जानें क्यों, बड़े अखबारों ने लिया ये 'बड़ा' फैसला...

जानें क्यों, बड़े अखबारों ने लिया ये 'बड़ा' फैसला...

Monday, 28 May, 2018




अभिषेक मेहरोत्रा / निशांत सक्सेना ।।

इन दिनों देश में न्‍यूजप्रिंट की मांग लगातार बढ़ती जा रही है और वर्ष 2020 तक इसके 2.8 मिलियन टन तक पहुंचने की संभावना है। देश की बड़ी रेटिंग एजेंसियों में शामिल 'केयर रेटिंग्‍स' (Care Ratings) के सर्वे के अनुसारदेश में साक्षरता की दर बढ़ने के अलावा अखबार और मैगजींस का सर्कुलेशन भी लगातार बढ़ रहा हैजिस वजह से न्‍यूजप्रिंट की मांग बढ़ती जा रही है। यदि यही रफ्तार रही तो यह मांग वर्ष 2020 तक 2.8 मिलियन टन पहुंच जाएगी।

न्‍यूजप्रिंट की बढ़ती हुई कीमतों से मुकाबला करने के लिए पिछले दिनों हिंदी दैनिक 'अमर उजाला', 'हिन्‍दुस्‍तानऔर 'दैनिक जागरणने अपनी कीमतों में एक रुपए की वृद्धि की है।

इसी क्रम में 'दैनिक भास्‍करने आधुनिक प्रिंटिंग टेक्‍नोलॉजी अपनानी शुरू कर दी हैइस टेक्नॉलजी के तहत कम वजन वाले कागज का प्रयोग होता है। जिस कारण इसे करीब 4.76 प्रतिशत की बढ़त का लाभ मिलने की उम्‍मीद है। इसके अलावा इसने ग्‍लोबल न्‍यूजप्रिंट पार्टनर्स के साथ दीर्घकालिक करार भी किया है।   

हालांकि न्‍यूजप्रिंट की मांग में बढ़ोतरी पब्लिशिंग इंडस्‍ट्री और पेपर इंडस्‍ट्री दोनों के लिए अच्‍छी खबर है लेकिन न्‍यूजप्रिंट की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी न सिर्फ देश में बल्कि वैश्विक स्‍तर पर चिंता का मुख्‍य कारण बनी हुई है। लकड़ी की लुगदी (पल्‍प) से तैयार होने वाले न्‍यूजप्रिंट का मुख्‍य इस्‍तेमाल अखबार के साथ-साथ विभिन्‍न पब्लिकेशंस और एडवर्टाइजिंग मैटीरियल में किया जाता है।

कीमतों के बारे में इस सर्वे में कहा गया है कि मार्केट की स्थिति के साथ ही मार्केट में लुगदी की सप्‍लाई कम हो रही है जबकि इसकी मांग बढ़ती जा रही हैजिस कारण इसकी कीमतों में वृद्धि की हो रही है।  

हालांकि वर्ष 2017 की शुरुआत में पेपर कंपनियों ने न्‍यूजप्रिंट की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं की थी। इसका मुख्‍य कारण बाजार में कंप्‍टीशन के साथ ही बिजली-र्इंधन की कीमतें भी कम ही थीं। लेकिन 2017 के मध्‍य तक आते-आते चीन ने मिक्‍स्‍ड ग्रेड वेस्‍ट पेपर के इस्‍तेमाल पर रोक लगा दीजिससे लकड़ी की लुगदी की मांग बढ़ गई। इंडो‍नेशिया व मलेशिया ने चीन को अधिक कीमत पर इसका निर्यात करना शुरू कर दियाजिससे इसकी कीमतों में बढ़ोतरी हो गई। सप्‍लाई बाधित होने से भी काफी प्रभाव पड़ा है।  

लगतार मांग बढ़ने और चीन के प्रतिबंध के कारण वर्ष 2018 के शुरुआती तीन महीनों में यूरोपचीन और उत्‍तरी अमेरिका में पल्‍प की कीमतें काफी बढ़ गईं। इसके अलावा वित्‍तीय वर्ष 2018 (FY18) में अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर कोयले की कीमतों में काफी उछाल आयाजिस कारण भी लागत बढ़ने की संभावना है।  

वैश्विक स्‍तर की बात करें तो वर्ष 2017 में 400 मिलियन टन से ज्‍यादा पेपर और पेपर प्रॉडक्‍ट इस्‍तेमाल किए गए। डिजिटल मीडिया और पेपरलेस कम्‍युनिकेशन के कारण विभिन्‍न पेपर और पल्‍प मिल इंडस्‍ट्री ने पिछले पांच वर्षों में काफी कम अनुबंध किए हैं। हालांकि उभरते हुए मार्केट में मांग में आंशिक रूप से गिरावट आई है।  

हालांकि डिजिटल मीडिया और ऑनलाइन एडवर्टाइजिंग के कारण न्‍यूजप्रिंट की मांग में थोड़ी कमी आई है लेकिन ऑनलाइन रिटेल के आने से पेपरबोर्ड प्रॉडक्‍ट इनपुट मैटीरियल की मांग बढ़ गई है।

यदि हम अपने देश की बात करें तो हमारे यहां साक्षरता बढ़ रही है। शिक्षा का अधिकार के साथ सरकार भी इसके लिए कई योजनाएं जैसे-सर्वशिक्षा अभियानमिड-डे-मील योजना आदि चला रही है। इस कारण प्रिंटिंग और राइटिंग पेपर की मांग भी बढ़ती जा रही है।

घरेलू बाजार में प्रिंटिंग और राइटिंग कागज की मांग 29 प्रतिशत है। भारतीय पेपर इंडस्‍ट्री में न्‍यूजप्रिंट की हिस्‍सेदारी करीब 15 प्रतिशत है और इसमें वित्‍तीय वर्ष 2008-17 के बीच सीएजीआर (CAGR) 3.5 प्रतिशत बढ़ी है। न्‍यूजप्रिंट की प्रमुख मांग प्रिंट मीडिया इंडस्‍ट्री में इसके इस्‍तेमाल पर निर्भर करती है। वित्‍तीय वर्ष 2013 में जहां इंपोर्टेड न्‍यूजप्रिंट की मांग 50 प्रतिशत थी, वह वित्‍तीय वर्ष 2017 के दौरान लगभग 60 प्रतिशत हो गई है।

 

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