विज्ञापनों में इन शब्दों पर अब लगेगी रोक

विज्ञापनों में इन शब्दों पर अब लगेगी रोक

Monday, 30 November, -0001

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

टीवी और अखबारों में आने वाले खाद्य पदार्थो के विज्ञापनों पर अकसर आपने देखा होगा कि कैसे कंपनियां में उनके फ्रेश और नेचुरल होने के दावे करती हैं। लेकिन अब ये कंपनियां ऐसा नहीं कर सकेंगी, क्योंकि सरकार इसके खिलाफ कुछ ठोस कदम उठाने जा रही है जिसके बाद खाद्य पदार्थो के विज्ञापनों में फ्रेश (ताजा), नेचुरल (प्राकृतिक), ट्रेडिशनल (पारंपरिक) और ओरिजिनल (असली) जैसे शब्दों का इस्तेमाल करना मुश्किल हो सकता है।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने विज्ञापनों में इन शब्दों के प्रयोग को नियंत्रित करने के लिए कानून में जरूरी बदलाव का प्रस्ताव रखा है।  प्रस्तावित खाद्य सुरक्षा एवं मानक (विज्ञापन एवं दावा) नियमों के ड्राफ्ट के तहत फ्रेश शब्द का इस्तेमाल सिर्फ उन्हीं उत्पादों के साथ किया जा सकता है, किसी भी तरह प्रोसेस नहीं किया गया हो। ऐसे उत्पादों को केवल धोने, छीलने, ठंडा करने और सुरक्षित प्रयोग के लिए बेहद जरूरी प्रक्रियाओं से गुजारने की ही अनुमति होगी। इस प्रक्रिया में इनका मूल गुण प्रभावित नहीं होना चाहिए।

खाद्य सुरक्षा नियामक FSSAI की ओर से तैयार ड्राफ्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि फ्रेश या फ्रेशली शब्द का प्रयोग अन्य किसी संदर्भ में नहीं किया जा सकता। ऐसा कोई भी उत्पाद जिसमें अलग से कुछ मिलाया गया हो या जिसे पैकिंग, स्टोरेज या सप्लाई चेन की किसी प्रक्रिया से गुजारा गया हो, उसे फ्रेशली स्टोर्ड या फ्रेशली पैक्ड नहीं कहा जा सकता।

ड्राफ्ट में कहा गया है कि नेचुरल शब्द का इस्तेमाल भी पौधे, पशु, माइक्रो ऑर्गेनिज्म या मिनरल से बने ऐसे उत्पाद के लिए ही किया जा सकता है, जिसमें कोई अन्य पदार्थ नहीं मिलाया गया हो। इन उत्पादों को केवल उन्हीं प्रक्रियाओं से गुजारा जा सकता है, जो इन्हें खाने योग्य बनाने के लिए जरूरी हों। इनमें भूनना, सुखाना, जमाना जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं। प्रक्रियाओं में किसी रसायन का प्रयोग नहीं होना चाहिए।

अलग-अलग प्राकृतिक पदार्थो से मिलाकर बने खाद्य को नेचुरल नहीं कहा जा सकेगा। इन्हें मेड फ्रॉम नेचुरल इंग्रेडिएंट्सलिखा जा सकता है। मसौदे में नेचुरल के स्थान पर रियल या जेनुइन जैसे शब्दों के प्रयोग की भी अनुमति नहीं दी गई है। इसमें इसी तरह के कई अन्य शब्दों के प्रयोग को नियंत्रित करने का भी प्रस्ताव दिया गया है। अब इस मसौदे पर सभी संबद्ध पक्षों की राय ली जाएगी।

 

 

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