पत्रकारों के खिलाफ बढ़ते अपराधों को देखते हुए सरकार ने लिया अब ये फैसला

Tuesday, 10 April, 2018

समाचार4मी‍डिया ब्यूरो ।।

देशभर से आए दिन पत्रकारों के खिलाफ हिंसा की खबरें आती रहती हैं। इस स्थिति को देखते हुए 'राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो' (NCRB) इस साल से पत्रकारों के खिलाफ होने वाले अपराध का डाटाबेस तैयार करेगा। वार्षिक आधार पर तैयार होने वाले इस डाटाबेस में हत्‍या, हत्‍या का प्रयास, हमला और धमकी जैसे अपराधों को शामिल करने के साथ-साथ उस केस की पूरी रिपोर्ट उसमें समाहित की जाएगी। अमुक केस में क्या-क्या हुआ, क्या एक्शन लिया गया, क्या सरकारी कार्यवाही हुई , क्या पुलिसिया रुख रहा, सभी बातों को डाला जाएगा।

सरकार की ओर से प्रेस क्‍लब ऑफ इंडिया के अध्‍यक्ष गौतम लाहिड़ी को भेजे पत्र में यह बात कही गई है। पत्र में आगे कहा गया है कि (NCRB) अब तक मासिक अपराध आंकड़ों के जरिये ही मीडियाकर्मियों पर हमलों से संबंधित डाटा एकत्रित करता रहा है। इसमें दर्ज मामले और गिरफ्तार व्यक्ति का नाम ही शामिल होता है।   

सरकार की ओर से यह फैसला ऐसे समय में आया है जब 'प्रेस क्‍लब ऑफ इंडिया' (Press Club of India) के नेतृत्‍व में पत्रकारों के एक प्रतिनिधिमंडल ने पिछले साल अक्‍टूबर में केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात कर देश भर में पत्रकारों के खिलाफ बढ़ रहे हमलों की ओर उनका ध्‍यान आकर्षित किया था। इस संबंध में पत्रकारों ने राजनाथ सिंह को एक ज्ञापन भी सौंपा था।

ज्ञापन में प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय गृहमंत्री से पत्रकारों के जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करने और इसके लिए कानून बनाने की मांग की थी। इसके अलावा गृहमंत्रालय द्वारा विभिन्‍न राज्‍यों में पत्रकारों के खिलाफ हिंसा और उनकी हत्‍या संबंधी लंबित मामलों की स्‍टेटस रिपोर्ट तैयार करने के लिए गृहमंत्री से हस्‍तक्षेप करने की मांग की गई थी।

प्रतिनिधिमंडल ने इस मुलाकात में गृहमंत्री का ध्‍यान इस ओर भी दिलाया था कि पिछले तीन दशक में पत्रकारों के खिलाफ हिंसा के मामले में किसी को दोष सिद्ध नहीं ठहराया गया है। ज्ञापन में राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (NCRB) का हवाला देते हुए यह भी कहा गया था कि वर्ष 2017 से मीडियाकर्मियों पर 142 हमले हुए हैं और वर्ष 1992 से 2016 के बीच 70 पत्रकारों की हत्‍या हो चुकी है। प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि पत्रकारों पर हमले की घटनाएं लगातार जारी हैं और वर्ष 2017 में पत्रकार गौरी लंकेश समेत कई पत्रकारों की हत्‍या हो चुकी है। उस दौरान राजनाथ सिंह ने पत्रकारों की मांगों पर उचित कार्रवाई करने का आश्‍वासन दिया था, लेकिन अभी तक ये मांगे केवल कागजों में ही दफ़न हैं।

 

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