बाबा रामदेव की कंपनी अपने विज्ञापनों में कमी निकालने पर नाराज, ऐड काउंसिल से करेगी दो-दो हाथ

Thursday, 14 July, 2016

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

विज्ञापनों पर निगरानी रखने वाली संस्था, एडवर्टाइजिंग स्टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया (ASCI) ने दोबारा से योगगुरू बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद की खिंचाई करते उसके विज्ञापनों को ‘भ्रामक’ बताया, जिसके एक हफ्ते बाद अब ये खबर आ रही है कि पतंजलि आयुर्वेद ASCI से दो-दो हाथ करने के मूड में है।

कंपनी अब इस पर कानूनी कार्रवाई करने की योजना बना रही है। बता दें कि पतंजलि इस समय बड़ी विज्ञापनदाता कंपनियों में शुमार हो चुकी है। दरअसल पतंजलि आयुर्वेद कंपनी बॉम्बे हाई कोर्ट के एक फैसले के बाद से ASCI  को कुछ बहुराष्ट्रीय कंपनियों के प्रभाव में काम करने वाले निकाय मानती है।

बॉम्बे हाई कोर्ट ने पिछले साल अपने एक फैसले में ASCI को नियामक मानने से इनकार कर दिया था। पिछले साल टेलिशॉप शॉपिंग के मामले में कोर्ट ने कहा था कि ASCI कोई सांविधिक निकाय या सरकारी नियामक नहीं है और इसे याचिकाकर्ता टेलिशॉप शॉपिंग के किसी भी व्यावसायिक विज्ञापन पर रोक लगाने का अधिकार नहीं है और टेलिशॉप शॉपिंग ASCI की सदस्य भी नही है।

उम्मीद है कि पतंजलि की लीगल टीम कोर्ट के इस फैसले को अपने केस में ढाल बनाकर इस्तेमाल कर सकती है।

पतंजलि के मैनेजिंग डायरेक्टर आचार्य बालकृष्ण के मुताबिक, उनकी लीगल टीम मीडिया में आई रिपोर्ट के तौर पर कोर्ट के इस फैसले पर काम कर रही है।

इस साल जुलाई महीने में पतंजलि के जिन विज्ञापनों के खिलाफ शिकायत मिली थी उसमें पतंजलि का कच्ची घानी सरसों का तेल और केश क्रांति तेल के ऐड शामिल थे, जिसके बाद ASCI ने यह कहते हुए फटकार लगाई थी कि विज्ञापन में कही गई बात ‘बाकी तेलों में मौजूद खनिज पदार्थों से कैंसर हो सकता है’ बिल्कुल गलत और भ्रामक है।

दरअसल पतंजलि ने अपने कच्ची घानी सरसों तेल के विज्ञापन में दावा किया है कि उसकी प्रतिस्पर्धी कंपनियों द्वारा बेचा जा रहा सरसों का तेल सॉल्वेंट एक्सट्रैक्शन प्रक्रिया से निकाला गया तेल मिलावटी है और इसमें न्यूरोटॉक्सिन हैक्जेन है। विज्ञापन में इसकी पुष्टि नहीं की गई है। नियामक ने पतंजलि के विज्ञापन में उत्पाद के बारे में दावों को बहुत बढ़-चढ़ कर किया गया भ्रामक दावा करार दिया है। विनियामक ने कहा है कि पतंजलि ने यह भी साबित नहीं किया कि उसके प्रतिस्पर्धियों के महंगे रसों में फलों का गूदा कम है। नियामक के मुताबिक पतंजलि के दुग्धामृत, दंत कांति अन्य उत्पादों के दावे को भी पुष्ट नहीं किया गया है।

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