैंसल समेत कौन सी कार्रवाई की हैइसका ब्‍योरा भी कमेटी को उपलब्‍ध कराने को कहा गया है।

ग्रामीण अथवा दूरदराज के क्षेत्रों में डिजिटाइजेशन के लिए जहां पर मल्‍टीपल सिस्‍टम ऑपरेटर्स से डिजिटल सिग्‍नल्‍स नहीं मिल पा रहे हैंसमिति का कहना है, ‘केबल ऑपरेटर्स को सुझाव दिया गया है कि या तो वह मल्‍टीपल सिस्‍टम ऑपरेटर रजिस्‍ट्रेशन हासिल करने के बाद डिजिटल हेड एंड को लेकर अपना सेटअप लगाएं अथवा डिस्‍ट्रीब्‍यूशन के लिए हेड इन द स्‍काई (HITS) ऑपरेटर्स से सिग्‍नल्‍स हासिल करें।’

समिति ने यह भी सुझाव दिया है कि कंटेंट में सुधार करके और बेहतर तरीके से लागत को व्यवस्थित करके ग्रामीण क्षेत्रों में डीडी फ्री डिश को और लोकप्रिय बनाया जाए।

कुछ ब्रॉडकास्‍टर्स और डीटीएच ऑपरेटर्स द्वारा नए रेगुलेटी फ्रेमवर्क (Tariff Order, Interconnection Regulations, Quality of Services Regulations and Consumer Grievance Redressal Regulations) को दिल्‍ली और मद्रास हाईकोर्ट में दी गई चुनौतियों पर चिंता जताते हुए समिति ने कोर्ट से इन मामलों में जल्‍द सुनवाई करने का आग्रह किया है।

 

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