क्या ब्लॉग संस्था का रूप ले सकता है?
सुप्रिया अवस्थी
समाचार4मीडिया.कॉम
ब्लॉग जिसे अभी तक भड़ास का माध्यम ही समझा जाता है और ब्लॉगर चाहे वे कितना भी अच्छा कंटेंट क्यों न दे अपने पाठकों से प्रशंसा के दो शब्द नहीं सुन पाते हैं जिनके वे हकदार होते हैं। ऐसे में प्रश्न यह उठता है कि क्या ब्लॉग कभी एक संस्थान के रूप में उभर सकेगा? यहां बात चाहे किसी भी भाषा के ब्लॉगर की क्यों न हो सभी ब्लॉगर को एक जैसी समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
ब्लॉग को अगर एक कमाई के साधन के रूप में न देखा जाए तो पत्रकारिता के नजरिए से यह एक बहुत ही अच्छा प्रयास है, लेकिन जब कोई रिसर्च करके ब्लॉग पर अपनी स्टोरी पोस्ट करता है तो उसकी अपेक्षाएं कहीं अधिक बढ़ जाती है। आखिर उसे एक पत्रकार के रूप में वह सम्मान क्यों नहीं दिया जाना चाहिए, जब कि वह स्टोरी पोस्ट करने से पहले चार गुना ज्यादा मेहनत करता है।
वरिष्ठ पत्रकार और ब्लॉगर प्रमोद जोशी
के अनुसार, “ ब्लॉग न्यू मीडिया का एक ऐसा माध्यम है जिसमें बड़ी पूंजी लगाए बिना, एक ही कम्प्यूटर सिस्टम पर चार-पांच लोगों का एक समूह भी कार्य कर सकता है, लेकिन ब्लॉगर द्वारा सीमा-रेखा के दायरे से बाहर जाने पर अन्य ब्लॉगर की प्रतिष्ठा और स्टोरी पर लोग अंगुली उठाते हैं जो गलत है।”
के अनुसार, “ ब्लॉग न्यू मीडिया का एक ऐसा माध्यम है जिसमें बड़ी पूंजी लगाए बिना, एक ही कम्प्यूटर सिस्टम पर चार-पांच लोगों का एक समूह भी कार्य कर सकता है, लेकिन ब्लॉगर द्वारा सीमा-रेखा के दायरे से बाहर जाने पर अन्य ब्लॉगर की प्रतिष्ठा और स्टोरी पर लोग अंगुली उठाते हैं जो गलत है।”ब्लॉग की पाठकों और लोगों के बीच बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए, ब्लॉग से ब्लॉगर की अपेक्षाएं कहीं अधिक बढ़ गयी है अब वे इस कोशिश में है कि इसे क्यों न कमाई का जरिया बनाया जाए? हालांकि इसमें कोई दो राय नहीं है कि टेक्नॉलोजी ब्लॉग के लिए कई नए रास्ते खोल रहा है, लेकिन क्या तकनीक के माध्यम से ब्लॉग पर विज्ञापन लाया जा सकता है? क्या यह लाभ प्राप्त करने का रास्ता खोज सकता है? ऐसे बहुत सारे प्रश्न आज भी खड़े हैं।
प्रभासाक्षी के समूह संपादक और ब्लॉगर बालेन्दु शर्मा दधीच
के अनुसार, “ब्लॉग का स्थायित्व और सफलता का निर्धारण ब्लॉगर द्वारा प्रकाशित होने वाले कंटेंट के आधार पर किया जाता है। लेकिन ब्लॉगर की सबसे बड़ी समस्या यह है कि ब्लॉग अभी भी पाठकों के बीच वह जगह नहीं बना पाया है जो प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया की है। ब्लॉग पर प्रकाशित होने वाला कंटेंट चाहे कितना भी रिसर्च करके क्यों न लिखा जाए लेकिन वह सिर्फ 200 या 300 लोगों तक ही पहुंच पाता है। पढ़ने वालों में कुछ रीडर होते है और अधिकतर ब्लॉगर। इसलिए अभी विज्ञापनदाता भी विज्ञापन के लिए इस ओर नहीं सोच पा रहे हैं।”
के अनुसार, “ब्लॉग का स्थायित्व और सफलता का निर्धारण ब्लॉगर द्वारा प्रकाशित होने वाले कंटेंट के आधार पर किया जाता है। लेकिन ब्लॉगर की सबसे बड़ी समस्या यह है कि ब्लॉग अभी भी पाठकों के बीच वह जगह नहीं बना पाया है जो प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया की है। ब्लॉग पर प्रकाशित होने वाला कंटेंट चाहे कितना भी रिसर्च करके क्यों न लिखा जाए लेकिन वह सिर्फ 200 या 300 लोगों तक ही पहुंच पाता है। पढ़ने वालों में कुछ रीडर होते है और अधिकतर ब्लॉगर। इसलिए अभी विज्ञापनदाता भी विज्ञापन के लिए इस ओर नहीं सोच पा रहे हैं।”हालांकि इसमें कोई दो राय नहीं है कि भविष्य में ब्लॉग मीडिया के मजबूत कंधों के रुप में उभर कर आएगा लेकिन इसमें भी बड़ी दुविधा यह है कि मीडिया के बड़े घरानों का इसमें हस्तक्षेप होते ही इसका भी व्यावसायिकरण हो जाएगा। अगर अंग्रेजी भाषा के ब्लॉगरो पर ध्यान दें तो उनकी स्थिति हिन्दी से ज्यादा अच्छी है। उनके ब्लॉग को देखकर कंटेंट और किंग वाला अहसास होता है।
नोट: समाचार4मीडिया देश के प्रतिष्ठित और नं.1 मीडिया पोर्टल एक्सचेंज4मीडिया का उपक्रम है। समाचार4मीडिया.कॉम में हम आपकी राय और सुझावों की कद्र करते हैं। आप अपनी राय, सुझाव और ख़बरें हमें samachar4media@exchange4media.com पर भेज सकते हैं या 09899147504/ 09911612942 पर संपर्क कर सकते हैं।
- Category:



टिप्पणी
आप की खबर
उम्दा लेखन सुप्रिया जी